Headlines

निलंबित DIG भुल्लर की जमानत पर फैसला सुरक्षित:हाईकोर्ट में डेढ़ घंटे चली सुनवाई, सुप्रीम कोर्ट कर चुका याचिका खारिज; चार्जशीट दाखिल होने का दिया हवाला




पंजाब पुलिस के निलंबित डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर की नियमित जमानत याचिका पर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बुधवार को फैसला सुरक्षित रख लिया। करीब डेढ़ घंटे तक चली विस्तृत सुनवाई के दौरान भुल्लर की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने जमानत के पक्ष में दलीलें दीं, जबकि केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने याचिका का विरोध किया। दोनों पक्षों की दलीलें पूरी होने के बाद अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। भुल्लर भ्रष्टाचार के एक मामले में गिरफ्तार हैं। इससे पहले उनकी नियमित जमानत याचिका हाईकोर्ट खारिज कर चुका है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन वहां से भी उन्हें नियमित जमानत नहीं मिली। हालांकि, 10 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने भुल्लर की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। साथ ही कहा था कि अगर दो महीने के भीतर उनके खिलाफ ट्रायल शुरू नहीं होता है, तो वह दोबारा नियमित जमानत के लिए आवेदन कर सकते हैं। इसी आधार पर भुल्लर ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में नई जमानत याचिका दायर की। चार्जशीट दाखिल होने का दिया हवाला भुल्लर की ओर से दाखिल याचिका में कहा गया कि मामले की जांच पूरी हो चुकी है और सीबीआई अदालत में चार्जशीट भी दाखिल कर चुकी है। याचिका में यह भी कहा गया कि मामले के अधिकांश गवाह सरकारी अधिकारी हैं और भुल्लर स्वयं निलंबित चल रहे हैं। ऐसे में उनके द्वारा गवाहों को प्रभावित करने या साक्ष्यों से छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। इन परिस्थितियों को देखते हुए उन्हें नियमित जमानत दी जानी चाहिए। सीबीआई ने जमानत का किया विरोध सुनवाई के दौरान सीबीआई ने नियमित जमानत का विरोध करते हुए अदालत में अपना पक्ष रखा। जांच एजेंसी ने कहा कि मामले की गंभीरता को देखते हुए भुल्लर को जमानत नहीं दी जानी चाहिए। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट ने आदेश सुरक्षित रख लिया। यह पहली बार नहीं है जब भुल्लर ने जमानत के लिए अदालत का रुख किया हो। इससे पहले हाईकोर्ट उनकी नियमित जमानत याचिका खारिज कर चुका है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने भी उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने ट्रायल शुरू नहीं होने की स्थिति में दोबारा जमानत याचिका दाखिल करने की अनुमति दी थी। उसी छूट के आधार पर अब हाईकोर्ट में दोबारा सुनवाई हुई है, जिस पर अदालत ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *