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कभी-कभार चिंता महसूस होना सामान्य है। लेकिन जब बार-बार होने लगे, तो हम नकारात्मक और सीमित सोच के एक चक्र में फंस सकते हैं। ऐसी सोच डर और तनाव को और बढ़ा देती है। इसलिए जरूरी है कि हम अपने विचारों को पहचानकर उन्हें बेहतर दिशा देने की कोशिश करें। इससे बाहर निकलने के लिए इन पांच तरीकों को आजमाया जा सकता है। 1. सोच के पैटर्न को रोकें
चिंता बढ़ने से पहले शरीर कुछ संकेत देता है, जैसे बेचैनी या तनाव। ऐसे समय अपना ध्यान किसी दूसरी गतिविधि पर लगाएं जिसमें एकाग्रता की जरूरत हो और जो दिमाग को चिंता से हटाने में मदद कर सकता है। 2. अपनी सोच को नाम दें
पहचानें कि आप कैसी नकारात्मक सोच में फंस रहे हैं। जैसे हर बात का सबसे बुरा परिणाम सोचना या किसी एक घटना से सामान्य निष्कर्ष निकालना। अपनी सोच को नाम देने से उसे समझना और उससे दूरी बनाना आसान होता है। 3. डर और तथ्य को अलग करें
एक कागज पर दो कॉलम बनाएं। पहले में अपने डर, संदेह और आशंकाएं लिखें और दूसरे में वे तथ्य लिखें जिन्हें आप वास्तव में जानते हैं। दोनों की तुलना करने से आपको स्थिति को अधिक वास्तविक तरीके से देखने में मदद मिल सकती है। 4. संभावनाओं के बारे में सोचें
चिंता के दौरान हम अक्सर बिना पूरी जानकारी के निष्कर्ष निकाल लेते हैं। ऐसे में खुद से पूछें कि इसके पीछे क्या कोई सामान्य कारण भी हो सकता है। किसी घटना की दो अलग और सकारात्मक व्याख्याएं सोचने की कोशिश करें। 5. खुद को वही सलाह दें जो दूसरों को देते हैं
अगर आपको लगे कि ‘मुझे समझ नहीं आ रहा क्या करूं’ या ‘इसका कोई रास्ता नहीं है’, तो सोचें कि ऐसी स्थिति में अगर आपका कोई दोस्त आपसे सलाह मांगता, तो आप उसे क्या कहते। इससे आप अपनी समस्या को थोड़ी दूरी से और अधिक स्पष्टता के साथ देख पाएंगे।
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