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Economic Survey 2026 Report; India GDP Growth Rate – Nirmala Sitharaman


नई दिल्ली5 महीने पहले

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संसद में 29 जनवरी को पेश इकोनॉमिक सर्वे में राज्यों की ओर से बांटी जा रही ‘मुफ्त की रेवड़ियों’ पर चेतावनी दी गई है। रिपोर्ट में कहा गया है कि ये योजनाएं राज्यों के खजाने को खाली कर रही हैं। इससे स्कूल, अस्पताल और सड़कों के लिए बजट कम पड़ रहा है।

इकोनॉमिक सर्वे में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2023 से 2026 के बीच बिना शर्त कैश ट्रांसफर करने वाले राज्यों की संख्या 5 गुना से ज्यादा बढ़ गई है। चिंता की बात यह है कि इनमें से लगभग आधे राज्य पहले से ही राजस्व घाटे से जूझ रहे हैं और कर्ज ले रहे हैं।

सर्वे में देश के लोगों की शारीरिक और मानसिक सेहत पर भी ध्यान दिया गया है। सर्वे में जंक फूड की बढ़ती खपत पर चिंता जताई गई है। साथ ही सुझाव दिया गया है कि जंक फूड के विज्ञापनों पर सुबह 6 बजे से रात 11 बजे तक पाबंदी लगाई जानी चाहिए।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में इकोनॉमिक सर्वे 2025-2026 पटल पर रखा।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में इकोनॉमिक सर्वे 2025-2026 पटल पर रखा।

इकोनॉमिक सर्वे से जुड़ी बड़ी बातें…

1. फ्रीबीज से काम करने की इच्छा में कमी का डर

सर्वे में यह माना गया है कि कैश ट्रांसफर से गरीब परिवारों को तुरंत राहत मिलती है। महिला कैजुअल लेबर्स के लिए यह उनकी मासिक आय का 24% तक हिस्सा है। कुछ राज्यों में तो खुद का काम करने वाली महिलाओं की आय का यह 87% हिस्सा है।

हालांकि सर्वे ने एक बड़ा रिस्क भी बताया है। अगर बिना शर्त मिलने वाले पैसे की योजनाओं को स्किल डेवलपमेंट से नहीं जोड़ा गया तो काम करने की इच्छा में कमी आ सकती है। सर्वे ने सुझाव दिया है कि भारत को मैक्सिको और ब्राजील जैसे देशों से सीखना चाहिए।

वहां कैश ट्रांसफर को कुछ शर्तों से जोड़ा गया है, जैसे बच्चों का स्कूल जाना या नियमित हेल्थ चेकअप। भारत में भी इन योजनाओं में ‘सनसेट क्लॉज’ (खत्म होने की समय सीमा) और समय-समय पर रिव्यू की व्यवस्था होनी चाहिए ताकि ये हमेशा के लिए बोझ न बनी रहें।

नई कैश स्कीम्स के कारण स्कूल, अस्पताल पर निवेश घट रहा

वेतन, पेंशन, ब्याज और सब्सिडी पर राज्यों की कमाई का लगभग 62% हिस्सा पहले ही खर्च हो जाता है। ऐसे में नई कैश स्कीम्स के लिए पैसा जुटाने के चक्कर में ‘कैपिटल एक्सपेंडिचर’ को कम कर दिया जाता है। कैपिटल एक्सपेंडिचर का मतलब है सरकार द्वारा स्कूल, अस्पताल, सड़क और पुल जैसी संपत्तियों को बनाने पर किया जाने वाला निवेश।

FY26 में राज्यों द्वारा नकद ट्रांसफर पर खर्च करीब ₹1.7 लाख करोड़ तक पहुंचने का अनुमान है। सर्वे के मुताबिक, कैपिटल खर्च से मिलने वाला फायदा ज्यादा टिकाऊ होता है, जबकि कैश ट्रांसफर से शिक्षा या कुपोषण जैसे बुनियादी मुद्दों पर कोई ठोस सुधार नहीं दिख रहा है।

2. जंक फूड विज्ञापनों पर 6AM-11PM तक रोक लगे

सर्वे में छोटे बच्चों के लिए दूध और पेय पदार्थों के प्रचार-प्रसार पर रोक लगाने की भी बात कही गई है। बच्चों में बढ़ते मोटापे को लेकर चिंता जताई गई। देश में 2020 में 3.3 करोड़ से अधिक बच्चे मोटापे का शिकार थे। 2035 तक आंकड़ा 8.3 करोड़ पहुंचने का अनुमान है।

3. सोशल मीडिया इस्तेमाल करने के ​लिए उम्र सीमा तय करें

ऑनलाइन प्लेटफॉर्म जिम्मेदार बनें

  • सर्वे के अनुसार उम्र के आधार पर ही सोशल मीडिया पहुंच की सीमा तय हो।
  • ऑनलाइन प्लेटफॉर्म को उम्र सत्यापन लागू करने के लिए जिम्मेदार बनाएं।

जरूरी क्यों? लंबे समय तक उपयोग अनिद्रा, चिंता बढ़ा रहा। ऑस्ट्रेलिया ने 16 से नीचे की उम्र पर कानूनी बैन लगाया।

स्टूडेंट्स को साधारण फोन दें

  • सर्वे कहता है, डिजिटल लत से पढ़ाई, वर्कप्लेस की उत्पादकता पर बुरा असर।
  • बच्चों को साधारण फोन या सिर्फ पढ़ाई के ​लिए टैबलेट को बढ़ावा दिया जाए।

जरूरी क्यों? 75% छात्रों ने माना कि वे स्टडी करते समय सोशल मीडिया का इस्तेमाल करते हैं, जो ध्यान भटकाता है।

4. महंगाई: इकोनॉमिक सर्वे के मुताबिक RBI और IMF ने अनुमान जताया है कि आने वाले साल में महंगाई दर धीरे-धीरे बढ़ेगी। यह 4% के तय लक्ष्य (± 2%) के दायरे में बनी रहेगी।

  • खरीफ की अच्छी पैदावार और रबी की बेहतर बुआई को देखते हुए, दिसंबर 2025 में RBI ने वित्त वर्ष 2026 के लिए महंगाई दर का अनुमान 2.6% से घटाकर 2% कर दिया था।
  • आरबीआई का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2027 की पहली और दूसरी तिमाही (Q1 और Q2) में महंगाई दर: 3.9% और 4% रह सकती है।

5. GDP: सर्वे में अनुमान जताया गया है कि अगले वित्त वर्ष (FY27) में भारत की जीडीपी ग्रोथ 6.8% से 7.2% के बीच रह सकती है। वैश्विक स्तर पर जारी तनाव और अस्थिरता के बावजूद भारतीय इकोनॉमी की रफ्तार मजबूत बनी हुई है। सर्वे के अनुसार, चालू वित्त वर्ष (FY26) में विकास दर 7.4% रहने की उम्मीद है, जो आरबीआई के 7.3% के अनुमान से भी ज्यादा है।

6. नौकरी: वित्त वर्ष 2026 की दूसरी तिमाही यानी, अप्रैल-जून 2025 में भारत में 15 साल से ज्यादा उम्र के 56.2 करोड़ लोग रोजगार में थे।

  • वित्त वर्ष 2026 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून 2025) के मुकाबले दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर 2025) में करीब 8.7 लाख नई नौकरियां पैदा हुई हैं।
  • टैक्स सुधार, नियमों के सरलीकरण और राज्यों द्वारा किए गए श्रम सुधारों की वजह से इंडस्ट्रियल और सर्विस सेक्टर में भर्तियां हुई हैं।
  • गिग वर्क भी कमाई का बड़ा जरिया बनकर उभरा है।सरकार ऐसा इंटीग्रेटेड सिस्टम बनाने पर काम कर रही है जहां सारा डेटा एक जगह होगा।
  • कंपनियों की जरूरत और युवाओं की स्किल के बीच का गैप कम करना होगा। इसके लिए स्कूलों में वोकेशनल ट्रेनिंग देने का सुझाव है।

7. खेती-किसानी: देश की आधी आबादी खेती पर निर्भर है। इकोनॉमिक सर्वे में इस बात पर जोर दिया गया है कि वित्त वर्ष 2026 में एग्रीकल्चर ग्रोथ 3.1% रहने की उम्मीद है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2024-25 में अनाज की पैदावार 3,320 लाख टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है, जिससे महंगाई को काबू में रखने में काफी मदद मिली है।

सरकार का फोकस अब केवल पैदावार बढ़ाने पर नहीं, बल्कि किसानों की आय सुरक्षित करने और बेहतर स्टोरेज सुविधाओं पर भी है। दुनिया भर में जारी ट्रेड वार के बीच भारत अपने एक्सपोर्ट को डायवर्सिफाई कर रहा है ताकि एक देश पर निर्भरता न हो।

8. सरकारी कर्ज: केंद्र सरकार ने राजकोषीय घाटे को कम करने का लक्ष्य तय समय से पहले ही हासिल कर लिया है। वित्त वर्ष 2025 में यह जीडीपी का 4.8% रहा, जबकि सरकार ने वित्त वर्ष 2026 के लिए 4.4% का लक्ष्य रखा है। सरकार अपनी कमाई से ज्यादा जो खर्च करती है, उसे ‘राजकोषीय घाटा’ कहते हैं। घाटा कम होने का मतलब है-मजबूत इकोनॉमी और कम महंगाई।

9. विदेशी मुद्रा भंडार: दुनियाभर में मंदी की आहट के बीच भारत की विदेशी मुद्रा भंडार 2023-2024 में 668 बिलियन डॉलर था। ये 2024-2025 में बढ़कर 701 बिलियन डॉलर पहुंच गया है। यह भंडार जितना भरा होगा, डॉलर के मुकाबले हमारा रुपया उतना ही मजबूत रहेगा।

10. एक्सपोर्ट: दुनिया भर के व्यापार में अनिश्चितता के बावजूद भारत का कुल एक्सपोर्ट (सामान और सर्विस दोनों मिलाकर) वित्त वर्ष 2025 में 825.3 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया। यह रफ्तार वित्त वर्ष 2026 में भी जारी है।

इकोनॉमिक सर्वे में सरकार ने कहा- अमेरिका की ओर से 50% टैरिफ लगाए जाने के बावजूद, भारत का सामानों का एक्सपोर्ट अप्रैल-दिसंबर 2025 के दौरान 2.4% बढ़ा है। वहीं सर्विस एक्सपोर्ट में 6.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए भारत ने अपनी रणनीति बदली है। सर्वे में बताया गया कि भारत ने यूरोपीय संघ (EU) के साथ ट्रेड डील फाइनल कर ली है।

इसके अलावा पिछले एक साल में ब्रिटेन, न्यूजीलैंड और ओमान के साथ भी व्यापारिक समझौते किए गए हैं। इससे भारतीय एक्सपोर्टर्स को नए बाजार मिले हैं।

अब इकोनॉमिक सर्वे के बारे में जानें…

  • इकोनॉमिक सर्वे देश की अर्थव्यवस्था का वह सालाना ‘रिपोर्ट कार्ड’ है, जो पिछले एक साल की आर्थिक स्थिति का पूरा हिसाब-किताब देता है।
  • इसे वित्त मंत्रालय के इकोनॉमिक डिवीजन द्वारा चीफ इकोनॉमिक एडवाइजर (CEA) डॉ. वी अनंत नागेश्वरन की अगुवाई में तैयार किया गया है।
  • अर्थव्यवस्था के बैरोमीटर के रूप में पहचाना जाने वाला यह दस्तावेज न केवल वर्तमान हालात बताता है, बल्कि भविष्य के सुधारों का रास्ता भी दिखाता है।

1950-51 में पेश हुआ था पहला सर्वे

देश का पहला इकोनॉमिक सर्वे 1951 में पेश किया गया है। तब यह केंद्रीय बजट का ही एक हिस्सा था। 1964 के बाद से इसे बजट से अलग कर दिया गया। तब से बजट डे से एक दिन पहले इकोनॉमिक सर्वे संसद में पेश होता है।

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