बारिश-सूखा, गर्मी-सर्दी ने फसल बिगाड़ी तो मिलेगा मुआवजा:भिंडी-टमाटर, अनार-किन्नू खराब होने पर भी मिलेगा क्लेम, राजस्थान के किसानों के लिए नई बीमा योजना




राजस्थान में किसानों को भारी बारिश-सूखा, गर्मी या पाला पड़ने से फसलों का नुकसान खुद नहीं झेलना पड़ेगा। गेहूं, बाजरा, कपास, सरसों जैसी फसलों के साथ-साथ भिंडी, टमाटर, किन्नू, संतरे, तरबूज जैसी बागवानी का भी मुआवजा मिलेगा। इसके लिए नई फसल बीमा योजना ‘पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना’ (RWBCIS) लागू की गई है। योजना खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक के लिए लागू रहेगी। किसान अधिकतम 5% प्रीमियम देकर इस बीमा योजना का लाभ ले सकते हैं। योजना के तहत कौन-कौन सी फसलें, सब्जियां और फ्रूट्स (फलों) का नुकसान कवर होगा? फसल को नुकसान होने पर कितना क्लेम मिलेगा? योजना में शामिल होने के लिए कौन से दस्तावेज जरूरी होंगे? मंडे स्पेशल स्टोरी में पढ़िए ऐसे ही सवालों के जवाब… सवाल : मौसम आधारित फसल बीमा योजना क्या है? जवाब : यह ऐसी बीमा योजना है, जिसमें सूखा, अधिक बारिश, तापमान में बदलाव, तेज बारिश या दूसरी विपरीत मौसमी परिस्थितियों से फसल को होने वाले नुकसान के खिलाफ किसान को आर्थिक सुरक्षा मिलती है। सवाल : राजस्थान में यह योजना कब से लागू है? जवाब : राजस्थान सरकार ने पुनर्गठित मौसम आधारित फसल बीमा योजना (RWBCIS) को खरीफ 2026 से रबी 2026-27 तक लागू किया है। खरीफ 2026 के लिए अधिसूचना 11 अगस्त 2026 को जारी की गई है। सवाल : इस योजना में कितने जिलों के किसान शामिल हैं? जवाब : प्रदेश के सभी 41 जिलों में अलग-अलग वाणिज्यिक और बागवानी फसलों को अधिसूचित (लिस्ट में शामिल) किया गया है। सवाल : खरीफ 2026 में कौन-कौन सी फसलें बीमा के दायरे में हैं? जवाब : खरीफ में हरी मिर्च, भिंडी, प्याज, टमाटर, अरंडी, अनार, टिंडा, मेहंदी, संतरा और किन्नू को शामिल किया गया है। सवाल : रबी 2026-27 में किन फसलों का बीमा होगा? जवाब : रबी में आंवला, बैंगन, सौंफ, फूलगोभी, लहसुन, प्याज, मटर, टमाटर, आलू, अमरूद, नींबू, आम, खरबूजा, तरबूज, बेर, पत्तागोभी, मौसंबी और पपीता जैसी फसलें शामिल हैं। सवाल : क्या हर किसान इस योजना का लाभ ले सकता है? जवाब : हां, ऋणी, गैर-ऋणी और पात्र बंटाईदार किसान अधिसूचित फसलों (लिस्ट में शामिल फसलों) का बीमा करवा सकते हैं। जिस फसल को आपके जिले में अधिसूचित किया गया है, उसी का बीमा कराया जा सकेगा। सवाल : किसान को बीमा के लिए कितना प्रीमियम देना होगा? जवाब : वाणिज्यिक और बागवानी फसलों के लिए किसान को बीमित राशि का अधिकतम 5 प्रतिशत प्रीमियम देना होगा। इससे अधिक निर्धारित प्रीमियम का भार केंद्र और राज्य सरकार नियमानुसार उठाएगी। सवाल : फसल बीमा कराने के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट्स चाहिए? जवाब : किसान के पास आम तौर पर आधार कार्ड, बैंक खाते की जानकारी/पासबुक, मोबाइल नंबर, भूमि से जुड़े दस्तावेज और एग्रीस्टैक आईडी होनी चाहिए। बंटाईदार किसान को पात्रता साबित करने से जुड़े दस्तावेज भी देने पड़ सकते हैं। सटीक दस्तावेज बैंक/CSC/बीमा माध्यम और किसान की श्रेणी के अनुसार मांगे जा सकते हैं। सवाल : अगर किसान ने बैंक से कृषि ऋण ले रखा है और वह बीमा नहीं करवाना चाहता तो क्या करे? जवाब : ऋणी किसान योजना से बाहर रहना चाहता है तो उसे 24 अगस्त 2026 तक संबंधित बैंक में ऑप्ट-आउट घोषणा पत्र देना होगा। सवाल : अगर किसान ने अपनी फसल का नाम गलत दर्ज कर दिया है तो क्या उसे बदल सकता है? जवाब : किसान 29 अगस्त 2026 तक फसल के नाम में बदलाव करवा सकता है। सवाल : फसल बीमा कहां से कराया जा सकता है? जवाब : किसान अपनी नजदीकी बैंक शाखा, सहकारी संस्था, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, CSC (कॉमन सर्विस सेंटर), डाकघर या अधिकृत बीमा कंपनी के माध्यम से बीमा करवा सकता है। सवाल : राजस्थान में इस योजना को कौन-सी बीमा कंपनी लागू करेगी? जवाब : योजना के क्रियान्वयन के लिए एग्रीकल्चर इंश्योरेंस कंपनी ऑफ इंडिया लिमिटेड (AIC) तय की गई है। सवाल : बीमा कराने से पहले किसान को क्या देखना चाहिए? जवाब : किसान को अपने जिले में यह जरूर जांच लेना चाहिए कि उसकी फसल योजना में शामिल है या नहीं, बीमित राशि कितनी है, प्रीमियम कितना है और बीमा कराने की अंतिम तारीख क्या है। सवाल : मौसम की मार से नुकसान होने पर क्या हर नुकसान का पैसा मिलेगा? जवाब : जरूरी नहीं। मुआवजा योजना में निर्धारित अधिसूचित मौसम जोखिम, फसल, क्षेत्र और योजना के नियमों के आधार पर तय होगा। इसलिए किसान को अपनी फसल और जिले के लिए लागू शर्तों की जानकारी लेकर ही बीमा करवाना चाहिए। सवाल : इस योजना में फसल की बीमित राशि कैसे तय होती है? जवाब : हर फसल के लिए बीमित राशि पहले से तय होती है। इसे जिले की तकनीकी समिति फसल की खेती में आने वाली लागत और तय किए गए ‘खर्च के पैमाने’ के आधार पर तय करती है। अगर समिति यह राशि तय नहीं करती है, तो सरकार फसल की अनुमानित खेती लागत के आधार पर बीमित राशि तय करती है। सवाल : क्लेम का निपटारा कब तक किया जाता है? जवाब : प्रमाणित मौसम डेटा मिलने के 45 दिनों के भीतर भुगतान हो जाता है। यह समय सरकार की सब्सिडी मिलने पर निर्भर है। अगर स्थानीय आपदा से फसल खराब होती है, तो किसान को 72 घंटे के भीतर नुकसान की सूचना देनी होगी। इसके बाद बीमा कंपनी 48 घंटे के भीतर नुकसान का आकलन करने वाला अधिकारी भेजेगी। नुकसान का सर्वे 10 दिनों के भीतर पूरा किया जाएगा और सर्वे के आधार पर 15 दिनों के भीतर दावे का निपटारा किया जाएगा। यह भी सरकार की सब्सिडी मिलने पर निर्भर रहेगा।



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