Sonam Wangchuk Hunger Strike Health Impacts; Ketosis Energy – Starvation Death


जंतर-मंतर पर 21 दिन से भूख हड़ताल पर बैठे सोनम वांगचुक को शनिवार सुबह पुलिस उठा ले गई। अभिजीत दीपके ने कहा- ‘पुलिस ने सोनम सर को गालियां दीं और घसीटकर जबरन ले गए।’

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नई दिल्ली के डीसीपी ने बताया कि दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश के मुताबिक सोनम वांगचुक की बिगड़ती सेहत की वजह से उन्हें सफदरजंग हॉस्पिटल में शिफ्ट किया गया है।

अस्पताल पहुंची वांगचुक की पत्नी ने कहा है कि हमारी सहमति के बिना उन्हें न तो जबरन मुंह से कुछ खिलाया जाए और न ही नस के जरिए कोई दवा या तरल पदार्थ दिया जाए।

क्या बिना मर्जी सोनम वांगचुक को कुछ भी खिलाना गैरकानूनी है और इतने दिन बिना खाए उनके शरीर के भीतर क्या-क्या हुआ होगा; जानेंगे आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: क्या सरकार जबरन सोनम का अनशन तुड़वा सकती है? जवाब: भूख-हड़ताल भी अभिव्यक्ति यानी अपनी बात कहने का तरीका है। आर्टिकल 19 के तहत ये एक मूल अधिकार है। यानी सरकार किसी को भूख-हड़ताल करने से रोक नहीं सकती।

वहीं, आर्टिकल 21 से जीवन का अधिकार मिलता है और सरकार की ये जिम्मेदारी है कि वह किसी व्यक्ति की जान को बचाए रखे। इसीलिए भारत में आत्महत्या करना या इसके लिए किसी को उकसाना अपराध है।

इन दो कानूनों से जुड़ा एक रोचक मामला मणिपुर की इरोम चानू शर्मिला का है, जो 2000 से 2016 तक 16 साल भूख हड़ताल पर रही थीं। उन्हें अनशन के तीसरे दिन ही आत्महत्या के प्रयास के आरोप में IPC की धारा 309 के तहत गिरफ्तार कर लिया गया और 16 साल तक सरकारी अस्पताल में रखकर जबरन फीडिंग ट्यूब से खाना दिया गया।

हालांकि 2021 में मद्रास हाई कोर्ट ने ऐसे ही एक मामले में कहा कि भूख-हड़ताल के चलते किसी को आत्महत्या के प्रयास में आरोपी नहीं बनाया जा सकता।

सोनम वांगचुक का केस भी इन्हीं दो मूल अधिकारों के बीच झूल रहा है।

सुप्रीम कोर्ट के वकील विराग गुप्ता कहते हैं कि सोनम पर इरोम चानू की तरह आत्महत्या की कोशिश का मामला दर्ज नहीं किया जाएगा। लेकिन सरकार आर्टिकल 21 का हवाला देकर उनका अनशन तुड़वा सकती है। उनकी जान बचाने के लिए फीडिंग ट्यूब से तरल खाना या फिर नसों से जरूरी फ्लूइड दिया जा सकता है। ये गैरकानूनी नहीं होगा।

सोनम का अनशन तुड़वाने के लिए दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा था, ‘डॉक्टरों से उनकी नियमित जांच कराई जाए और जरूरत पड़ने पर उनकी जान बचाने के लिए जरूरी कदम उठाए जाएं। क्योंकि हर नागरिक की जान कीमती है।’

हालांकि भूख हड़ताल को लेकर 1991 में वर्ल्ड मेडिकल एसोसिएशन की ‘माल्टा घोषणा’ के मुताबिक, कोई मानसिक रूप से सक्षम व्यक्ति, यानी जो होश में हो, उसकी दिमागी स्थिति ठीक हो, उसे उसकी मर्जी के बिना खाना खिलाना नैतिक रूप से गलत है। इसे अमानवीय तथा अपमानजनक व्यवहार माना गया है।

सवाल-2: जबरन अनशन तुड़वाने को लेकर सुप्रीम कोर्ट का क्या रुख रहा है? जवाब: सुप्रीम कोर्ट ने 2024 में साफ तौर पर कहा है कि अनशन तोड़ने के लिए तब तक मजबूर नहीं किया जा सकता, जब तक ये उनकी जिंदगी बचाने के लिए जरूरी न हो।

दरअसल, 26 नवंबर 2024 से 70 साल के किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल ने विवादित कृषि कानूनों के खिलाफ 20 दिन भूख हड़ताल की।

सुप्रीम कोर्ट के मौजूदा चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने इसी मामले में कहा था, ‘भूख हड़ताल पर बैठे व्यक्ति को कोई नुकसान नहीं होना चाहिए, ये तय करना सरकार का संवैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारी है।’

कोर्ट ने कहा कि केंद्र और पंजाब की राज्य सरकार को उनकी उम्र, बीमारी पर ध्यान देना चाहिए। उनका कर्तव्य है कि वे जगजीत को तत्काल मेडिकल एड देने के लिए सभी जरूरी कोशिश करें।

सुप्रीम कोर्ट ने ये भी कहा, ‘उन्हें अनशन तोड़ने के लिए तब तक मजबूर न किया जाए, जब तक ये उनकी जिंदगी बचाने के लिए जरूरी न हो।’

6 अप्रैल 2025 को 133 दिन के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान और केंद्रीय रेल राज्य मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू की अपील के बाद जगजीत ने अपना अनशन तोड़ दिया था।

2011 में बाबा रामदेव की अनशन की कोशिश पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकार को अनशन करने वालों के खिलाफ शत्रुतापूर्ण नजरिया नहीं रखना चाहिए।

कोर्ट ने कहा कि सरकार अभिव्यक्ति के अधिकार को तब तक रोक नहीं सकता, जब तक कि सांप्रदायिक समस्या न हो, सामाजिक व्यवस्था न बिगड़े और कोई शांति भंग का कोई खतरा न हो। भूख हड़ताल, विरोध का ऐसा रूप है, जिसे हमारे संविधान में ऐतिहासिक और कानूनी दोनों तरह से स्वीकार किया गया है। इसकी शुरुआत महात्मा गांधी के सत्याग्रह से हुई है।

सवाल-3: तो क्या वाकई सोनम वांगचुक की जान को खतरा था? जवाब: भुखमरी से जुड़ी कई रिसर्च 3 जरूरी बातें बताती हैं..

  1. कोई दुबला-पतला व्यक्ति खाना न खाए, तो उसके शरीर के वजन का करीब 18% तक कम होने पर भूख से मरने की नौबत आ जाती है। ऐसा औसतन 30 से 50 दिनों के बाद होता है।
  2. मोटे लोग अपना वजन करीब 20% तक कम होने तक जिंदा रह सकते हैं यानी कुछ दिन और ज्यादा।
  3. कुछ और फैक्टर्स भी हैं, जैसे- कोई स्वस्थ व्यक्ति है या पानी और नमक वगैरह ले रहा है, तो बिना खाने के भी कुछ ज्यादा दिन चला जा सकता है।

सोनम का वजन अनशन की शुरुआत में 65.9 किलो था, जो 18 जुलाई तक 9.5 किलो घटकर 56.4 हो गया। यानी करीब 15% की गिरावट। उनका ब्लड प्रेशर और शुगर लेवल भी नॉर्मल से कम चल रहे थे।

उत्तर प्रदेश बेस्ड डॉक्टर ऑफ मेडिसिन (MD) अजय सिंह कहते हैं कि ये कहना ठीक नहीं होगा कि तत्काल उनकी जान को कोई खतरा था। वे पानी ले रहे थे। हालांकि 20 दिन के अनशन के बाद मेडिकल जांचों और लगातार निगरानी की जरूरत है, क्योंकि उनकी उम्र 59 साल है।

वहीं सफदरजंग अस्पताल ने कहा है कि उपवास और डिहाइड्रेशन के चलते सोनम कमजोर हैं। फिलहाल उनकी स्थिति स्थिर है, लेकिन सारे पैरामीटर्स को सामान्य करने के लिए उन्हें लगातार निगरानी, चिकित्सकीय देखभाल और इलाज की जरूरत है।

मध्यप्रदेश मेडिकल साइंस यूनिवर्सिटी, जबलपुर में न्यूरोलॉजिस्ट और मेडिसिन एक्सपर्ट डॉ. टी.एन दुबे कहते हैं, ‘मेडिकल साइंस में इस बात कि साफ पुष्टि नहीं है कि इंसान कितने दिन तक भूख बर्दाश्त कर सकता है। भूख तब तक जानलेवा नहीं होगी, जब तक कीटोसिस न शुरू हो जाए। एक बार ये प्रक्रिया शुरू हो जाए, तो माना जाता है कि व्यक्ति कोमा में जा सकता है।

दरअसल, बिना खाने के कुछ दिन बाद कीटोसिस की फेज शुरू हो जाती है। इसके बाद चौथी फेज और फिर व्यक्ति की मृत्यु।

आखिर भूखे रहने के दौरान हमारे शरीर में होता क्या है, इसके चारों फेज समझते हैं…

सवाल-4: अब आगे कॉकरोच पार्टी के आंदोलन और सोनम के अनशन का क्या होगा? जवाबः आगे 3 सिनैरियो बन सकते हैं… 1. सोनम अस्पताल से ही अनशन करें

  • सोनम अस्पताल से ही अपना अनशन जारी रख सकते हैं। जबरन किसी फ्लूइड का इंजेक्शन लगाने से अनशन नहीं टूटता है। वह खुद खाने-पीने से इनकार कर सकते हैं।
  • इरोम चानू ने 16 साल इसी तरह अनशन किया था। इतिहास में भी कई लोग ड्रिप लगवाते हुए भी अनशन पर रहे हैं।

2. कॉकरोच पार्टी का आंदोलन तेज हो सकता है

  • अभिजीत दीपके ने दावा किया कि उनकी सोनम से बात हुई है, वो हिरासत में रखे गए हैं और वापस जंतर-मंतर आना चाहते हैं। अभिजीत ने कहा, ‘उनको ले जाने से आंदोलन खत्म नहीं होगा। हम यहीं डटे रहेंगे और 20 जुलाई को संसद तक मार्च करेंगे।’
  • सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो ने कहा, ‘अगर सोनम मार्च में शामिल नहीं हो पाते, तो मैं उनकी ओर से नेतृत्व करूंगी।’
  • पॉलिटिकल एक्टिविस्ट योगेंद्र यादव ने कहा कि प्रोटेस्ट का रुख अगले ४८ घंटों में साफ हो जाएगा। वांगचुक को उठा ले जाने से और युवा प्रोटेस्ट में शामिल होंगे। सरकार को वांगचुक से खतरा है, अब ये आंदोलन और बड़ा होगा।

3. पुलिस प्रदर्शनकारियों से जंतर-मंतर खाली करवा ले

  • ऑल इंडिया स्टूडेंट एसोसिएशन (AISA) की नेहा, आमीन और मनीष भी पिछले 21 दिनों से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं। तीनों की तबीयत लगातार बिगड़ रही है।
  • अभिजीत दीपके ने भी 18 जुलाई से आमरण अनशन की घोषणा की है। उनका कहना है, ‘हम धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे थे, लेकिन अब हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस्तीफे की मांग करेंगे।’
  • नई दिल्ली के डीसीपी ने X पर कहा है कि हम जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से रिक्वेस्ट करते हैं कि वे जल्द से जल्द शांति से जगह खाली कर दें।

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