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जैसलमेर समेत राजस्थान के सीमावर्ती इलाकों में 827 किमी नई रेल लाइन बिछाई जाएगी। इससे सेना के भारी टैंक, तोपखाने, सैन्य टुकड़ियों और जरूरी रसद को पाकिस्तान सीमा के नजदीक तक पहुंचाना आसान होगा। अभी इन इलाकों में सैन्य साजो-सामान की आवाजाही के लिए सड़क मार्ग पर काफी निर्भरता है, लेकिन नया रेल नेटवर्क तैयार होने के बाद आपात स्थिति में सेना की सप्लाई लाइन मजबूत होगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में पश्चिमी सीमा पर जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक निरंतर रेल नेटवर्क तैयार करने की योजना की जानकारी दी है। इसका फायदा सीमावर्ती इलाकों के व्यापार, खनन और पर्यटन को भी मिलने की उम्मीद है। सड़क पर निर्भरता घटेगी, रसद पहुंचाना होगा आसान वर्तमान में सीमावर्ती और संवेदनशील इलाकों में सैन्य रसद और भारी साजो-सामान पहुंचाने के लिए मुख्य रूप से सड़क परिवहन पर निर्भर रहना पड़ता है। तनाव या युद्ध की स्थिति में रेगिस्तानी सड़कें हवाई या मिसाइल हमलों से प्रभावित हो सकती हैं। नई रेल लाइनें तैयार होने के बाद सड़क मार्ग बाधित होने की स्थिति में भी सेना की सप्लाई लाइन को बनाए रखना आसान होगा। रेल की अधिक वहन क्षमता से सैनिकों के लिए भोजन, गोला-बारूद और ईंधन जैसी जरूरी सामग्री तेजी से पहुंचाई जा सकेगी। संसद में रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने दी जानकारी रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने संसद में परियोजना की जानकारी देते हुए बताया कि पश्चिमी सीमा पर जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक निरंतर रेल नेटवर्क तैयार करने की व्यापक कार्ययोजना पर तेजी से काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि ये रेल लाइनें केवल परिवहन का साधन नहीं होंगी, बल्कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘डिफेंस लाइन्स’ के तौर पर भी काम करेंगी। इससे आपात स्थिति में सड़क नेटवर्क पर निर्भरता कम होगी और देश की रक्षा तैयारियों को मजबूती मिलेगी। जमीन अधिग्रहण और सर्वे का काम तेज परियोजना को समय पर पूरा करने के लिए रेलवे और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों के बीच समन्वय बढ़ाया जा रहा है। जमीन अधिग्रहण और सर्वे के काम को गति दी जा रही है। कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और रेगिस्तान की गर्मी के बावजूद रेलवे प्रशासन योजना को तय समय सीमा में पूरा करने की तैयारी में जुटा है।
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जैसलमेर बॉर्डर तक बिछेगी 827 किमी नई रेल लाइन:सेना के भारी टैंक और सामान पहुंचाना होगा आसान, जम्मू-कश्मीर से गुजरात तक जुड़ेगा नेटवर्क
