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Farokh Engineer Padmashri Award Statement


35 मिनट पहले

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फारुख इंजीनियर BCCI के नमन अवॉर्ड में मौजूद थे।   - Dainik Bhaskar

फारुख इंजीनियर BCCI के नमन अवॉर्ड में मौजूद थे।

पूर्व भारतीय विकेटकीपर फारुख इंजीनियर को पद्मश्री मिलने का इंतजार 53 साल बाद भी खत्म नहीं हुआ है।

88 साल के इंजीनियर के मुताबिक, 1973 में अखबारों के जरिए उन्हें पता चला था कि सरकार ने उन्हें पद्मश्री के लिए चुना है। उस समय वे इंग्लैंड में भारतीय टीम के साथ खेल रहे थे।

टीम मैनेजर हेमू अधिकारी ने भी उन्हें इसकी जानकारी दी थी। लेकिन इसके बाद उन्हें सरकार की ओर से कोई आधिकारिक सूचना नहीं मिली। न मेडल मिला और न ही प्रमाणपत्र।

पद्म पुरस्कार की वेबसाइट पर इंजीनियर का नाम 1973 के पद्मश्री सम्मान पाने वालों में दर्ज है। हालांकि, इसके बाद पुरस्कार उन तक क्यों नहीं पहुंचा। इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है। अब इस मामले में BCCI सरकार को पत्र लिखने की तैयारी कर रहा है।

इंजीनियर बोले- मेडल ट्रॉफी कैबिनेट में रखूंगा

इंजीनियर इंग्लैंड में रहते हैं, लेकिन कहते हैं कि भारत उनके दिल में है। उनका कहना है कि वे पद्मश्री को अपने घर की ट्रॉफी कैबिनेट में रखना चाहते हैं और राष्ट्रपति भवन जाकर राष्ट्रपति के हाथों सम्मान लेना चाहते हैं।

उन्होंने कहा कि मैनचेस्टर के ओल्ड ट्रैफर्ड मैदान में उनके और क्लाइव लॉयड के नाम पर स्टैंड हैं, लेकिन राष्ट्रपति भवन में पद्मश्री लेना उनके लिए उससे भी बड़ा सम्मान होगा।

फारुख इंजीनियर वेस्टइंडीज के क्लाइव लॉयड के साथ वनडे वर्ल्ड कप 2019 में।

फारुख इंजीनियर वेस्टइंडीज के क्लाइव लॉयड के साथ वनडे वर्ल्ड कप 2019 में।

जय शाह से मदद मांगी

इंजीनियर ने हाल में ICC चेयरमैन जय शाह से भी इस मामले में मदद मांगी थी। उन्होंने बताया कि पिछले महीने जय शाह ने उनकी मदद करने का भरोसा दिया। इससे पहले उन्होंने पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली से भी इस मामले में मदद मांगी थी।

1971 की ऐतिहासिक सीरीज के बाद मिला था सम्मान

फारुख इंजीनियर को 1971 में इंग्लैंड के खिलाफ भारत की ऐतिहासिक टेस्ट सीरीज जीत में योगदान के बाद पद्मश्री के लिए चुना गया था। उस सीरीज के तीसरे टेस्ट में उन्होंने पहली पारी में 59 रन बनाए। भारत की टीम 125/5 के मुश्किल स्कोर पर थी, तब इंजीनियर ने एकनाथ सोलकर के साथ साझेदारी कर टीम को संभाला। दूसरी पारी में उन्होंने 28 रन की नाबाद पारी खेलकर भारत को 174 रन का लक्ष्य हासिल करने में मदद की।

46 टेस्ट खेले, 2,611 रन बनाए

इंजीनियर ने भारत के लिए 1961 से 1975 तक 46 टेस्ट खेले। उन्होंने 2,611 रन बनाए। उनका टेस्ट औसत 31.08 रहा। वे उस दौर के मशहूर स्पिन चौकड़ी बिशन सिंह बेदी, ईरापल्ली प्रसन्ना, भागवत चंद्रशेखर और एस. वेंकटराघवन के विकेटकीपर भी रहे।

उनके करियर की सबसे यादगार पारियों में 1966-67 में वेस्टइंडीज के खिलाफ मद्रास टेस्ट का शतक शामिल है। उन्होंने उस पारी में लंच से पहले ही 94 रन बना लिए थे।

शानदार बल्लेबाज और फुर्तीले विकेटकीपर थे इंजीनियर

फारुख इंजीनियर अपने दौर के बेहतरीन विकेटकीपर-बल्लेबाजों में गिने जाते थे। वे आक्रामक बल्लेबाजी के साथ विकेट के पीछे अपनी तेज रिफ्लेक्स के लिए मशहूर थे। यही वजह थी कि 1970 के दशक की शुरुआत में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया में हुई रेस्ट ऑफ द वर्ल्ड-XI सीरीज के लिए उन्हें पहली पसंद का विकेटकीपर चुना गया। इंजीनियर बाद में इंग्लैंड में बस गए और लंकाशायर के लिए भी क्रिकेट खेला।

MCA भी मदद के लिए आगे आया

फारुख इंजीनियर ने मुंबई क्रिकेट एसोसिएशन के पदाधिकारियों से भी इस मामले में मदद मांगी है। जून-जुलाई में MCA प्रेसिडेंट-XI के इंग्लैंड दौरे के दौरान इंजीनियर को सम्मानित किया गया था। इसी दौरान उन्होंने MCA के कोषाध्यक्ष अरमान मलिक से पद्मश्री का मेडल हासिल करने में मदद करने को कहा।

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