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Samastipur Station Crime | Bihar Liquor Smuggling Gen-Z Model Case


तारीख 4 सितंबर। समय रात करीब 9 बजे। समस्तीपुर रेलवे स्टेशन का प्लेटफॉर्म नंबर-1। दिल्ली से आने वाली स्वतंत्रता सेनानी एक्सप्रेस रुकी और कुछ ही सेकेंड में रेल पुलिस के जवान सीधे फर्स्ट क्लास बोगी H-1 की तरफ बढ़ गए।

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बोगी के अंदर एक लड़की बैठी थी। करीब 5.6 फीट हाइट, गोरा रंग, ब्लैक टी-शर्ट और ट्राउजर। चेहरा ऐसा कि कोई उसे मॉडल, कॉरपोरेट प्रोफेशनल या किसी रईस परिवार की बेटी समझ ले। आसपास बैठे यात्रियों को भी यही लगा कि शायद कोई खास यात्री होगी।

लेकिन अगले कुछ मिनट में पूरा मंजर बदल गया।

पुलिस उसे लेकर प्लेटफॉर्म पर उतरी। लोगों की उत्सुक निगाहें उस पर टिक गईं। फिर उसकी ट्रॉली बैग खुली और अंदर से निकली विदेशी शराब की बोतलें। जो चेहरा कुछ देर पहले तक आम यात्रियों के लिए सिर्फ एक मुस्कुराती लड़की का था, वह अब शराब तस्करी की नई कहानी कह रही थी।

आखिर वो लड़की कौन है, क्या यह शराब तस्करी का जेन-Z मॉडल है, क्या शराबबंदी के कारण बिहार के जेन-Z अपराधी बन रहे? इन्हीं सवालों के जवाब तलाशेंगे, बूझे की नाही में…।

सबसे पहले लड़की की तस्वीर देखिए…

यह समस्तीपुर जिले के सिंघिया थाना क्षेत्र के बारी गांव की रहने वाली नेहा झा है। चार बहनों में सबसे छोटी। उम्र करीब 23 साल। पिता किसान और मां आंगनबाड़ी सेविका हैं। नेहा ने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई की है।

रेल पुलिस ने नेहा के आठ ब्रीफकेस और दो बैग से करीब 75 लीटर विदेशी शराब जब्त की है। एक बोलत की कीमत करीब 2,000 रुपए है। मतलब करीब डेढ़ लाख रुपए की शराब।

जीजा जेल में, साली ने संभाली सप्लाई की जिम्मेदारी

रेलवे अफसरों के मुताबिक, नेहा बिना टिकट के यात्रा कर रही थी। वह अपनी बड़ी बहन के देवर ईशान के साथ दरभंगा जा रही थी। नेहा के लुक्स ऐसे थे कि किसी को शक नहीं था कि वह बिना टिकट की होगी।

सूत्रों के मुताबिक, पुलिस को टीप मिली थी कि लंबे-काले घने बाल और गोरी सी खूबसूरत लड़की अपने दोस्त के साथ शराब लेकर दरंभगा जा रही है। उसी टीप के आधार पर पुलिस ने दरभंगा से 38 किलोमीटर पहले फर्स्ट AC बोगी की तलाशी ली और नेहा और उसके साथी ईशान कुमार को गिरफ्तार किया।

सूत्रों के मुताबिक, नेहा की बड़ी बहन का पति फिलहाल शराब तस्करी के केस में ही छपरा जेल में बंद है। उसके जेल जाने के बाद शराब नेटवर्क ध्वस्त हो गया था। उस नेटवर्क को खड़ा करने के लिए नेहा आगे आई। उसने जीजा के भाई ईशान को भी साथ लिया।

  • GRP इंस्पेक्टर बीरबल कुमार ने बताया, ‘भले ही नेहा शराब के साथ पहली बार पकड़ी गई है, लेकिन आशंका है कि वह पहले भी दिल्ली से कई बार शराब की खेप ला चुकी है।
  • फिलहाल नेहा झा और ईशान कुमार को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस उनके कॉल रिकॉर्ड्स और कॉन्टैक्ट्स को खंगाल रही है, ताकि इस सिंडिकेट में शामिल बड़े नामों का खुलासा हो सके। जरूरत पड़ने पर दोनों को पुलिस रिमांड पर लेकर फिर से कड़ी पूछताछ करेगी।’

पूरा परिवार बड़े लोगों के घर पहुंचाता है शराब

नेहा की गिरफ्तारी के बाद उसके गांववालों के दावों ने इस पूरे शराब के खेल से पर्दा उठाया। भास्कर को नेहा के गांव के सुमित ने बताया, ‘उसकी पहचान दरभंगा के बड़े-बड़े डॉक्टरों, रसूखदारों और पैसे वाले लोगों से है, जिन्हें वह आसानी से शराब की होम डिलीवरी करती है।’

चर्चा है कि नेहा ने शराब सप्लाई के इस नेटवर्क में कई अन्य लड़कियों को भी जोड़ रखा था। हालांकि, पुलिस का कहना है कि होम डिलीवरी और डॉक्टरों से जुड़े इन दावों की अभी आधिकारिक पुष्टि की जा रही है।

  • गांववालों के दावों के मुताबिक, चारों बहनों को पढ़ाई के लिए दरभंगा भेजा गया था, लेकिन वहां उनकी संगत बड़े-बड़े लोगों से हो गई। उसके बाद उनकी रंगत बदल गई।
  • नेहा की दूसरी बहन निशु झा को दरभंगा पुलिस शराब तस्करी के मामले में दो बार जेल भेज चुकी है। पिता भी करीब दो साल पहले शराब के केस में ही जेल जा चुके हैं।
  • तीसरी बहन दरभंगा में एक डायग्नोस्टिक सेंटर में काम करती है। उसके खिलाफ अब तक कोई केस नहीं है। वहीं, दो भाइयों में एक गांव में मैट्रिक की पढ़ाई कर रहा है और दूसरा NEET की तैयारी कर रहा भाई परीक्षा में असफल होने के बाद नशे की चपेट में आ गया, जिसका मुजफ्फरपुर के नशामुक्ति केंद्र में इलाज चला था।

नेहा के अलावा शराब तस्करी के जेन-Z मॉडल की 2 कहानियां ये भी

1. किराए का पति, भाड़े का बच्चा और लग्जरी कार से शराब की तस्करी

30 जून 2026। जगह-मोतिहारी। सड़क पर दौड़ती एक चमचमाती लग्जरी कार, उसमें बैठा एक पुरुष, एक महिला और साथ में एक मासूम बच्चा… किसी भी देखने वाले को यही लगेगा कि एक हंसता-खेलता छोटा सा परिवार सफर पर निकला है।

लेकिन सच्चाई यह थी कि यह कोई परिवार नहीं, बल्कि शराब की तस्करी के लिए तैयार किया गया एक सोची-समझी साजिश का ‘सेटअप’ था!

नाकेबंदी, महिला का ड्रामा और सीट के नीचे का राज

उत्पाद विभाग की टीम को पक्की खबर मिली थी कि उत्तर प्रदेश (UP) से लग्जरी कार के जरिए शराब की एक बड़ी खेप बिहार लाई जा रही है। सूचना मिलते ही उत्पाद निरीक्षक शिवेंद्र कुमार की टीम ने कोटवा इलाके में नाकेबंदी कर वाहन जांच शुरू कर दी।

  • जैसे ही संदिग्ध कार को रोककर तलाशी ली जाने लगी, कार में बैठी महिला भड़क उठी। उसने पुलिस कार्रवाई का पुरजोर विरोध किया और आरोप लगाया कि एक भले परिवार को बेवजह परेशान किया जा रहा है। महिला ने टीम को उलझाने और जांच रुकवाने का पूरा ड्रामा रचा।
  • लेकिन अधिकारियों को कुछ गड़बड़ का अहसास हो गया। जब कार की गहराई से तलाशी ली गई, तो अधिकारी भी दंग रह गए। कार की सीट के नीचे एक बेहद शातिराना ‘विशेष तहखाना’ बनाया गया था, जिसमें भारी मात्रा में शराब छिपाई गई थी। शराब को इतनी सफाई से छुपाया गया था कि सामान्य चेकिंग में इसे पकड़ पाना नामुमकिन था।
मोतिहारी पुलिस ने नकली पति-पत्नी और बच्चे को जून में गिरफ्तार किया था। यह नकली कपल तस्करी के लिए बना था।

मोतिहारी पुलिस ने नकली पति-पत्नी और बच्चे को जून में गिरफ्तार किया था। यह नकली कपल तस्करी के लिए बना था।

‘रेट कार्ड’ सुनकर उड़े पुलिस के होश

हिरासत में लेकर जब पूछताछ शुरू हुई, तो जो सच सामने आया उसने जांच अधिकारियों के भी पैरों तले जमीन खिसका दी। महिला ने कबूला कि कार चला रहा शख्स उसका पति नहीं, बल्कि ‘किराए का पति’ था।

पुलिस से बचने और रास्ते में किसी को शक न हो, इसके लिए एक पूरा गिरोह काम कर रहा था जिसका तय ‘दिहाड़ी रेट’ था…

  • किराए का पति: 2,000 रुपए प्रति खेप
  • महिला (नकली पत्नी): 1,500 रुपए प्रति खेप
  • भाड़े का बच्चा: 500 रुपए प्रति खेप

महिला ने बताया कि इस नेटवर्क में शामिल लोग अलग-अलग इलाकों के रहने वाले हैं। जब भी UP से शराब उठानी होती, तो इन सभी को एक साथ लाकर ‘फैमिली का सेट’ तैयार किया जाता था। जैसे ही डिलीवरी पूरी होती, सब अपने-अपने पैसे लेकर रास्ते अलग कर लेते।

मुजफ्फरपुर होनी थी शराब की डिलीवरी

इस बार भी उनका मकसद UP से शराब की खेप उठाकर सुरक्षित मुजफ्फरपुर तक पहुंचाना था। लेकिन कोटवा में उत्पाद विभाग की मुस्तैदी ने इस ‘रेंटल फैमिली’ के प्लान पर पानी फेर दिया।

2. बीकॉम करने पटना आया छात्र बेचने लगा शराब

17 जुलाई 2026। पटना में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव को लेकर कोतवाली थाना क्षेत्र के हनुमान मंदिर टीओपी के पास पुलिस का सघन वाहन चेकिंग अभियान चल रहा था। तभी पटना जंक्शन की ओर से आती एक ओला कैब को जवानों ने रुकने का इशारा किया।

कैब रुकी, अंदर बैठा कटिहार का रहने वाला सुधांशु बिल्कुल शांत दिखने की कोशिश कर रहा था। लेकिन जैसे ही पुलिस ने तलाशी लेनी शुरू की, एक-एक कर जो चीजें सामने आईं, उन्होंने पुलिसकर्मियों को भी हैरत में डाल दिया।

शराब छुपाने का यह अंदाज आम तस्करों से बिल्कुल अलग था…

  • शर्ट के अंदर: कपड़ों की तहों में छुपाकर रखी गई महंगी शराब की बोतलें।
  • अंडरवियर के गुप्त पॉकेट: शरीर से सटाकर रखी गई छोटी बोतलें।
  • मिठाई का डिब्बा: जिसे देखकर लगे कि लड़का घर से स्वादिष्ट मिठाइयां लाया है, उसमें से भी शराब की बोतलें बरामद हुईं।
कटिहार के रहने वाले सुधांशु को पटना पुलिस ने शराब की तस्करी के आरोप में जुलाई में गिरफ्तार किया। वह घर से पढ़ाई करने राजधानी पहुंचा था।

कटिहार के रहने वाले सुधांशु को पटना पुलिस ने शराब की तस्करी के आरोप में जुलाई में गिरफ्तार किया। वह घर से पढ़ाई करने राजधानी पहुंचा था।

UP से ट्रेन से लेकर आया शराब

पकड़े जाने के बाद जब कोतवाली थाने में सख्ती से पूछताछ हुई तो सुधांशु के सारे राज खुल गए।

उसने कबूला कि एएन कॉलेज में पढ़ाई की आड़ में वह असल में ‘शराब की होम डिलीवरी’ करता रहा था। वह UP से ट्रेन के जरिए शराब की खेप लाता था और पटना जंक्शन पर उतरकर कैब ले लेता था, ताकि किसी को शक न हो। इस बार की खेप को पटना के नाला रोड इलाके में किसी ख़ास ग्राहक तक पहुंचाया जाना था।

सुधांशु इससे पहले भी तीन से चार बार UP से इसी अंदाज में ट्रेन के जरिए शराब की खेप सफलतापूर्वक पटना ला चुका था।

…तो क्या शराबबंदी के कारण अपराधी बन रहे बिहार के जेन-Z

सीधे तौर पर नहीं कह सकते, लेकिन आंकड़े इसी तरफ इशारा कर रहे हैं। इसे ऐसे समझिए…

  • राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB)- 2024 की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार 2024 में नाबालिगों (किशोरों) के अपराध के मामलों में देश में टॉप पर रहा। 2024 में 5,037 मामले सामने आए, जिसमें आरोपी किशोर थे। मतलब जेन-Z।
  • बिहार में हिंसक अपराधों की सबसे अधिक 1,07,303 घटनाएं भी दर्ज की गईं, जो 2023 के 52,165 मामलों की तुलना में 105% ज्यादा है।
  • मुजफ्फरपुर जुवेनाइल कोर्ट और नेपाल/UP सीमावर्ती जिलों की रिपोर्ट के मुताबिक, सीमावर्ती इलाकों में शराब की तस्करी कराने के लिए तस्कर बड़े पैमाने पर नाबालिगों और 18-25 वर्ष के युवाओं का इस्तेमाल कर रहे हैं।
  • GRP, RPF और आबकारी विभाग की रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रेनों या निजी वाहनों के जरिए शराब की डिलीवरी (होम डिलीवरी/कैरियर) करते पकड़े जाने वालों में 70% से अधिक 18 से 28 साल के बीच के युवा (Gen-Z) हैं।

शराब तस्करी में महिलाएं भी कम नहीं

  • द हिन्दू की रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल 2016 (शराबबंदी लागू होने) से दिसंबर 2022 तक कुल 15,831 महिलाओं को मद्य निषेध कानून के तहत गिरफ्तार किया गया था। इनमें से 98% महिलाएं शराब की तस्करी कर रही थीं।
  • वहीं, सिर्फ एक जिले पश्चिम चंपारण (बेतिया) में 2022 से अगस्त 2026 तक 836 महिलाएं शराब तस्करी के आरोप में गिरफ्तार की गई हैं। 2022 में 102, 2023 में 273, 2024 में 177, 2025 में 177 और अगस्त 2026 तक 107।
  • मद्य निषेध एवं उत्पाद विभाग और बिहार पुलिस के संयुक्त आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 10 सालों (अप्रैल 2016 से जून 2026) में 17,91,689 लोगों को शराब बेचने-पीने के आरोप में गिरफ्तार किया जा चुका है।



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