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चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में बंकबाजों पर कसा शिकंजा:वीडियो वायरल के बाद सख्ती, हर पीरियड में होगी अटेंडेंस चेक; पेरेंट्स को जाएगा कॉल




चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले छात्र अब स्कूल टाइम आवारागर्दी नहीं कर पाएंगे। शिक्षा विभाग ने उन पर नकेल कसने के लिए नया प्लान तैयार किया है। जिसके मुताबिक अब स्कूल आवर्स के दौरान बिना प्रिंसिपल की लिखित इजाज़त के कोई भी छात्र गेट के बाहर कदम नहीं रख पाएगा, और नियम तोड़ने पर सीधे उनके माता-पिता को फोन कर रिपोर्ट दी जाएगी। इस संबंधी शिक्षा विभाग की तरफ से आर्डर जारी कर दिए गए हैं। सभी स्कूलों में यह आर्डर सख्ती से लागू किए जाएंगे। स्टूडेंटस के आपत्तिजनक वीडियो हुए थे वायरल दरअसल, यह पूरा मामला एक वीडियो के सामने आने के बाद गरमाया है। हाल ही में स्कूल ड्रेस पहने एक छात्र और छात्रा का पार्कों में आपत्तिजनक हालत में वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो का संज्ञान लेते हुए प्रोफेसर पंडितराव धरेनवर ने डीपीआई कार्यालय में आधिकारिक शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने मांग की थी कि स्कूल टाइम के दौरान यूनिफॉर्म में पार्कों या बाहर घूमने वाले बच्चों पर रोक लगाने के लिए कड़े और जरूरी कदम उठाए जाएं।
शिक्षा विभाग द्वारा जारी आर्डर में यह 7 बातें कहीं गई है 1. बिना परमिशन बाहर जाना पूरी तरह बैन: अब कोई भी स्टूडेंट स्कूल टाइम के दौरान बिना इजाजत के स्कूल परिसर से बाहर कदम नहीं रख पाएगा। अगर किसी बच्चे को मेडिकल इमरजेंसी या बहुत ज्यादा जरूरी काम है, तो प्रिंसिपल या अधिकृत अधिकारी की लिखित मंजूरी लेनी होगी। इसके साथ ही सिक्योरिटी रजिस्टर में बाहर जाने का ठोस कारण, जाने का समय और वापस आने का समय भी दर्ज कराना अनिवार्य होगा। 2. मेन गेट पर रहेगा कड़ा पहरा: स्कूल के सभी एंट्री और एग्जिट गेटों पर सिक्योरिटी गार्ड्स और स्कूल स्टाफ की सख्त ड्यूटी लगाई जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि जब तक स्कूल की छुट्टी नहीं हो जाती, तब तक कोई भी छात्र बिना वैध गेट पास या अधिकारी की अनुमति के बाहर न निकले। गेट पर चेकिंग इतनी सख्त होगी कि कोई बच्चा चकमा देकर बाहर न जा सके। 3. बंक मारने वालों पर सीधे टीचर्स की नजर: क्लास टीचर्स और सब्जेक्ट टीचर्स को खास हिदायत दी गई है कि वे हर पीरियड में बच्चों की अटेंडेंस (हाजिरी) पर पैनी नजर रखें। अगर कोई छात्र सुबह प्रार्थना में मौजूद था, लेकिन क्लास से गायब मिलता है या बंक करता हुआ संदिग्ध लगता है, तो उसकी रिपोर्ट बिना किसी देरी के तुरंत प्रिंसिपल और स्कूल हेड को सौंपी जाएगी। 4. बच्चों को प्यार से समझाकर काउंसलिंग भी होगी: सिर्फ सख्ती ही नहीं, बल्कि बच्चों का मार्गदर्शन भी किया जाएगा। स्कूल में स्पेशल काउंसलिंग सेशन आयोजित किए जाएंगे, जहां बच्चों को प्यार से समझाया जाएगा कि बिना बताए स्कूल से बाहर पार्कों या बाजारों में घूमना कितना असुरक्षित है और यह उन्हें गैर-कानूनी गतिविधियों की ओर ले जा सकता है। उन्हें बताया जाएगा कि एक छोटी-सी गलती से उनकी पढ़ाई, सुरक्षा और भविष्य पर कितना बुरा असर पड़ सकता है। 5. समय पर आना और नियम मानना अनिवार्य: छात्रों को साफ-साफ निर्देश दिए गए हैं कि वे रोजाना तय समय पर स्कूल आएं और स्कूल अनुशासन के सभी नियमों का कड़ाई से पालन करें। उन्हें यह स्पष्ट कर दिया गया है कि बिना अनुमति के स्कूल छोड़ना अनुशासन का एक गंभीर उल्लंघन माना जाएगा और इसे हल्के में नहीं लिया जाएगा। 6. सीधे एक्शन और तुरंत पेरेंट्स को कॉल: अगर कोई छात्र-छात्रा नियम तोड़ते हुए बिना वैध इजाजत या स्कूल ड्रेस में बाहर पार्कों आदि में पाए जाते हैं, तो उनके खिलाफ तुरंत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की जाएगी। इसके साथ ही मामले की गंभीरता को देखते हुए स्कूल प्रशासन तुरंत उनके माता-पिता को फोन करके स्कूल बुलाएगा और पूरी घटना की जानकारी देगा। 7. टीचर्स और स्टाफ की जवाबदेही तय: छात्रों की सुरक्षा की जिम्मेदारी सिर्फ बच्चों पर नहीं, बल्कि पूरे स्कूल प्रबंधन पर होगी। टीचिंग और नॉन-टीचिंग स्टाफ, जिनकी ड्यूटी बच्चों की देखरेख में लगाई गई है, उन्हें पूरे स्कूल समय के दौरान अलर्ट रहना होगा। अगर स्टाफ की लापरवाही के कारण कोई बच्चा बाहर निकलने में कामयाब होता है, तो संबंधित कर्मचारियों से भी जवाब-तलब किया जाएगा। चंडीगढ़ के सरकारी स्कूलों की 5 बड़ी खासियतें 1. सभी सरकारी स्कूल CBSE से जुड़े चंडीगढ़ का अपना अलग स्टेट बोर्ड नहीं है। यहां सभी सरकारी स्कूल CBSE से संबद्ध हैं और सरकारी व निजी स्कूलों के छात्र एक ही बोर्ड की परीक्षा देते हैं। सरकारी स्कूलों में दाखिले के लिए मारा मारी रहती है। अफसरों व अधिकारियों के बच्चे भी भी इन स्कूलों में पढ़ते हे। 2. स्मार्ट क्लासरूम और डिजिटल पढ़ाई अधिकांश सरकारी स्कूलों में 65 इंच के स्मार्ट इंटरएक्टिव पैनल लगाए गए हैं। स्कूलों की पढ़ाई और छात्रों की प्रगति पर तकनीक के जरिए नजर रखी जाती है। 3. पढ़ाई के साथ 30 से ज्यादा स्किल कोर्स नई शिक्षा नीति के तहत छात्र अब आर्ट्स, साइंस या कॉमर्स के साथ AI, वेब डिजाइन, फैशन, ब्यूटी एंड वेलनेस और फाइनेंशियल मार्केट जैसे 30 से अधिक स्किल कोर्स भी पढ़ सकते हैं। 4. बैकबेंचर सिस्टम खत्म, नई बैठने की व्यवस्था कई सरकारी स्कूलों में बच्चों को अब सीधी कतारों की बजाय अर्धवृत्त या चौकोर आकार में बैठाया जाता है, ताकि हर छात्र पर शिक्षक की बराबर नजर रहे। 5. हर इलाके के पास स्कूल, PM SHRI मॉडल पर फोकस अधिकांश बच्चों को घर से करीब 1 किलोमीटर के दायरे में सरकारी स्कूल की सुविधा मिलती है। शिक्षा विभाग सभी स्कूलों को PM SHRI मॉडल के अनुसार विकसित करने पर काम कर रहा है।



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