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पंजाब में अब कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) फंड का इस्तेमाल स्थानीय जरूरतों और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए अधिक व्यवस्थित तरीके से किया जा सकेगा। पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार को ‘स्टेट CSR अथॉरिटी’ गठित करने की महत्वपूर्ण सिफारिश की है। आयोग का मानना है कि ‘स्टेट CSR अथॉरिटी’ बनने से कंपनियों के CSR फंड का इस्तेमाल राज्य में बाढ़ और सूखे जैसी प्राकृतिक आपदाओं के बाद राहत व पुनर्वास कार्यों के साथ स्थानीय जनकल्याणकारी योजनाओं में अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा। इससे जरूरत के मुताबिक फंड का बेहतर समन्वय और तेजी से इस्तेमाल संभव होगा। आयोग की तरफ से की गई 4 सिफारिशें: – क्यों पड़ी जरूरत? पिछले साल की विनाशकारी बाढ़ वजह मानवाधिकार आयोग के चेयरपर्सन जस्टिस संत प्रकाश और सदस्य जस्टिस गुरबीर सिंह की अगुवाई में यह सिफारिश तैयार की गई है। आयोग ने पिछले साल पंजाब में आई विनाशकारी बाढ़ का जिक्र करते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं के कारण राज्य को भारी नुकसान उठाना पड़ा। आयोग के अनुसार, आपदा के समय कॉरपोरेट सेक्टर की मदद से सरकार के राहत और पुनर्वास प्रयासों को और मजबूत किया जा सकता है। कानून में प्रावधान, लेकिन पंजाब में तंत्र की कमी कंपनीज एक्ट, 2013 की धारा 135 के तहत पात्र कंपनियों को पिछले 3 वर्षों के औसत नेट प्रॉफिट का कम से कम 2% CSR गतिविधियों पर खर्च करना होता है। एक्ट के Schedule VII में आपदा प्रबंधन और राहत कार्यों को भी CSR गतिविधियों में शामिल किया गया है। हालांकि, कंपनियां विशेष राज्य के फंड में CSR राशि देने के लिए बाध्य नहीं हैं। आयोग ने कहा कि CSR को कंपनियों पर दबाव बनाने के बजाय सहयोग के माध्यम के रूप में देखा जाना चाहिए। संस्थागत ढांचा बनने से कंपनियों के लिए पंजाब के विकास और आपदा राहत कार्यों में CSR फंड देना आसान हो सकेगा।
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पंजाब में CSR फंड के लिए बनेगी स्टेट अथॉरिटी:मानवाधिकार आयोग की सिफारिश; बाढ़ जैसी आपदा राहत और जनकल्याण में हो पैसों का इस्तेमाल
