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हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में आज टेट (TET) पास बेरोजगार शिक्षकों ने प्रदेश सरकार और शिक्षा विभाग के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लंबे समय से बैचवाइज भर्ती का इंतजार कर रहे हजारों शिक्षकों ने शिक्षा विभाग में की जा रही अस्थायी भर्तियों और बैकडोर एंट्री पर तुरंत रोक लगाने तथा स्थायी आधार पर नियमित भर्ती प्रक्रिया शुरू करने की मांग की है। प्रदर्शन के दौरान ‘हिमाचल प्रदेश टेट पास बैचवाइज बेरोजगार यूनियन’ के जिला महासचिव सोनी कुमार ने सरकार की 10 महीने की अस्थायी भर्ती नीति पर कड़ा रोष जताया। उन्होंने इस नीति को युवाओं का मानसिक और आर्थिक शोषण करार दिया। सोनी कुमार ने सरकार की नीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब एक शिक्षक को केवल 10 महीने के लिए नौकरी पर रखा जाएगा और साल के 2 महीने उसे बेरोजगार बैठना पड़ेगा, तो वह मानसिक रूप से कभी स्थिर नहीं हो पाएगा। उम्र बीतने का सता रहा डर ऐसी अनिश्चितता की स्थिति में कोई भी शिक्षक बच्चों को अपना शत-प्रतिशत योगदान कैसे दे सकता है? आज निजी स्कूलों में भी शिक्षकों को 12 महीने का वेतन मिलता है, लेकिन सरकार योग्य शिक्षकों को उससे भी बदतर हालात में धकेल रही है। बेरोजगार शिक्षकों का कहना है कि पिछले कई वर्षों से बैच आगे नहीं बढ़ पाए हैं, जिसके कारण कई योग्य और ओवरएज हो रहे अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में लटका हुआ है। मुख्यमंत्री सुक्खू को सौंपा ज्ञापन, रखीं मुख्य मांगें सफल विरोध प्रदर्शन के बाद यूनियन के एक प्रतिनिधिमंडल ने मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से मुलाकात की और उन्हें अपनी मांगों को लेकर एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा। शिक्षकों के मांगों के बारे में जानिए आंदोलन तेज करने की चेतावनी अभ्यर्थियों ने तर्क दिया कि कई बार टीईटी (TET) परीक्षा पास कर चुके और सालों का शिक्षण अनुभव रखने वाले इन योग्य शिक्षकों की नियमित नियुक्ति से न केवल बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा, बल्कि सरकारी स्कूलों में गिरते शिक्षा स्तर और घटते नामांकन की समस्या में भी बड़ा सुधार आएगा। यूनियन ने दोटूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है कि यदि उनकी इन जायज मांगों पर जल्द ही कोई सकारात्मक फैसला नहीं लिया गया, तो आने वाले दिनों में बेरोजगार शिक्षक पूरे प्रदेश में अपने आंदोलन को और अधिक उग्र करने के लिए मजबूर होंगे।
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अस्थायी भर्तियों के खिलाफ उतरे हिमाचल टेट पास शिक्षक:मुख्यमंत्री को सौंपा ज्ञापन, 10 महीने की अस्थायी नीति युवाओं का शोषण
