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लुधियाना के आत्मा पार्क के बाहर ब्लड डोनेशन कैंप पर गैंगवार के दौरान हमले की साजिश में पुलिस मुठभेड़ में मारे गए दोनों शूटरों की पहचान को लेकर जांच में नया खुलासा हुआ है। लुधियाना पुलिस की जांच में सामने आया है कि दोनों आरोपी जालंधर पुलिस के जून 2026 के फायरिंग केस में वांटेड थे। यह केस 20 जून 2026 को थाना डिवीजन नंबर-5 जालंधर में दर्ज हुआ था। मुठभेड़ के बाद पुलिस ने दोनों मृतकों की पहचान के लिए उनकी तस्वीरें पंजाब पुलिस के Punjab Artificial Intelligence System (PAIS) में अपलोड की थीं। AI आधारित फेस रिकग्निशन सिस्टम ने एक मृतक की पहचान करनजोत सिंह उर्फ नोनू के रूप में की, जबकि दूसरे की पहचान अमृतसर के सुल्तानविंड निवासी संदीप के तौर पर हुई। बाद में पुलिस को पता चला कि संदीप जमानत पर बाहर है और जिंदा है। इसके बाद दूसरे मृतक की पहचान को लेकर दोबारा जांच शुरू की गई। चेहरे की समानता के कारण हुई थी पहचान में गलती
पुलिस जांच में सामने आया कि मृतक आरोपी का असली नाम गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी (18) है, जो जालंधर के ढीना गांव का रहने वाला था। पुलिस के अनुसार गुरप्रीत का चेहरा अमृतसर के संदीप से काफी मिलता-जुलता था। इसी वजह से PAIS ने उसे संदीप के तौर पर पहचान लिया। गलती सामने आने के बाद पुलिस टीम ने अमृतसर जाकर संदीप का फिजिकल वेरिफिकेशन भी किया। पुलिस के मुताबिक संदीप भी पहले आपराधिक मामले में जेल जा चुका है और फिलहाल जमानत पर है, लेकिन फिलहाल ब्लड कैंप पर प्रस्तावित सामूहिक गोलीकांड की साजिश से उसका कोई सीधा संबंध सामने नहीं आया है। जालंधर के फायरिंग केस में दोनों थे आरोपी
पुलिस के अनुसार गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी और मुठभेड़ में मारे गए दूसरे शूटर करनजोत सिंह के खिलाफ 20 जून 2026 को जालंधर के डिवीजन नंबर-5 थाने में फायरिंग का केस दर्ज हुआ था। दोनों इस मामले में पुलिस को वांछित थे। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मुठभेड़ से पहले उनके पास इनपुट था कि बाइक पर सवार दो शूटर आत्मा पार्क में आयोजित ब्लड डोनेशन कैंप में पहुंचकर विरोधी गैंग के सदस्यों को निशाना बनाने वाले हैं। दोनों को विदेशी गैंगस्टरों डोनी बल और शगनप्रीत के निर्देश पर हमला करने की जिम्मेदारी मिलने की बात सामने आई थी। हालांकि, उस समय पुलिस के पास दोनों की वास्तविक पहचान की स्पष्ट जानकारी नहीं थी। शगनप्रीत ने दी थी टारगेट की जानकारी, डोनी बल ने हथियार पहुंचाए
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, विदेश में बैठे गैंगस्टर शगनप्रीत जो दिवंगत पंजाबी गायक सिद्धू मूसेवाला का पूर्व मैनेजर रह चुका है। उसने शूटरों को ब्लड डोनेशन कैंप में मौजूद विरोधी गैंग के कुछ सदस्यों को निशाना बनाने का टास्क दिया था। वहीं, पुलिस को शक है कि डोनी बल ने शूटरों तक अत्याधुनिक आटोमैटिक हथियार पहुंचाने की व्यवस्था की थी। मुठभेड़ के बाद बरामद हथियारों में से एक पाकिस्तान निर्मित बताया जा रहा है। पुलिस को संदेह है कि इस हथियार की तस्करी पाकिस्तान की तरफ से अमृतसर के सीमावर्ती इलाके तक करवाई गई और इसके बाद इसे शूटरों तक पहुंचाया गया। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में जुटी है कि हथियार सीमा पार से पंजाब तक कैसे पहुंचा, किसने इसे शूटरों तक पहुंचाया और ब्लड कैंप में किन लोगों को निशाना बनाने की योजना थी।
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लुधियाना में दोनों गैंगस्टरों के एनकाउंटर केस में खुलासा:जालंधर के फायरिंग केस में थे वांटेड,PAIS में मृतक के चेहरे की समानता से हुई पहचान में गलती
