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Uttarakhand Congress Protest at Election Commission Delhi


EC से मिलने पर अड़े उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेता।

उत्तराखंड में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने गंभीर शिकायतें रखी हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल का दावा है कि एक-एक व्यक्ति की ओर से 100, 200 और 500 तक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने क

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इन्हीं शिकायतों को लेकर उत्तराखंड कांग्रेस के शीर्ष नेता गुरुवार को नई दिल्ली स्थित चुनाव आयोग पहुंचे। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात का समय नहीं मिलने पर नेता आयोग के गेट के बाहर करीब एक घंटे धरने पर बैठे। धरने के बाद चुनाव आयोग के सचिव स्तर के अधिकारी ने कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन और संबंधित दस्तावेज लिए।

वहीं, अब इस मामले में उत्तराखंड के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल को पत्र भेजकर कल यानी शुक्रवार को बातचीत के लिए बुलाया है।

कांग्रेस नेता चुनाव आयोग के ऑफिस पहुंचे तो वहां पर ताला लटका हुआ मिला।

कांग्रेस नेता चुनाव आयोग के ऑफिस पहुंचे तो वहां पर ताला लटका हुआ मिला।

गेट पर रोके गए नेता, वहीं शुरू हुआ धरना

कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने चुनाव आयोग से मुलाकात के लिए समय मांगा था। उनका कहना है कि समय नहीं मिलने के कारण प्रतिनिधिमंडल सीधे आयोग कार्यालय पहुंचा।

गोदियाल ने आगे कहा-

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हम वहां गए तो गेट पर ताला लगा दिया गया। इसके बाद हम वहीं धरने पर बैठ गए। जब हम धरने पर बैठे, तब चुनाव आयोग के अधिकारी हमसे मिलने आए।

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उनके मुताबिक, कांग्रेस नेता आयोग के सामने अपनी शिकायतें और आपत्तियां रखना चाहते थे। करीब एक घंटे के प्रदर्शन के बाद आयोग के सचिव स्तर के अधिकारी नीचे आए और प्रतिनिधिमंडल से ज्ञापन तथा संबंधित दस्तावेज प्राप्त किए।

धरने में उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल के साथ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष प्रीतम सिंह, हरक सिंह रावत, काजी निजामुद्दीन, करण माहरा, यशपाल आर्य और गुरदीप सिंह सप्पल मौजूद रहे। उत्तराखंड कांग्रेस की प्रभारी कुमारी सैलजा भी नेताओं के साथ चुनाव आयोग पहुंचीं।

अब समझिए कांग्रेस की आपत्तियां क्या हैं….

1. बिना उचित कारण नाम हटाने का आरोप कांग्रेस का आरोप है कि SIR के दौरान कई मतदाताओं के नाम बिना उचित कारण मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि इससे बड़ी संख्या में लोगों के मताधिकार पर असर पड़ सकता है। कांग्रेस चाहती है कि नाम हटाने से पहले संबंधित मतदाता की स्थिति और उसके खिलाफ आई आपत्ति की सही तरीके से जांच की जाए।

2. एक व्यक्ति के जरिए कई आपत्तियां कांग्रेस का आरोप है कि कुछ मामलों में एक ही व्यक्ति के माध्यम से 50 से 100 तक आपत्तियां दर्ज कराई गई हैं। पार्टी का कहना है कि ऐसी शिकायतें सामने आने के बाद राज्य स्तर पर भी कई बार अधिकारियों से शिकायत की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। कांग्रेस अब यह जानना चाहती है कि इतनी बड़ी संख्या में आपत्तियां किस आधार पर और किसके जरिए दर्ज की गईं।

3. 100 से 500 नाम हटाने के प्रस्ताव प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल का दावा है कि एक-एक व्यक्ति की ओर से 100, 200 और 500 तक मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से हटाने के प्रस्ताव दिए जा रहे हैं और आयोग इन प्रस्तावों को स्वीकार कर रहा है। कांग्रेस का सवाल है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम हटाने के प्रस्तावों की सत्यता और उनके आधार का सत्यापन किस स्तर पर किया जा रहा है।

4. प्रस्ताव में नाम, लेकिन मौके पर लोग नहीं मिले कांग्रेस ने चुनाव आयोग को ऐसे मामलों के प्रमाण देने का दावा किया है, जिनमें मतदाता सूची से नाम हटाने के प्रस्ताव में जिन लोगों के नाम दिए गए, उन्हें मौके पर तलाशने पर वे वहां मिले ही नहीं। पार्टी का कहना है कि ऐसे मामलों की जांच से यह पता चल सकता है कि नाम हटाने के प्रस्ताव में दी गई जानकारी वास्तविक है या नहीं और उसका सत्यापन किस तरह किया गया।

5. जिनके नाम से प्रस्ताव, उन्होंने ही किया इनकार गोदियाल के मुताबिक, कई ऐसे लोग भी मिले जिनके नाम किसी अन्य मतदाता का नाम हटाने के प्रस्ताव में इस्तेमाल किए गए थे। इनमें से कई लोगों ने कांग्रेस को शपथपत्र देकर कहा कि उन्होंने किसी का वोट काटने के लिए कोई आवेदन या प्रस्ताव नहीं दिया। कांग्रेस ने इन शपथपत्रों को भी आयोग के सामने रखा है और आरोप लगाया है कि इसके बावजूद मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। पार्टी चाहती है कि ऐसे मामलों में दस्तावेजों का सत्यापन कर जिम्मेदारी तय की जाए।

राज्य में शिकायत के बाद दिल्ली पहुंचा मामला

कांग्रेस नेताओं के मुताबिक, SIR से जुड़ी शिकायतों को लेकर राज्य स्तर पर लगातार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित किया गया था। पार्टी का कहना है कि कई बार शिकायत करने के बावजूद अपेक्षित समाधान नहीं मिला।

इसके बाद कांग्रेस ने केंद्रीय चुनाव आयोग का रुख किया। पार्टी के वरिष्ठ नेता गुरुवार को दिल्ली पहुंचे और मुख्य चुनाव आयुक्त से सीधे मुलाकात की मांग की। मुलाकात का समय नहीं मिलने के बाद प्रदर्शन हुआ। अब आयोग ने अगले दिन देहरादून में प्रतिनिधिमंडल के साथ बातचीत की तारीख तय कर दी है।

21 अगस्त की बैठक में कांग्रेस क्या रखेगी?

मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय ने कांग्रेस को बातचीत के लिए बुलाया है। कार्यालय की ओर से भेजे गए पत्र के मुताबिक, कांग्रेस ने 20 अगस्त को ईमेल के जरिए SIR-2026 से जुड़ी शिकायतों पर चुनाव आयोग से बातचीत के लिए समय मांगा था।

अब कांग्रेस के बड़े नेताओं का दल 21 अगस्त को देहरादून में अधिकारियों से बातचीत करेगा। बैठक में कांग्रेस SIR से जुड़ी अपनी शिकायतें, दस्तावेज और सबूत अधिकारियों के सामने रखेगी।

अगर कांग्रेस का दल तय समय पर बैठक में नहीं पहुंच पाता है तो वह अपनी सुविधा के मुताबिक किसी दूसरे दिन और समय पर बैठक के लिए बता सकता है।

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