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लुधियाना में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से बिगड़े हालात:शहर की सड़कें बनी डंपिंग ग्राउंड, 8,800 मीट्रिक टन कचरे का अंबार; महामारी फैलने का खतरा




बरनाला में सफाई कर्मचारियों पर कथित पुलिस लाठीचार्ज के विरोध में शुरू हुई हड़ताल अब लुधियाना के लिए बड़े नागरिक संकट में बदल गई है। शनिवार आज हड़ताल 9वें दिन में प्रवेश कर गई, जिसके चलते पूरे शहर में करीब 8,800 मीट्रिक टन कचरा जमा हो चुका है। शहर के अधिकांश इलाकों में कूड़े के ढेर लगे हैं, जबकि नगर निगम अब तक कचरा उठाने में पूरी तरह विफल रहा है। लोगों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो बरसात के मौसम में महामारी फैलने का खतरा पैदा हो सकता है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई स्थानों पर कचरा नालियों और सीवरेज लाइनों में गिर रहा है। यदि आने वाले दिनों में भारी बारिश हुई तो जलभराव और गंदगी की स्थिति और गंभीर हो जाएगी। शहर की सड़कें बनीं डंपिंग ग्राउंड
कूड़ा संग्रहण पूरी तरह बंद होने से शहर की सड़कें डंपिंग ग्राउंड में तब्दील होती जा रही हैं। जगह-जगह कचरे के बड़े-बड़े ढेर सड़क तक फैल गए हैं, जिससे यातायात प्रभावित हो रहा है। बाजारों और रिहायशी इलाकों में बदबू के कारण लोगों का जीना मुश्किल हो गया है। इस बीच सफाई कर्मचारी बरनाला घटना में कथित रूप से शामिल पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग पर अड़े हुए हैं। उनका कहना है कि जब तक मामला दर्ज नहीं होता, हड़ताल जारी रहेगी। इन इलाकों में सबसे ज्यादा परेशानी
मिड्डा चौक (कोचर मार्केट के पास): कचरे के ढेर से सड़क की एक लेन लगभग बंद हो गई है, जिससे लगातार जाम लग रहा है।
प्रताप चौक: सड़क किनारे जमा कचरा मुख्य सड़क तक फैल गया है।
चीमा चौक: कूड़े के पहाड़ के कारण सड़क संकरी हो गई है और वाहनों की रफ्तार धीमी पड़ गई है।
मॉडल ग्राम (बस स्टैंड के पास): खुले में सड़ रहे कचरे से लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। लोगों का फूटा गुस्सा
राहगीर साहिल बांसल ने कहा कि सड़कों पर वाहन चलाना मुश्किल हो गया है। कचरा सड़क तक फैला हुआ है, जाम लग रहा है और बदबू असहनीय हो चुकी है। वहीं मॉडल टाउन निवासी पूजा शर्मा ने कहा कि पूरा शहर कूड़ाघर जैसा दिखाई दे रहा है। बरसात के मौसम में मच्छरों, मक्खियों और गंदगी के कारण बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया है। प्रशासन को तुरंत इस समस्या का समाधान करना चाहिए। रोजाना 1,100 मीट्रिक टन कचरा निकलता है
लुधियाना शहर से प्रतिदिन करीब 1,100 मीट्रिक टन ठोस कचरा निकलता है। हालांकि जमालपुर स्थित लेगेसी वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट फिलहाल केवल 300 मीट्रिक टन कचरा ही प्रोसेस कर पा रहा है। यानी हर दिन करीब 800 मीट्रिक टन कचरा बिना निस्तारण के बच रहा है। आठ दिन की हड़ताल के दौरान यही मात्रा बढ़कर लगभग 8,800 मीट्रिक टन तक पहुंच गई है। नगर निगम ने हाल ही में दावा किया था कि प्लांट संचालित करने वाले ठेकेदार ने अतिरिक्त मशीनें लगाकर क्षमता बढ़ाई है, लेकिन हड़ताल के कारण पूरी व्यवस्था चरमरा गई है और शहर की कचरा प्रबंधन प्रणाली की कमजोरियां उजागर हो गई हैं। यूनियन बोली-एफआईआर तक जारी रहेगी हड़ताल
एमसी कर्मचारी यूनियन एवं सफाई कर्मचारी यूनियन के नेता विजय दानव ने कहा कि केवल अधिकारियों को निलंबित करना पर्याप्त नहीं है। बरनाला मामले में नामजद डीएसपी और एसएचओ के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने तक हड़ताल जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि 9 दिन बीत चुके हैं, लेकिन सरकार ने उनकी मांगें पूरी नहीं की हैं। नगर निगम आयुक्त बोले-समाधान के प्रयास जारी
नगर निगम कमिश्नर ओजस्वी अलंकार ने स्थिति की गंभीरता स्वीकार करते हुए कहा कि कर्मचारियों की मांगें सरकार से संबंधित हैं। निगम लगातार उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचा रहा है और बातचीत के जरिए समाधान निकालने का प्रयास कर रहा है। उन्हें जल्द सकारात्मक परिणाम की उम्मीद है।



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