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जोधपुर के सेशन कोर्ट परिसर में चिकित्सा सुविधाओं की कमी को गंभीरता से लेते हुए राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को तत्काल मेडिकल स्टाफ और एंबुलेंस उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। न्यायाधीश अनूप कुमार ढंढ की एकलपीठ ने कहा कि स्वास्थ्य और बुनियादी चिकित्सा सुविधा संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार हैं। इन्हें उपलब्ध कराना राज्य का संवैधानिक दायित्व है। राजस्थान हाईकोर्ट एडवोकेट्स एसोसिएशन की याचिका में बताया गया कि सेशन कोर्ट परिसर स्थित जनता क्लिनिक में स्वीकृत नौ चिकित्सा एवं पैरामेडिकल पदों के मुकाबले वर्तमान में केवल एक फैमिली हेल्थ वर्कर और एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। नहीं मिल पा रही थी मेडिकल सुविधा डॉक्टर, नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन और वार्ड बॉय की अनुपलब्धता के कारण कोर्ट परिसर में आने वाले अधिवक्ताओं, न्यायिक अधिकारियों, कर्मचारियों और पक्षकारों को आपात स्थिति में चिकित्सा सुविधा नहीं मिल पा रही है। कोर्ट ने रिकॉर्ड किया कि परिसर में करीब 60 अदालतें हैं, जहां 600 से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। रोजाना करीब 1500 से 2000 अधिवक्ता और 3000 से अधिक पक्षकार व उनके परिजन पहुंचते हैं। याचिका में यह भी बताया गया कि अधिवक्ता जीवन राम चौधरी की अचानक हार्ट अटैक से मृत्यु हुई थी और उस समय प्राथमिक उपचार तथा सीपीआर जैसी सुविधाएं उपलब्ध नहीं थीं। हाईकोर्ट ने तत्काल एक मेडिकल ऑफिसर, दो नर्सिंग स्टाफ, फार्मासिस्ट, लैब टेक्नीशियन, दो वार्ड बॉय और सफाईकर्मी तैनात करने के निर्देश दिए। साथ ही मेडिकल इमरजेंसी के लिए एक एंबुलेंस उपलब्ध कराने को कहा। कोर्ट ने ऑक्सीजन, जीवनरक्षक दवाइयों, ईसीजी, ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर जांच की सुविधा सुनिश्चित करने तथा मेडिकल यूनिट के लिए आपातकालीन संपर्क नंबर प्रदर्शित करने के भी निर्देश दिए हैं।
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सेशन कोर्ट में डॉक्टर और एंबुलेंस की कमी:हाईकोर्ट ने मेडिकल अफसर समेत अन्य स्टाफ तैनात करने के दिए निर्देश
