नई दिल्ली26 मिनट पहले
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आई-ब्यूटी का बड़ा हिस्सा आयुर्वेद के सिद्धांतों पर टिका है। यह सिर्फ बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि मन और शरीर के संतुलन पर जोर देता है। – सिम्बॉलिक इमेज
साल 2026 में ग्लोबल ब्यूटी इंडस्ट्री का फोकस भारत पर आ गया है। पहले फ्रांस के कॉस्मेटिक्स का दबदबा रहा, फिर 90 के दशक में अमेरिकी ट्रेंड्स छाए और पिछले 10 सालों में दक्षिण कोरिया की स्किनकेयर रूटीन ने लोगों को आकर्षित किया। अब ब्यूटी लवर्स भारत से प्रेरणा ले रहे हैं, जिसे ‘आई-ब्यूटी’ नाम दिया गया है। भारत का ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट तेजी से बढ़ रहा है।
अनुमान है कि 2028 तक यह करीब 3.21 लाख करोड़ हो जाएगा और दुनिया का चौथा सबसे बड़ा मार्केट बनने की ओर बढ़ेगा। इसकी बड़ी वजह यह बताई गई है कि 148 करोड़ की आबादी अब अपनी पारंपरिक ब्यूटी संस्कृति और देश में बने प्रोडक्ट्स की तरफ लौट रही है। दूसरी वजह यह है कि आई-ब्यूटी का तरीका तनाव और थकान से जूझ रहे लोगों को ज्यादा सूट कर रहा है।
आई-ब्यूटी का सिद्धांत आयुर्वेद पर टिका
आई-ब्यूटी का बड़ा हिस्सा आयुर्वेद के सिद्धांतों पर टिका है। यह सिर्फ बाहरी सुंदरता नहीं, बल्कि मन और शरीर के संतुलन पर जोर देता है। इसमें दोष, चक्र और पांच तत्वों के जरिए सेहत और खूबसूरती को समझने का नजरिया शामिल है।
पेड़-पौधों से तैयार होते हैं प्रोडक्ट्स
आई-ब्यूटी के प्रोडक्ट्स ज्यादातर पेड़-पौधों और प्राकृतिक चीजों से तैयार होते हैं। इनमें भारत के प्राकृतिक संसाधनों का इस्तेमाल होता है। कई प्रोडक्ट्स को सूजन और जलन कम करने वाला भी बताया जाता है।
मौसम के हिसाब से भी बन रहे फॉर्मूले
रिपोर्ट के मुताबिक आई-ब्यूटी ब्रांड अब पर्यावरण और मौसम को लेकर ज्यादा जागरूक हो रहे हैं। प्रोडक्ट्स को तेज धूप (यूवी), नमी और अत्यधिक गर्मी जैसी परिस्थितियों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है।
स्पा ट्रीटमेंट अब मेनस्ट्रीम
आयुर्वेद से जुड़े स्पा और मसाज अब सिर्फ ‘विकल्प’ नहीं रहे, बल्कि मुख्यधारा में आ चुके हैं। यहां गर्म तेल की मालिश के जरिए तनाव कम करने का दावा किया जाता है।

