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चंडीगढ़ में इंस्पेक्टर-एसआई CBI कोर्ट में तलब:छेड़छाड़ के आरोपी को बचाने की साजिश रची; महिला की शिकायत पर हुई थी FIR




छेड़छाड़ के एक मामले में आरोपी को बचाने के लिए सबूतों से छेड़छाड़ करने के आरोप में चंडीगढ़ पुलिस के इंस्पेक्टर रामरत्न शर्मा और एसआई सत्यवान की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सीबीआई की ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट कोर्ट ने दोनों पुलिस अधिकारियों के खिलाफ दाखिल चार्जशीट पर संज्ञान ले लिया है। अदालत ने दोनों को पेश होने के लिए तलब किया है। मामले में सेक्टर-इंडस्ट्रियल एरिया के एक बड़े मॉल के पूर्व जीएम अनिल मल्होत्रा को भी आरोपी बनाया गया है। सीबीआई का आरोप है कि रामरत्न शर्मा और एसआई सत्यवान ने अनिल मल्होत्रा को छेड़छाड़ के मामले में बचाने के लिए साजिश रची। पुलिस ने मल्होत्रा को गिरफ्तार करने के बाद उसका आईफोन-12 जब्त किया था। आरोप है कि इस मोबाइल में मामले से जुड़े महत्वपूर्ण साक्ष्य मौजूद थे। बाद में केस की फाइल से आईफोन-12 को हटाकर उसकी जगह आईफोन-7 रख दिया गया। अदालत ने मामले में कई गंभीर धाराओं के तहत संज्ञान लिया है। इनमें साजिश रचने, झूठे साक्ष्य तैयार करने, सबूत नष्ट करने, दस्तावेज या इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड छिपाने और लोक सेवक द्वारा किसी को बचाने के लिए गलत रिकॉर्ड तैयार करने जैसी धाराएं शामिल हैं। 2022 में महिला की शिकायत पर दर्ज FIR मामले की शुरुआत 4 अप्रैल 2022 को हुई थी। इंडस्ट्रियल एरिया थाना पुलिस ने एक महिला की शिकायत पर अनिल मल्होत्रा के खिलाफ छेड़छाड़ का केस दर्ज किया था। पुलिस ने जांच के दौरान मल्होत्रा को गिरफ्तार किया और उसके कब्जे से आईफोन-12 जब्त किया था। सीबीआई के आरोपों के अनुसार, मोबाइल फोन में ऐसे साक्ष्य थे, जो छेड़छाड़ के मामले में मल्होत्रा के खिलाफ जा सकते थे। इसी वजह से मोबाइल को केस की जांच में महत्वपूर्ण साक्ष्य माना गया था। आईफोन-12 की जगह आईफोन-7 रखा सीबीआई के मुताबिक आरोप है कि इंस्पेक्टर रामरत्न और एसआई सत्यवान ने अनिल मल्होत्रा को बचाने के लिए मोबाइल से जुड़े साक्ष्यों में कथित तौर पर हेरफेर की। आरोप है कि केस फाइल में मौजूद आईफोन-12 को निकालकर उसकी जगह आईफोन-7 रख दिया गया। सीबीआई ने जांच के दौरान इस पूरे घटनाक्रम की पड़ताल की। जांच में सामने आए तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर रामरत्न शर्मा, एसआई सत्यवान और अनिल मल्होत्रा के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। सीबीआई ने मामले की लंबी जांच के बाद करीब दो साल पहले तीनों आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। जांच पूरी करने के बाद सीबीआई ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की। अब अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लेते हुए तीनों आरोपियों को न्यायिक प्रक्रिया में शामिल होने के लिए तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी। कोर्ट ने जोड़ी गैर-जमानती धारा मामले में अदालत ने आईपीसी की धारा 409 भी जोड़ दी है। यह धारा लोक सेवक द्वारा आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है और गैर-जमानती है। सीबीआई की ओर से दाखिल चार्जशीट में पहले यह धारा शामिल नहीं थी। अदालत ने मामले के तथ्यों को देखते हुए इस धारा को भी जोड़ दिया। इसके बाद दोनों पुलिस अधिकारियों ने सीबीआई कोर्ट में जमानत अर्जी दाखिल की है। जमानत अर्जियों पर 11 अगस्त को सुनवाई होगी। अब दोनों अधिकारियों के लिए यह सुनवाई अहम मानी जा रही है, क्योंकि गैर-जमानती धारा जुड़ने के बाद उनकी गिरफ्तारी का खतरा बढ़ गया है। पुलिस अधिकारियों की भूमिका जांच के घेरे में सीबीआई का आरोप है कि दोनों पुलिस अधिकारियों ने जांच प्रक्रिया का हिस्सा रहे महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य के साथ कथित तौर पर छेड़छाड़ की। मामला इसलिए भी गंभीर है क्योंकि आरोप पुलिस अधिकारियों पर ही लगे हैं, जिनकी जिम्मेदारी मामले में निष्पक्ष जांच करना और साक्ष्यों को सुरक्षित रखना थी। अब अदालत में आगे की सुनवाई के दौरान सीबीआई को अपने आरोपों से जुड़े साक्ष्य पेश करने होंगे। वहीं पुलिस अधिकारी और पूर्व जीएम अपना पक्ष रखेंगे। फिलहाल अदालत ने चार्जशीट पर संज्ञान लिया है।



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