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धर्मशाला में 35.60 लाख का लोन फ्रॉड:रुपए लेकर नहीं बनाया मकान, कम कीमत पर खरीदी कार, कोर्ट के आदेश पर FIR




कांगड़ा में ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स (अब पंजाब नेशनल बैंक) के साथ 35.60 लाख रुपए की धोखाधड़ी का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोपी बीरज कपूर पर कार लोन, होम लोन और प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत व्यावसायिक ऋण लेकर बैंक को चूना लगाने का आरोप है। इस मामले में अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट सोनल शर्मा की कोर्ट ने पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट को खारिज करते हुए धर्मशाला थाना को तीन अलग-अलग मामलों में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया है। कोर्ट के निर्देशों के बाद धर्मशाला पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि बैंक के पास ऋण वसूली का सिविल अधिकार होने मात्र से आरोपी आपराधिक जिम्मेदारी से मुक्त नहीं हो जाता। यदि रिकॉर्ड में धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी दस्तावेजों का प्रथम दृष्टया खुलासा होता है, तो पुलिस का एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच करना कानूनी दायित्व है। कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर की टिप्पणी कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर टिप्पणी की। आदेश में कहा गया कि जांच अधिकारियों ने फर्जी एनओसी की सत्यता, कथित जाली हस्ताक्षरों, बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय लेनदेन और लोन राशि के वास्तविक उपयोग जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं की जांच किए बिना ही आरोपी के बयानों को सही मान लिया था। अदालत ने इसे जांच में एक गंभीर चूक करार दिया। आरोपी पर तीन अलग-अलग मामलों में धोखाधड़ी के आरोप हैं। पहले मामले में, बीरज कपूर ने 10.60 लाख रुपए का रेनॉल्ट डस्टर कार लोन लिया था। आरोप है कि बैंक में अधिक कीमत का कोटेशन प्रस्तुत किया गया, जबकि बाद में कम कीमत का वाहन खरीदा गया। इसके बाद, कथित तौर पर एक फर्जी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (एनओसी) तैयार कर परिवहन विभाग से वाहन पर बैंक का हाइपोथिकेशन हटवा दिया गया। आरोपी ने यह भी दावा किया है कि उसने तत्कालीन शाखा प्रबंधक को पूरी राशि नकद चुका दी थी। 20 लाख रुपए का होम लोन लिया, नहीं कराया निर्माण दूसरे मामले में आरोपी ने 20 लाख रुपए का होम लोन 75 वर्ग मीटर भूमि गिरवी रखकर प्राप्त किया। बैंक के अनुसार चार किश्तों में पूरी राशि जारी होने के बावजूद मौके पर कोई निर्माण नहीं हुआ और ऋण राशि का उद्देश्य के अनुरूप उपयोग नहीं किया गया। तीसरे मामले में आरोपी ने पीएमईजीपी योजना के तहत स्टील फैब्रिकेशन यूनिट स्थापित करने के लिए 5 लाख रुपए से अधिक का ऋण एवं सब्सिडी प्राप्त की। बैंक निरीक्षण के दौरान मौके पर न मशीनरी मिली और न ही कोई औद्योगिक इकाई संचालित पाई गई। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का दिया हवाला अदालत ने अपने आदेश में ‘प्रियंका श्रीवास्तव बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ तथा ‘ललिता कुमारी बनाम उत्तर प्रदेश राज्य’ के ऐतिहासिक फैसलों का उल्लेख करते हुए कहा कि संज्ञेय अपराध के प्रथम दृष्टया प्रमाण मिलने पर एफआईआर दर्ज करना अनिवार्य है। थाना प्रभारी निरीक्षक नारायण सिंह ने बताया कि तीनों मामलों में अलग-अलग एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। हेड कांस्टेबल किरण कुमार, रोहित कुमार और कमल राणा को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। पुलिस अब फर्जी एनओसी, बैंक रिकॉर्ड, दस्तावेजों और वित्तीय लेनदेन की गहन एवं फोरेंसिक जांच कर रही है।



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