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आप जिन हस्तियों, किरदारों को आदर्श मानकर उनकी बायोग्राफी काफी खर्च करके पढ़ रहे हैं, हो सकता है कि वह उन्होंने लिखी ही न हो, बिल्कुल यह संभव है। ये खुलासा किया है अमेरिकी लेखिका और टेक एक्सपर्ट कश्मीर हिल ने उनकी बायोग्राफी सालभर पहले अमेजन डॉटकॉम पर आ गई और 2600 रुपए में बिक रही थी, पर उन्हें खबर तक नहीं थी। कश्मीर इस जालसाजी का भंडाफोड़ करने में जुट गईं। इस दौरान उन्हें चौंकाने वाली चीजें पता चलीं। कश्मीर के अलावा कई हस्तियों, एथलीट्स और पत्रकारों की ‘नकली बायोग्राफी’ प्लेटफॉर्म पर मौजूद थी। जानिए और क्या मिला पड़ताल में… हाल ही में एक परिचित का मैसेज आया- ‘क्या तुम्हारी कोई बायोग्राफी आई है? तुमने बताया नहीं..?’ मैं हैरान रह गई। मैंने तुरंत अमेजन पर जाकर सर्च किया तो दंग रह गई। वहां ‘द बायोग्राफी ऑफ कश्मीर हिल’ किताब मौजूद थी। मेरे एडिटर ने मुझे इसकी एक कॉपी दी तो मजबूरन पढ़नी ही पड़ी। 90 पन्नों की किताब पढ़ना किसी सजा से कम नहीं था। पूरी किताब ‘एआई स्लॉप’ यानी एआई से बनाए गए घटिया और अविश्वसनीय कंटेंट का पुलिंदा लगी। इसमें मेरे बारे में इंटरनेट पर उपलब्ध कुछ तथ्य तो थे, पर अधिकांश बातें पूरी तरह मनगढ़ंत थीं। मेरे कथित जटिल कॉफी बनाने का रूटीन विस्तार से बताया गया, जबकि कॉफी हमेशा मेरे पति बनाते हैं। सबसे चौंकाने वाला दावा यह था कि लेखक ने मेरी बचपन की डायरी पढ़ी और परिचितों से बातचीत की थी। मैंने जांच की तो पता चला कि ‘जॉन क्रेन मिलर’ नामक शख्स ने सिर्फ हफ्तेभर में मेरे जैसे 10 लेखकों की बायोग्राफी प्रकाशित कर दी थी। उसकी प्रोफाइल तस्वीर भी चुराई हुई निकली। चैटजीपीटी के आने के बाद अमेजन पर एआई से बनी ई-बुक्स की बाढ़ आ गई है। आसान ‘पैसिव इनकम’ के लालच में लोग बिना मेहनत के एआई से फर्जी और मनगढ़ंत किताबें तैयार कर तेजी से प्रकाशित कर रहे हैं। मैंने रिव्यू लिखकर इस फर्जीवाड़े को उजागर किया व लेखक से संपर्क करने की मांग की, तो वह किताब और लेखक की सभी किताबें प्लेटफॉर्म से गायब हो गईं। पड़ताल के दौरान मेरी मुलाकात मैरीलैंड के 70 वर्षीय बिल जॉन्स से हुई, जिन्होंने चैटजीपीटी की मदद से 445 किताबें लिखीं और उनसे हर महीने लाखों रुपए कमा रहे हैं। मेरी बायोग्राफी देखकर उन्होंने कहा,‘इसमें दम नहीं, ऐसी किताब तो मैं दोपहर तक लिख दूं।’ मैं यह घटना इसलिए सामने लाई हूं ताकि रीडर्स जागरूक रहें और इन फर्जी लेखकों का बहिष्कार करें।’-कश्मीर हिल कैसे पहचानें वास्तविकता ऑथर्स गिल्ड की सीईओ मैरी रासेनबर्गर कहती हैं,‘ किसी लेखक ने हफ्तेभर या एक महीने में 9-10 बायोग्राफी या किताबें प्रकाशित कर दी हैं, तो 99% आशंका है कि यह एआई से रची गई है। शुरुआती पन्नों को मुफ्त में पढ़ने वाले फीचर (लुक इनसाइड) का इस्तेमाल करें और भाषा की शैली देखें। वाक्यों में एम-डैश, अत्यधिक औपचारिकता, भारी-भरकम शब्द और बार-बार दोहराव दिखे तो समझ लीजिए कि भाषा मशीनी है।’
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चंद घंटों में एआई से तैयार हो रही फेक बायोग्राफी:'अमेजन’ पर खुद की फर्जी बायोग्राफी देख लेखिका ने जांच की और बेनकाब किया ‘खेल’
