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हनुमानगढ़ में मोबाइल टावर पर काम करने वाले टेक्निशियन सुधीर बिश्नोई को नौकरी से हटाने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। राजस्थान टेलीकॉम ठेका कर्मचारी मजदूर यूनियन (सीटू) ने आरोप लगाया है कि यूनियन नहीं छोड़ने के कारण सुधीर को काम से हटाया गया। यूनियन ने इसे कंपनी की ओर से यूनियन तोड़ने की कोशिश बताते हुए श्रम विभाग के अधिकारी को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। 8 सितंबर को ली चाबी, मौखिक रूप से हटाने का आरोप यूनियन के मुताबिक 8 सितंबर 2026 को कालीबंगा टावर पर सुधीर बिश्नोई से टावर की चाबी ले ली गई और उन्हें मौखिक रूप से काम से हटा दिया गया। यूनियन का दावा है कि कार्रवाई से पहले न तो उचित जांच की गई और न ही कर्मचारी को हटाने की कोई ठोस वजह बताई गई। यूनियन ने इसे गलत श्रम तरीका बताते हुए मामले में कार्रवाई की मांग की है। 10,500 रुपए वेतन, 20-25 टावरों की जिम्मेदारी यूनियन ने ठेका कर्मचारियों की कार्यस्थितियों का भी मुद्दा उठाया है। उसके अनुसार कर्मचारियों को वर्तमान में करीब 10,500 रुपए प्रतिमाह वेतन मिलता है और एक कर्मचारी को करीब 20 से 25 मोबाइल टावरों की देखभाल करनी पड़ती है। कर्मचारियों को टावरों तक आने-जाने के लिए अपनी निजी बाइक का इस्तेमाल करना पड़ता है। हर टावर के लिए 300 रुपए पेट्रोल खर्च यूनियन का आरोप है कि निजी बाइक के इस्तेमाल के बावजूद कर्मचारी को प्रत्येक टावर के लिए सिर्फ 300 रुपए प्रतिमाह पेट्रोल खर्च दिया जाता है। बाइक के रखरखाव का खर्च भी कर्मचारियों को ही उठाना पड़ता है। यूनियन ने पेट्रोल भत्ते को बढ़ाकर 1,500 रुपए प्रति टावर करने की मांग की है। वेतन बढ़ाने और बहाली की मांग ज्ञापन में यूनियन ने कंपनी के बड़े अधिकारियों से बातचीत कर ठेका कर्मचारियों का वेतन बढ़ाने की मांग की है। इसके साथ ही सुधीर बिश्नोई को तुरंत वापस काम पर लेने और कर्मचारियों के पेट्रोल खर्च में बढ़ोतरी करने की मांग रखी गई है। मांगें नहीं मानीं तो काम बंद करने की चेतावनी यूनियन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई तो बीकानेर संभाग में काम बंद किया जाएगा। यूनियन ने कहा है कि ऐसी स्थिति पैदा होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी कंपनी अधिकारियों की होगी।
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टेक्निशियन को हटाने पर ठेका कर्मचारियों का विरोध:यूनियन तोड़ने का आरोप, वेतन और पेट्रोल खर्च बढ़ाने की मांग
