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नमस्कार, राजनीति अपनी जगह और धंधा अपनी जगह, सचिन पायलट ने मजाक में डीजल की बात कही थी, कांग्रेस नेता ने इनकार कर दिया। ओसियां से पूर्व विधायक दिव्या मदेरणा ने रिटर्निंग ऑफिसर से लेकर पुलिसवालों तक की क्लास लगा दी। कॉलेज में कोबरा निकल आया तो विधायकजी की बहू ने लेक्चर दे दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. सचिन पायलट को नहीं दिया ‘डीजल’ सचिन पायलट बाड़मेर पहुंचे। यहां कई कार्यक्रमों में हिस्सा लेने के बाद बाड़मेर के कई नेता हेमाराम चौधरी, हरीश चौधरी, उम्मेदाराम, गफूर अहमद के साथ मुलाकात हुई। मंच पर सभी नेताओं के बीच बैठे सचिन पायलट ने गफूर अहमद से मजाक किया। गफूर अहमद पेट्रोल पंप के मालिक हैं। पायलट ने कहा- हम सब आपसे तेल लेने आए हैं। गफूर अहमद ने सीधा सा जवाब दिया- तेल तो मैं नहीं भरवाऊंगा। यहां तो हेमाराम जी भी जेब में नोट लेकर आते हैं तब तेल भरता है। इस पर सभी ठहाका मारकर हंसने लगे। सचिन पायलट ने यही किस्सा मंच से भी छेड़ दिया। उन्होंने कहा- आप लोगों ने बहुत प्यार दिया, लेकिन गफूर साहब ने डीजल नहीं दिया। आज मना कर दिया। मैं तो इनकी परीक्षा ले रहा था। मैं तो बाड़मेर से ही तेल भरवा के आया हूं। इस बीच हरीश चौधरी पायलट के करीब पहुंचे और कहा- हमारे यहां कहते हैं मिस्किन आदमी हैं हम लोग। इस पर सभी ने जोरदार ठहाका लगाया। पायलट आगे बोले- मैं भी तवे को हाथ लगाकर देख रहा था कि गर्म कितना है। मैं देख रहा था कि आप मुझे कैसे मना करोगे। इन्होंने कहा कि हेमाराम जी भी पैसे लेकर आते हैं। वाह-वाह। इसके बाद उन्होंने गफूर अहमद की तारीफ करते हुए कहा- आपके परिवार ने दशकों तक इस इलाके की सेवा की है, मैं चाहता हूं आप इतने मजबूत बनें कि दिल्ली जयपुर तक लोगों की आवाज बुलंद करें। 2. मथानिया में दिव्या ने दिया धरना प्रशासन पर शासन का असर तो होता ही है। जोधपुर में मथानिया नगर पालिका के रिटर्निंग अधिकारी के पास भाजपा विधायक भैराराम सियोल पहुंचे। इसके बाद नामांकन करने आए एक कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि उन्हें बाहर निकाल गया गया। बात दिव्या मदेरणा तक पहुंच गई। वे रिटर्निंग ऑफिसर के कमरे तक पहुंचीं और वहीं बैठकर धरना शुरू कर दिया। दिव्या मदेरणा ने अधिकारियों को जमकर खरी-खरी सुनाई। कहा- किसी के कहने पर बेरे (कुएं) में कूद जाओगे क्या? वक्त खत्म होने के बाद आप विधायक की आवभगत में लग गए और कांग्रेस प्रत्याशी को बाहर निकाल दिया। पूर्व विधायक ने अधिकारी-कर्मचारी, पुलिसकर्मी सबकी क्लास लगा दी। अधिकारी के कमरे के सामने चला धरना रात तक भी खत्म नहीं हुआ। बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे। मान-सम्मान का हवाला दिया। रात भर नारेबाजी होती रही। पूर्व विधायक ने वहीं रोटी खाई और जमीन पर ही सो गईं। सुबह फिर अधिकारियों का जमावड़ा लगा। काफी माथापच्ची के बाद तय हुआ कि मामले की जांच की जाएगी और निगरानी के लिए एक अफसर को नियुक्त किया जाएगा। 3. कॉलेज में निकल आया कोबरा बात जोधपुर के बिलाड़ा की है। यहां के सरकारी कॉलेज में जीव विज्ञान की क्लास चल रही थी। इस दौरान अचानक चीख-पुकार मच गई। क्लास में कोबरा निकल आया। सभी छात्रों को सुरक्षित कर सर्पमित्र केशाराम बैरवा को बुलाया गया। केशाराम आए और सांप को रेस्क्यू कर लिया। लेकिन चूंकि क्लास जीव विज्ञान की थी और सांप का अध्याय पाठ्यक्रम में भी था। ऐसे में जीव विज्ञान की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. नीरू गर्ग ने वहीं कोबरा सांप की शारीरिक संरचना, उसके विभिन्न अंग, कार्यप्रणाली और सांप के जीवन चक्र के बारे में छात्रों को जानकारी देना शुरू कर दिया। प्रोफेसर मैडम ने सांपों की पहचान, उनके व्यवहार और सांप दिखने पर बरती जाने वाली सावधानियों के बारे में भी बताया। कुछ देर पहले जहां डर का माहौल था, वहां सांप पर अच्छी खासी क्लास लग गई। यहां खास बात ये है कि असिस्टेंट प्रोफेसर इलाके के विधायक अर्जुनलाल गर्ग की पुत्रवधू हैं। क्लास के बाद सांप को तो जंगल में छोड़ दिया गया लेकिन राजनीतिक गलियारों में विधायकजी की बहू की विशेष क्लास की चर्चा रही। 4. चलते-चलते.. नारे लगाना भी एक कला है। नारों का इतिहास काफी पुराना है। नारे लगाने वाले लड़ने वालों के साथ चला करते थे। ढोल-नगाड़ा, दुंदुभी, शंख और तरह-तरह के वाद्ययंत्र बजाते हुए नारे लगाते चलते थे। नारे लगाने से सेना में जोश आता था। योद्धा दोगुने उत्साह से लड़ते थे। उनका मनोबल बढ़ जाता था। युद्ध के दौरान सेनाओं की टुकड़ियां भी नारे लगाती हैं। नारा बुलंद करने से जोश बढ़ता है। खेल में जब दो टीमें आमने-सामने होती हैं तो तब भी जोश बढ़ाने के लिए नारेबाजी की जाती है। भारत-पाकिस्तान क्रिकेट मैच के दौरान होने वाली नारेबाजी खेल के जुनून को बढ़ाती है। राजस्थान विधानसभा में आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल की एक भी सीट नहीं है। लेकिन निकाय और पंचायत चुनाव में उन्हें काफी उम्मीदें हैं। उनके प्रत्याशी मैदान में उतर गए हैं। हालांकि भाजपा-कांग्रेस में टिकट को लेकर घमासान मचा। दोनों दलों से टिकट चाहने वालों की कई कहानियां सामने आईं। लोगों की दिल टूटे। नेतागण ने कहा कि अब रूठों को मनाने में कसर नहीं छोड़ेंगे। फिलहाल हनुमान बेनीवाल भी अपने कार्यक्रर्ताओं में जोश फूंकने की पुरजोर कोशिशों में जुटे हैं। खास तौर पर नारे लगाने वाले खास कार्यकर्ताओं पर फोकस है। वे माहौल में कोई कमी नहीं रहने दे रहे हैं। इनपुट सहयोग- विजय कुमार (बाड़मेर), अंकित ढाका (जोधपुर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगाी।
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'डीजल' की बात पर खूब हंसे सचिन पायलट:दिव्या मदेरणा बोलीं- 'कुएं में कूद जाओगे?'; क्लास में निकल आया 'कोबरा'
