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'राम जन्म भूमि ट्रस्ट में सम्मानजनक पद दिया जाए':राम जन्मभूमि मुकदमे के पक्षकार के परिजन बोले- रामलला के दर्शन न कर पाने का मलाल




राम जन्मभूमि मामले में ‘रामलला के सखा’ के रूप में कानूनी लड़ाई लड़ने वाले स्वर्गीय पंडित त्रिलोकीनाथ पांडेय का परिवार अब रामलला के दर्शन के लिए परेशान होने का दावा कर रहा है। परिवार का आरोप है कि सावन झूला मेले के दौरान दर्शन के लिए अयोध्या पहुंचे, लेकिन चार दिन तक अलग-अलग जगह भेजे जाने के बाद भी दर्शन नहीं हो सके। सावन पूर्णिमा पर झूला उतरने के बाद भी परिवार रामलला के दर्शन नहीं कर पाया। त्रिलोकीनाथ पांडेय की पत्नी कमलादेवी (75), बेटे अमित (40) और अरविंद (48) के साथ तीन बेटियां हैं। परिवार का कहना है कि पांडेय ने अपना पूरा जीवन राम मंदिर निर्माण की कानूनी लड़ाई में लगा दिया था। इसके बावजूद आज परिवार को सामान्य तरीके से भी दर्शन नहीं मिल पा रहे हैं। परिवार ने रखीं तीन प्रमुख मांगें परिवार ने राम मंदिर परिसर या मुख्य द्वार के सामने त्रिलोकीनाथ पांडेय की आदमकद प्रतिमा लगाने की मांग की है। इसके अलावा परिवार के किसी सदस्य को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में सम्मानजनक पद देने की मांग की गई है। परिवार ने यह भी मांग की है कि त्रिलोकीनाथ पांडेय के आश्रितों और शुभचिंतकों के लिए विशिष्ट दर्शन पास और निर्धारित समय पर दर्शन की व्यवस्था की जाए। ‘घर-परिवार से ज्यादा रामकाज को महत्व दिया’ बेटे अमित पांडेय का कहना है कि उनके पिता ने करीब 34 साल तक राम मंदिर की कानूनी लड़ाई लड़ी। परिवार के मुताबिक, उन्होंने ‘रामलला के सखा’ के रूप में खुद को प्रस्तुत करते हुए मुकदमे में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और रामलला के पक्ष में फैसला आने तक कानूनी लड़ाई जारी रखी। परिवार का कहना है कि त्रिलोकीनाथ पांडेय रामकाज को ही अपने जीवन का उद्देश्य मानते थे। घर-परिवार और रिश्तेदारों के कार्यक्रमों से ज्यादा प्राथमिकता राम मंदिर से जुड़े कामों को देते थे। कई बार प्रमुख त्योहारों पर भी वह घर नहीं पहुंच पाते थे। बलिया में हुआ था जन्म, 19 महीने जेल में रहे त्रिलोकीनाथ पांडेय का जन्म 22 दिसंबर 1945 को बलिया के दद्द्या गांव में हुआ था। उन्होंने एमए हिंदी और बीएड की पढ़ाई की। छात्र जीवन में वह छात्रसंघ के महामंत्री रहे। 1975 में आपातकाल का विरोध करने पर उन्हें गिरफ्तार किया गया और करीब 19 महीने जेल में रखा गया। इसके बाद वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े। वर्ष 1982 में वह पूरी तरह विश्व हिंदू परिषद के काम से जुड़ गए। वर्ष 1994 में उन्हें राम जन्मभूमि से जुड़े मुकदमों की कानूनी जिम्मेदारी दी गई। परिवार के अनुसार उन्होंने स्थानीय अदालतों से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक ‘रामलला विराजमान’ के नेक्स्ट फ्रेंड के रूप में मुकदमे की पैरवी की। 24 सितंबर 2021 को लखनऊ के एसजीपीजीआई में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया था। परिवार अब उनके योगदान को सम्मान देने और रामलला के दर्शन की बेहतर व्यवस्था की मांग कर रहा है।



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