पैरेंट समझाने-सुधारने के बजाय बच्चे से कहें- मुझे भी सिखाओ:हफ्ते में सिर्फ 5 मिनट दें, सिखाने से उसका आत्मविश्वास और भरोसा बढ़ेगा




गर्मियों में शारा अरोड़ा की 9 साल की बेटी एक मैजिक शो देखकर घर लौटी। उसने खुद ट्रिक दिखाने की ठानी। थोड़ी देर में वह तौलिया उठाकर चम्मच को उसके पीछे ‘हवा में तैरता’ दिखाने लगी। अरोड़ा समझ गईं कि चम्मच कहीं टेप किया गया है। फिर भी उन्होंने ट्रिक नहीं बिगाड़ी। उन्होंने बस पूछा- ‘ये कैसे किया?’ बेटी का चेहरा खिल गया। उसने बताया कि आइडिया कहां से आया। उसने कैसे कोशिशें कीं। कहां गलती हुई। कैसे उसने तरीका सुधारा। असली जादू चम्मच नहीं था। असली जादू वह पल था, जब जवाब जानते हुए भी माता-पिता चुप रहे। बच्चे को एक्सपर्ट बनने दिया। यही 5 मिनट की आदत है। हफ्ते में एक बार बच्चे से कहें- ‘मुझे कुछ सिखाओ।’ बच्चे को यह महसूस कराने के लिए कि वह भी बहुत कुछ जानता है, माता-पिता को बहुत बड़े प्रयास करने की जरूरत नहीं है। हफ्ते में सिर्फ पांच मिनट निकालकर उससे कुछ सीखना काफी हो सकता है। विशेषज्ञों के मुताबिक, जब माता-पिता बच्चे से कहते हैं- ‘मुझे यह समझ नहीं आया, तुम बताओ’, तो बच्चा खुद को सिर्फ सीखने वाला नहीं, बल्कि विशेषज्ञ महसूस करता है। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है। कम्युनिकेशन मजबूत होता है, जिज्ञासा बढ़ती है और पैरेंट से जुड़ाव भी मजबूत होता है। मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, बच्चे दिन का बड़ा हिस्सा निर्देश, सुधार और मूल्यांकन सुनते हुए बिताते हैं। ऐसे में जब माता-पिता उनसे कुछ सीखने लगते हैं तो यह छोटा-सा बदलाव उनके लिए खास मायने रखता है। ह्यूस्टन की दो मोंटेसरी स्कूलों की कार्यकारी निदेशक शारा अरोड़ा कहती हैं कि जब बच्चा कुछ सिखाता है तो उसके चेहरे पर एक अलग ही गर्व झलकता है, ‘मुझे कुछ ऐसा पता है, जो बड़ों को नहीं पता।’ स्कूल साइकोलॉजिस्ट एलेक्स एंडरसन-काल का कहना है कि यह तरीका खासकर उन बच्चों के लिए असरदार है, जो स्कूल में संघर्ष करते हैं।’ स्पीच-लैंग्वेज पैथोलॉजिस्ट मिशेल रेट्स्की बताती हैं कि सिखाने में बच्चा दूसरे के नजरिए को समझना सीखता है, वह तय करता है कि सामने वाले को क्या पता है, क्या नहीं और अपनी बात को कैसे सरल बनाकर समझाया जाए। सलाह- इसे होमवर्क न बनाएं, मौका तलाशें और कुछ सीखें विशेषज्ञों की सलाह है कि इसे होमवर्क न बनाया जाए; बस हफ्ते में एक बार मौका तलाशें। अगर बच्चा ड्राइंग, बिल्डिंग, कुकिंग, गेमिंग या डांस कर रहा है तो पूछें- ‘रुको, यह कैसे किया?’ या ‘मुझे नहीं पता, तुम दिखाओगे?’ बच्चे से ये भी कह सकते ​हैं- 1. उसका पसंदीदा गेम कैसे खेला जाता है। 2. वह कोई चित्र या क्राफ्ट कैसे बनाता है। 3. उसके पसंदीदा खेल का नियम या रणनीति। 4. वीडियो या फोटो एडिट करने का तरीका। 5. कोई डांस, म्यूजिक या दूसरी कला। 6. उसकी उम्र के बच्चों की भाषा/स्लैंग का मतलब।



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