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राजस्थान हाईकोर्ट ने जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों को राहत देने और जमानत याचिकाओं में होने वाली देरी को खत्म करने के लिए एक नई व्यवस्था बनाई है। जस्टिस रवि चिरानिया की सिंगल बेंच ने आदेश दिया है कि जमानत अर्जी दाखिल होते ही सरकारी वकील का ऑफिस 3 से 7 दिन के अंदर संबंधित पुलिस स्टेशन से फैक्चुअल रिपोर्ट मंगवाएगा। इससे मामलों का जल्दी निपटारा हो सकेगा। बातचीत और नोटिस का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा एक जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि याचिका दायर होने के बाद केस डायरी मंगवाने की पुरानी प्रक्रिया में 15 से 20 दिन का समय खराब हो जाता था। इस वजह से छोटे अपराधों में बंद आरोपियों की याचिकाओं पर भी समय पर सुनवाई नहीं हो पाती थी। अतिरिक्त महाधिवक्ता दीपक चौधरी और सीनियर एडवोकेट रवि भंसाली के सुझावों पर विचार करने के बाद कोर्ट ने माना कि केस डायरी का इंतजार करने के बजाय फैक्चुअल रिपोर्ट के आधार पर सुनवाई शुरू की जा सकती है। सुप्रीम कोर्ट के फैसले का किया जिक्र हाईकोर्ट ने अपने आदेश में सुप्रीम कोर्ट के फैसले (सनी चौहान बनाम हरियाणा राज्य) का जिक्र करते हुए कहा कि व्यक्तिगत आजादी से जुड़े जमानत के मामलों को प्राथमिकता देना बहुत जरूरी है। सरकारी वकील का ऑफिस अर्जी मिलते ही 3 से 7 दिन में थानाधिकारी या जांच अधिकारी से फैक्चुअल रिपोर्ट लेगा। छोटे मामलों का फैसला फैक्चुअल रिपोर्ट से ही होगा। केस डायरी सिर्फ उन्हीं मामलों में मंगवाई जाएगी, जहां कोर्ट को गंभीर आरोपों की वजह से इसकी जरूरत महसूस होगी। पुलिस थानों को भेजे जाने वाले नोटिस और बातचीत का पूरा रिकॉर्ड रखा जाएगा।
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हाईकोर्ट ने जमानत-याचिकाओं की सुनवाई तेज करने का दिया आदेश:अब 3-7 दिन में आएगी फैक्चुअल रिपोर्ट; केस डायरी का खत्म होगा इंतजार
