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जम्मू-कश्मीर के लेह क्षेत्र में अदम्य साहस का परिचय देते हुए अपने साथी सैनिकों की जान बचाने वाले गांव बरियार (गुरदासपुर) निवासी सिपाही जतिंदर कुमार को उनकी शहादत की वर्षगांठ पर याद किया जा रहा है। मात्र 30 वर्ष की आयु में देश सेवा करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए अमर शहीद सिपाही जतिंदर कुमार की स्मृति में आज एक विशेष श्रद्धांजलि समारोह का आयोजन किया जाएगा। उन्होंने 4 अगस्त 2012 को अपनी ड्यूटी निभाते हुए सर्वोच्च बलिदान दिया था। शहीद सैनिक परिवार सुरक्षा परिषद के महासचिव कुंवर रविंद्र सिंह विक्की ने शहीद के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि सिपाही जतिंदर कुमार का जन्म 15 जून 1982 को माता संतोष कुमारी और पिता राजेश कुमार के घर हुआ था। उन्होंने अपनी दसवीं तक की शिक्षा खालसा हाई स्कूल, गुरदासपुर से पूरी की थी। इसके बाद देशभक्ति के जज्बे के साथ वे 9 अगस्त 2009 को ग्रेफ (GREF) की 93 आर.सी.सी. (RCC) यूनिट में भर्ती होकर देश सेवा में समर्पित हो गए थे। चीन सीमा के पास बुलडोजर ऑपरेटर के रूप में तैनात थे जतिंदर 4 अगस्त 2012 को सिपाही जतिंदर कुमार की यूनिट जम्मू-कश्मीर के लेह सेक्टर के श्योक क्षेत्र में तैनात थी, जो कि भारत-चीन सीमा के बेहद करीब स्थित है। उस दिन वे बुलडोजर ऑपरेटर के रूप में अग्रिम चौकियों पर तैनात जवानों तक हथियार और राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सेना की गाड़ियों हेतु रास्ता बनाने के कार्य में लगे हुए थे। श्योक नदी के तेज बहाव में बहे, पर साथियों को दे गए नई जिंदगी रास्ता निर्माण के दौरान ही अचानक ग्लेशियर का हिमखंड पिघलने से बर्फीले पानी का तेज बहाव शुरू हो गया। देखते ही देखते उनके चार साथी सैनिक उफनती श्योक नदी के तेज प्रवाह में फंस गए। अपनी जान की परवाह किए बिना सिपाही जतिंदर कुमार तुरंत हरकत में आए और कड़ी मशक्कत के बाद अपने चारों साथियों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। हालांकि, इस जांबाजी के दौरान वे खुद बर्फीले पानी के प्रचंड बहाव की चपेट में आ गए और बह जाने के कारण वीरगति को प्राप्त हो गए।
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सिपाही जतिंदर कुमार शहीद, बचाए साथी सैनिकों के प्राण:शहादत दिवस कल: लेह में ड्यूटी करते श्योक नदी में बहकर वीरगति को प्राप्त
