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Venezuela Earthquake Rescue Operation Duration; Rubble Survival


वेनेजुएला में आए भूकंप के 6 दिन बाद, मलबे में फंसे 3 साल के एक बच्चे को जीवित निकाल लिया गया। 50 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। हर गुजरते घंटे के साथ उनके जिंदा बचने की उम्मीद भी घटती जा रही है।

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आखिर मलबे में दबे लोग कितने दिन जिंदा रह सकते हैं, मलबे से निकालने के बाद भी कैसे मौत हो जाती है और भूकंप आने पर बचने की संभावना कैसे बढ़ा सकते हैं; आज के एक्सप्लेनर में…

सवाल-1: मलबे में दबे लोग कितने दिन तक जिंदा रह सकते हैं? जवाबः भूकंप जैसी आपदा के बाद बचाव के लिए शुरुआती 72 घंटे ‘गोल्डन पीरियड’ होते हैं। ऑस्ट्रेलिया की रॉयल मेलबर्न इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी की रिसर्च के मुताबिक, जिंदा बचने की संभावना समय के साथ ऐसे गिरती जाती है…

  • पहले 24 घंटे: 90%
  • 25-48 घंटे: 50-60%
  • 51-72 घंटे: 20-30%
  • 72 घंटे बाद: सिर्फ 5-10%

हालांकि मलबे में कितनी देर जिंदा रहेंगे, ये कई फैक्टर पर निर्भर करता है। मसलन- कोई गंभीर चोट तो नहीं लगी। WHO में इमरजेंसी प्रोग्राम की अधिकारी डॉ. जेत्री रेग्मी का कहना है कि अगर रीढ़, सिर या छाती में चोट लगी हो और शरीर से ज्यादा खून बह जाए, तो मौत कुछ घंटे में ही हो सकती है। इसके अलावा हवा, पानी और खाना मिलना भी जरूरी फैक्टर्स हैं।

अमेरिका के मैसाचुसेट्स जनरल हॉस्पिटल में इमरजेंसी और डिजास्टर मेडिसिन के एक्सपर्ट डॉ. जैरोन ली के मुताबिक, ‘5-7 दिन बाद मलबे में मिले लोगों का जिंदा बचना बहुत दुर्लभ होता है।’

सवाल-2: वेनेजुएला भूकंप के बाद अभी कितने लोगों के दबे होने की आशंका है? जवाबः वेनेजुएला में 24 जून को 7.2 और 7.5 तीव्रता के दो भूकंप के झटके आए थे। 30 जून तक 1,943 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। 10 हजार से ज्यादा घायल हैं और 50 हजार से ज्यादा लोग अब भी लापता हैं। लापता लोगों में कई मलबे में दबे हो सकते हैं।

वेनेजुएला की आपदा प्रबंधन एजेंसी सिविल प्रोटेक्शन और सेना रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही है। शुरुआती ऑपरेशन्स के दौरान कई जगहों पर मलबा हटाने वाली बैकहो लोडर मशीनें देर से पहुंची। लेकिन बाद में अंतरराष्ट्रीय सहयोग से बचाव कार्य ने तेजी पकड़ी।

दुनिया भर के 30 देशों से 2,600 से ज्यादा रेस्क्यू वर्कर्स वेनेजुएला पहुंचे हैं। इनके साथ 160 से ज्यादा खोजी कुत्ते भी हैं। भारत से भी 41 सदस्य का दल रेस्क्यू के लिए पहुंचा है। अमेरिका ने 73 विशेषज्ञों की टीम भेजी है। इनके साथ 38 हजार किलो की मशीनें हैं, जो बड़ी-बड़ी इमारतों के मलबे को तोड़कर लोगों को निकाल रही है।

भारत ने वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट के जरिए रेस्क्यू टीम और 30 टन की राहत सामग्री वेनेजुएला भेजी है।

भारत ने वायुसेना के दो C-17 ग्लोबमास्टर एयरक्राफ्ट के जरिए रेस्क्यू टीम और 30 टन की राहत सामग्री वेनेजुएला भेजी है।

अमेरिका ने 5 MQ-9 ड्रोन्स भी तैनात किए हैं, जो रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए इंटेलिजेंस दे रहे हैं। थर्मल डिटेक्टर, खोजी कुत्तों और साउंड सेंसर के जरिए भी फंसे लोगों का पता लगाया जा रहा है।

सवाल-3: मलबे में दबे लोगों का बचाव अभियान कब तक जारी रहेगा? जवाबः वेनेजुएला में भूकंप आए 8 दिन हो चुके हैं। 7वें दिन सिर्फ 3 साल के एक बच्चे को ही जीवित निकाला जा सका। मलबों से अब ज्यादातर शव मिल रहे हैं।

  • 1994 में जब अमेरिका में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया था, तब 11 दिन तक रेस्क्यू ऑपरेशन चला था।
  • 2015 में नेपाल में 7.8 तीव्रता के भूकंप के 6 दिन बाद सरकार ने घोषणा कर दी थी कि अब किसी के बचने की उम्मीद नहीं है।
  • 2023 में तुर्किये और सीरिया में आए भूकंप का रेस्क्यू ऑपरेशन 14 दिन बाद बंद किया गया था। हालांकि इसके बाद भी राहत कार्य जारी रहते हैं। यानी जो लोग जिंदा बच गए हैं उनका इलाज, उन्हें मदद पहुंचाना, घरों-बस्तियों को फिर से बसाना।

दरअसल, ऐसी आपदा के बाद कम से कम 72 घंटे तो रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया ही जाता है। इसके बाद जारी रखना है या नहीं, ये मौसम की स्थिति, लोगों के जिंदा बचे होने के वैज्ञानिक अनुमान पर निर्भर करता है।

आज कल थर्मल कैमरों और साउंड सेंसर की मदद से मलबे के नीचे दबे लोगों के जिंदा होने या न होने का पता लगाया जा सकता है। खोजी कुत्ते भी इसमें मदद करते हैं। अगर 1-2 दिन और जीवित लोग नहीं निकलते, तो वेनेजुएला में रेस्क्यू ऑपरेशन बंद किया जा सकता है। सवाल-4: मलबे से निकलने के बाद मौत क्यों हो जाती है? जवाबः कई बार लोग मलबे में कई दिन जीवित रहते हैं, लेकिन बाहर निकालने के बाद उनकी मौत हो जाती है। इसकी वजह है- क्रश सिंड्रोम। इसके 4 स्टेप हैं…

  1. जब कोई व्यक्ति घंटों या दिनों तक मलबे के नीचे दबा रहता है, तो शरीर का कोई हिस्सा जैसे- पैर, हाथ, छाती, पेट, हथेली वगैरह लगातार दबाव में रहता है। इस दबाव की वजह से उस हिस्से में खून का बहना रुक जाता है।
  2. खून न मिलने से मांसपेशियां धीरे-धीरे मरने लगती हैं। मरती हुई मांसपेशियों से मायोग्लोबिन नाम का जहरीला प्रोटीन निकलता है। पोटैशियम और दूसरे टॉक्सिन भी मांसपेशियों में जमा होते जाते हैं।
  3. मलबे से निकलते ही दबे हुए हिस्से में रुका हुआ खून फिर से बहने लगता है और वहां बना टॉक्सिन खून में मिलकर पूरे शरीर में फैल जाता है। इसे रीपरफ्यूजन इंजरी कहते हैं।
  4. जब ये टॉक्सिन किडनी में पहुंचते हैं तो उसकी छोटी नलियां ब्लॉक कर देते हैं। इससे किडनी फेल हो जाती है। वहीं शरीर में ज्यादा पोटैशियम होने से हार्ट अटैक भी हो सकता है।

क्रश सिंड्रोम के कारण ही रेस्क्यू टीमें अक्सर मलबे से निकालने से पहले ही पीड़ित को खास तरह की IV फ्लूइड देती हैं, उसकी निगरानी करती हैं और धीरे-धीरे बाहर निकालती हैं, ताकि शरीर इस टॉक्सिन-फ्लो को झेल सके।

फरवरी 2023 में तुर्किए में आए भूकंप इस छोटी बच्ची के दोनों पैरों में क्रश सिंड्रोम हो गया था। तुर्किए में क्रश सिंड्रोम के आधे मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ी थी।

फरवरी 2023 में तुर्किए में आए भूकंप इस छोटी बच्ची के दोनों पैरों में क्रश सिंड्रोम हो गया था। तुर्किए में क्रश सिंड्रोम के आधे मरीजों को डायलिसिस की जरूरत पड़ी थी।

सवाल-5: भूकंप से बचने के लिए आप क्या तैयारी कर सकते हैं? जवाबः मोटे तौर पर 3 हिस्सों में तैयारी करनी चाहिए…

1. घर में सुरक्षा के इंतजाम: अलमारी, रैक, फ्रिज जैसे भारी फर्नीचर को दीवार में ऐसे फिक्स करें कि वो झटकों में गिरें नहीं। बेड और सोफे के ऊपर भारी फ्रेम या शीशा न लगाएं। गैस पाइप और बिजली की वायरिंग चेक करवाते रहें।

2. इमरजेंसी किट: कम से कम 3 दिन के लिए पीने का पानी और सूखा खाना जैसे- बिस्किट, ड्राई फ्रूट्स, चने वगैरह जुटाएं। टॉर्च, पावर बैंक, बैटरी साथ रखें। फर्स्ट-एड बॉक्स और जरूरी दवाइयां जमा करें। जरूरी डॉक्यूमेंट्स जैसे- आधार, बीमा कागजात वगैरह की कॉपी और कुछ कैश एक वाटरप्रूफ बैग में रखें।

3. रेस्क्यू प्लान: घर में ‘ड्रॉप, कवर, होल्ड ऑन’ प्रैक्टिस करें। यानी, झटका महसूस होते ही तुरंत नीचे बैठें, किसी मजबूत टेबल के नीचे सिर छुपाएं और उसे पकड़कर रखें।

सवाल-6: भूकंप आने के बाद आपको क्या करना चाहिए? जवाबः भूकंप आने के बाद खुद को सुरक्षित रखने के लिए UNESCO ने 4 नियम बताए हैं…

1. शांत रहें और इंतजार करें: बड़े भूकंप के दौरान, लोगों के पास अक्सर भागने का समय नहीं होता, इसलिए बेहतर है कि पास के किसी सुरक्षित कोने में जाकर बैठ जाएं या शरीर को जितना हो सके मोड़ लें, ताकि शरीर का भार कम हो सके। सिर और रीढ़ की हड्डी की सुरक्षा का ध्यान रखें।

2. परिस्थिति के हिसाब से बचाव करें: अगर किसी बड़े बंगले में हैं, तो पलंग के नीचे छिप जाएं। अगर शहरी इमारत में हैं, तो हीटिंग पाइप के पास जाए। इसके वेंटिलेशन से सांस आती रहती है। पाइपलाइन में मौजूद पानी से जीवित रहा जा सकता है।

3. त्रिकोणीय जगह खोजें: झटके रुकने के बाद छत और सामान गिरने से बने प्राकृतिक त्रिकोणीय स्थान को खोजें। यहां से हवा मिलेगी।

4. पानी के पास, आग से दूर रहें: आग, गैस रिसाव और बिजली के शॉर्ट सर्किट के सीधे खतरे से बचने के लिए चूल्हे, गैस लाइन और घरेलू उपकरणों के पास रहने से बचें। पानी के पास रहें, जिससे मदद आने में देर भी हो तो जिंदा रह सकें।

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