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एसएमएस इमरजेंसी में रेजीडेंट काम छोड़कर गए:एचओडी ने की औचक विजीट, खामियां मिलने पर टोका, तो गुस्साए रेजीडेंट ने काम छोड़कर प्रिंसिपल चैम्बर का घेराव किया




जयपुर के सवाई मानसिंह हॉस्पिटल की मेडिकल इमरजेंसी में उस समय मरीजों की मुश्किले बढ़ गई, जब वहां तैनात रेजीडेंट डॉक्टर्स ने अचानक काम बंद कर दिया। रेजीडेंट डॉक्टरों का दल इमरजेंसी से काम छोड़कर प्रिंसिपल ऑफिस पहुंचा और वहां घेराव कर दिया। बाद में प्रिंसिपल डॉ. दीपक माहेश्वरी ने रेजीडेंट से बात की और उन्हें समझाइश कर वापस काम पर भेजा। इस दौरान करीब आधे घंटे तक इमरजेंसी की सेवाएं प्रभावित रही। दरअसल ये पूरा मामला दोपहर करीब 1 बजे का है इमरजेंसी डिपार्टमेंट के एचओडी डॉ. सतीश मीना ने इमरजेंसी में औचक निरीक्षण कर वहां खामिया देखी। डॉ. मीना ने देखा कि वहां आ रहे मरीजों की पर्ची पर नाम नहीं लिखा जा रहा, जिससे मरीजों को परेशानी हो रही है। इस पर उन्होंने पर रेजीडेंट डॉक्टरों को टोका, तो उन्हें ये टोकना नागवार लगा और वे काम गुस्सा होकर काम छोड़कर चले गए। यहां से डॉक्टर सबसे पहले मेडिकल डिपार्टमेंट एचओडी डॉ. महेन्द्र कुमार अग्रवाल के पास पहुंचे और वहां से फिर प्रिंसिपल के चैम्बर पर गए। यहां उन्होंने इमरजेंसी एचओडी डॉ. सतीश मीना के रवैये पर अपना विरोध दर्ज करवाया। जिसके बाद प्रिंसिपल ने एचओडी डॉ. मीना को मौके पर बुलाया और समझाइश करके रेजीडेंट को वापस काम पर लौटने के निर्देश दिए। पर्ची पर नाम नहीं होने से मरीज होते है परेशान डॉ. सतीश मीना का कहना है- ​जो मरीज इमरजेंसी में आ रहे है, उनके कागजों पर नाम नहीं लिखना गंभीर है। अगर गलती से किसी मरीज की पर्ची गुम हो जाए या मिस हो जाए तो उस पर लिखी दवाईयां या दूसरी जांच करवाने में दिक्कत आती है। ऐसे में मरीज को कोई गलत दवाई लग गई तो मरीज के लिए ही परेशानी हो जाएगी। इसके लिए रेजीडेंट को टोका था, जिसका उन्हें बुरा लग गया। इधर डॉ. दीपक माहेश्वरी ने बताया- डॉ. मीना का टोकना उनका अच्छा नहीं लगा। मैने डॉ. सतीश मीना को समझाया है कि वे रेजीडेंट से नम्रता से बात करें। साथ ही रेजीडेंट डॉक्टरों से भी समझाइश की है, कि इमरजेंसी में ऐसा कोई काम न करें जिससे मरीज और स्टाफ की परेशानी बढ़े।



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