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मुरथल के ढाबे पर रोबोट परोस रहा खाना:एक चार्ज में लगातार 2 घंटे सर्विस, सॉफ्टवेयर चिप से कंट्रोलिंग; टेबल तक ट्रेन पहुंचाती है फूड




हरियाणा के मुरथल के ढाबों में अक्सर वेटर को खाना सर्व करते देखा जाता है, मगर अब यहां के एक ढाबे में रोबोट वेटर खाना परोस रहा है। इस रोबोट के हाथों में एक ट्रे फिक्स की गई है, जिस पर फूड प्लेट रखी जाती है। कंट्रोलिंग सिस्टम से रोबोट खुद कस्टमर्स की टेबल के पास पहुंचता है। नेशनल हाईवे-44 पर स्थित रेशम ढाबे में 3 रोबोट लगाए गए हैं, जो बैटरी से चलते हैं। इन रोबोट्स को फाइबर से तैयार किया गया है। एक सॉफ्टवेयर चिप से इसकी कंट्रोलिंग होती है, जबकि आकर्षक दिखाने के लिए आंखों में चमकदार लाइट लगाई गई है। एक बार चार्ज करने पर रोबोट करीब 2 घंटे तक काम करता है। वहीं, ढाबे में टेबल्स तक खाना पहुंचाने के लिए एक ट्रेन सिस्टम भी तैयार किया गया है। हर एक टेबल को पटरियों से जोड़ा गया है। इन्हें रन करने के लिए ढाबे में एक कंट्रोल रूम भी बनाया गया है। रोबोट के खाना परोसने की 3 तस्वीरें:- यहां जानिए, ढाबे में कैसे पहुंचा रोबोटिक वेटर… रोबोटिक वेटर की ये खासियतें:- -मैनेजर मंगत सिंह का कहना है कि रोबोट एक चार्जिंग में करीब डेढ़ से दो घंटे तक सर्विस दे सकता है। इसे फाइबर से तैयार किया गया है। इसमें सॉफ्टवेयर चिप के साथ नेविगेशन सिस्टम लगा है। -रोबोट को आकर्षक लुक देने के लिए आंखों में रेड लाइट लगाई गई है। रात में ये रेडियम की तरह चमकती है। वहीं, हाथों पर प्लेट फिक्स की गई है। इस पर मेन्यू कार्ड- खाने की प्लेट रखी जाती है। -रोबोट पहियों और बेयरिंग के सहारे चलता है। इसे चलाने के लिए ऑपरेटर रखा गया है। मैनेजर मंगत सिंह का कहना है कि रोबोट से खाना परोसने के लिए कस्टमर से कोई चार्ज नहीं लिया जाता। अब जानिए, ढाबे में कैसे बढ़े हाईटेक फीचर पटरियों से कनेक्ट की गई टेबल यहां रोबोट के अलावा ट्रेन सिस्टम से भी खाना पहुंचाया जाता है। हर टेबल पटरियों से कनेक्ट की गई है। ढाबे के ग्राउंड फ्लोर और फर्स्ट फ्लोर पर हर टेबल तक खाना पहुंचाने के लिए व्यवस्था की गई है। ट्रेन चलाने के लिए भी कंट्रोल रूम में लगे पैनल से ऑपरेटर इसकी दिशा तय करता है। कंट्रोल रूम से बदलता है ट्रैक जिस तरह रेलवे स्टेशन पर ट्रेन को सही प्लेटफॉर्म पर भेजने के लिए ट्रैक चेंज किया जाता है, उसी तरह ढाबे में भी टेबल के हिसाब से ट्रेन का रास्ता बदला जाता है। कंट्रोल रूम में लगे पैनल पर टेबल नंबर दिए गए हैं। ऑपरेटर संबंधित टेबल का चयन करता है और ट्रेन को उसी दिशा में रवाना कर देता है। मैनेजर मंगत सिंह के अनुसार, इस ढाबे की शुरुआत 1960 में सरदार महिंदर सिंह ने की थी। उन्होंने अपने बेटे रेशम सिंह के नाम पर इसका नाम रेशम ढाबा रखा।



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