दीपेंद्र द्विवेदी | कानपुर2 मिनट पहले
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ऐतिहासिक रामबाग स्थित प्राचीन श्री झूलेलाल मंदिर में 40 दिनों के कठिन व्रत के समापन के बाद 41वें दिन चालीहा महोत्सव धूमधाम से मनाया गया। मंदिर में अखंड ज्योत के पट खुलते ही ‘जय झूलेलाल’ के जयकारों से पूरा परिसर गूंज उठा। महाआरती के दौरान ढोल-नगाड़ों की थाप पर श्रद्धालु भक्ति में झूमते नजर आए।

सिंध से लाई गई पंचमुखी ज्योत आज भी जल रही
रामबाग स्थित मंदिर की अखंड ज्योत का इतिहास सिंधी समाज की आस्था से जुड़ा है। बताया जाता है कि विभाजन के समय स्वर्गीय उद्धव दास जी सिंध प्रांत से अखंड ज्योत प्रज्वलित कर भारत लाए थे। बाद में इसे रामबाग स्थित श्री झूलेलाल मंदिर में स्थापित किया गया।
मंदिर में स्थापित यह पंचमुखी अखंड ज्योत आज भी लगातार प्रज्वलित है। चालीहा महोत्सव के अवसर पर इसके दर्शन के लिए शहरभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं।
40 दिन व्रत, 41वें दिन चालीहा का उल्लास
सिंधी समाज में चालीहा महोत्सव का विशेष धार्मिक महत्व है। श्रद्धालु 40 दिनों तक नियम-संयम के साथ व्रत रखते हुए भगवान श्री झूलेलाल की आराधना करते हैं। 40 दिन की साधना पूरी होने के बाद 41वें दिन चालीहा पर्व उत्साह और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।
महाआरती में उमड़ा आस्था का सैलाब
महोत्सव के अवसर पर मंदिर में विशेष महाआरती हुई। भक्ति गीतों और शहनाई की धुनों के बीच श्रद्धालुओं ने जल देव और भगवान श्री झूलेलाल की पूजा-अर्चना की। आरती के दौरान श्रद्धालु भक्ति में लीन नजर आए।
आरती के बाद लोगों ने एक-दूसरे को चालीहा पर्व की शुभकामनाएं दीं। श्रद्धालुओं ने भगवान से देश की खुशहाली, सुख-समृद्धि और शांति की प्रार्थना की। दिनभर मंदिर में दर्शन-पूजन और अखंड ज्योत के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा।

