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Rakshabandhan 2026 | No Bhadra Shadow, Rakhi Celebration All Day Long


पटना29 मिनट पहले

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सावन शुक्ल पूर्णिमा में आज रक्षाबंधन का पर्व मनाया जाएगा। रक्षाबंधन पर भद्रा का साया नहीं होने से बहने पूरे दिन अपने भाई के कलाई पर राखी बांधेगी।

शुक्रवार की सुबह 09:27 बजे तक ही पूर्णिमा तिथि रहेगी, परंतु उदयातिथि से पूरे दिन पूर्णिमा का मान होगा। रक्षाबंधन पर आज शुक्रवार को शतभिषा नक्षत्र में बहने अपने भाई को राखी बांधेगी।

भद्रा रहित काल में राखी बांधने से सौभाग्य में बढ़ोत्तरी

ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि भद्रा रहित काल में राखी बांधने से सौभाग्य में बढ़ोत्तरी होती है। शुभ योग में रक्षाबंधन का पर्व मनाने से ऐश्वर्य व सौभाग्य की वृद्धि होती है। रक्षाबंधन में भाई-बहन के परस्पर रक्षा की भावना से दोनों का आत्मबल पुष्ट होता है I

भाई की कलाई में राखी के धागे बांध जहां बहन उसके दीर्घायुष्य, स्वास्थ्य, सुख, सौमनस्य की कामना करती है, वही भाई भी बहन के सम्यक रक्षणार्थ प्रतिबद्ध होता है। राखी की डोर पारस्परिक प्रेम को सुदृढ़ करती है।

ज्योतिषाचार्य राकेश झा।

ज्योतिषाचार्य राकेश झा।

शुक्रवार और पूर्णिमा का बना संयोग

राखी के त्योहार पर आज पूर्णिमा तिथि और शुक्रवार दिन का उत्तम संयोग बना है, जिससे आज के दिन की महत्ता और बढ़ गयी है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शुक्रवार को सुख, सौहार्द और प्रेम का दिन माना जाता है।

पूर्णिमा तिथि को चन्द्रमा की पूर्णता का प्रतीक माना गया है। ज्योतिषी राकेश झा के मुताबिक रक्षाबंधन पर यह संयोग पारिवारिक संबंधों में स्नेह, संवाद और आत्मीयता बढ़ाएगा। इस दिन सूर्य सिंह राशि में, गुरु कर्क राशि में तथा शनि मीन राशि में विद्यमान रहेंगे।

तिलक लगाने के बाद बंधेगी राखी

रक्षाबंधन पर बहने राखी बांधने के लिए आरती की थाली में रोली चंदन, अक्षत, फूल, मिठाई, घी के दीपक और राखी रखकर उसको फूलो से सजाकर सुंदर और आकर्षक बनाकर भाइयों को तिलक कर राखी बंधेगी फिर उनकी आरती उतारने के बाद मिठाई खिलाएगी। बहनों द्वारा राखी बंधवाने के बाद भाई भी उनको यथोचित उपहार देकर आजीवन उसकी रक्षा का संकल्प लेंगे।

देवताओं को भी बांधी जायेगी राखी

पंडित राकेश झा ने बताया कि श्रावण पूर्णिमा को रक्षाबंधन के पावन पर्व पर सनातन धर्मावलंबी अपने आराध्य देवताओं को भी राखी बांधेंगे। वे शास्त्रीय विधान से निर्मित और कलात्मक राखी को अपने इष्टदेव, कुलदेवता के साथ शिव, गणेश, बजरंगबली, राम एवं लड्डू गोपाल को भी चंदन लगाकर मंत्रोच्चार करते हुए राखी बांधेंगे फिर नाना प्रकार के मिष्ठान व पकवान का भोग लगाकर घी के दीपक से उनकी आरती होगी। वहीं पर्यांवरण संरक्षण के संदेश को लेकर प्रकृति प्रेमी भी पेड़-पौधों को राखी बांधकर उसकी रक्षा एवं संरक्षण का संकल्प लेंगे।

चंद्रग्रहण से मुक्त होगा रक्षाबंधन, न लगेगी सूतक

श्रावण शुक्ल पूर्णिमा पर आज शुक्रवार की सुबह 08:04 बजे से 11:22 बजे तक खंडग्रास चंद्रग्रहण लग रहा है। चंद्रग्रहण का सूतक 9 घंटे पहले ही शुरू हो जाता है। यह चंद्रग्रहण पटना समेत पूरे भारत में दिखाई नहीं देगा। इसी लिए इसका कोई धर्मशास्त्रीय फलाफल लागु नहीं होगा और ना ही इसका सूतक लगेगा। इस ग्रहण को अंटार्कटिका, अफ्रीका, एशिया, यूरोप, हिन्द महासागर, अटलांटिक महासागर व प्रशांत महासागर में देखा जाएगा।



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