Walking Speed Health Indicator; Slow Walking Health Signals


1 घंटे पहलेलेखक: अदिति ओझा

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चलने की स्पीड सिर्फ एक आदत नहीं है। ये हमारी सेहत का आईना भी है। हम अक्सर इस पर ध्यान नहीं देते, लेकिन डॉक्टर इसे ‘हेल्थ सिग्नल’ के रूप में देखते हैं। एक्सपर्ट्स के मुताबिक, चलने की गति हमारे दिल, दिमाग, फेफड़ों, मांसपेशियों और उम्र बढ़ने की रफ्तार तक के बारे में संकेत देती है।

जनवरी 2020, में ‘साइंस डायरेक्ट’ में पब्लिश एक स्टडी में स्लो वॉकिंग को कॉग्निटिव डिक्लाइन और डिमेंशिया के शुरुआती संकेतों से जोड़कर देखा गया है।

वहीं हाल की ‘एपल हियरिंग स्टडी’ में पाया गया कि हियरिंग लॉस वाले लोगों की वॉकिंग स्पीड अपेक्षाकृत धीमी थी। यह अंतर खासतौर पर 60 साल से अधिक उम्र के लोगों में ज्यादा देखने को मिला। यानी चलने की रफ्तार सिर्फ चाल-ढाल नहीं बताती, बल्कि यह ओवरऑल हेल्थ और फिटनेस का इंडिकेटर भी है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में वॉकिंग स्पीड के हेल्थ साइंस को विस्तार से समझेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • वॉकिंग स्पीड हेल्थ के बारे में क्या संकेत देती है?
  • रोज कितनी देर और कितनी स्पीड में चलना फायदेमंद है?

एक्सपर्ट: डॉ. अक्षय चुघ, कंसल्टेंट, इंटरनल मेडिसिन, मेट्रो हॉस्पिटल्स एंड हार्ट इंस्टीट्यूट, नोएडा

सवाल- साइंस कहता है कि किसी की चलने की गति से उसकी सेहत का पता चलता है। इसका क्या अर्थ है?

जवाब- साइंस ‘चलने की गति’ को एक क्लिनिकल बायोमार्कर मानता है। यानी ऐसा संकेत, जो पूरे शरीर की कार्यक्षमता और भविष्य के हेल्थ रिस्क का अंदाजा देता है। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • चलना एक ऐसा काम है, जिसमें शरीर के कई अहम सिस्टम जैसे हार्ट, लंग्स, मसल्स और ब्रेन एक साथ मिलकर काम करते हैं।
  • अगर कोई व्यक्ति तेज, संतुलित और बिना रुके चलता है तो यह अच्छी कार्डियोवस्कुलर फिटनेस, मजबूत मसल्स और बेहतर ब्रेन कोऑर्डिनेशन का संकेत है।

सवाल- डॉक्टर वॉकिंग स्पीड को ‘6th वाइटल साइन’ क्यों कहते हैं?

जवाब- वॉकिंग स्पीड बिना किसी महंगे टेस्ट के व्यक्ति की ओवरऑल हेल्थ का अंदाजा देती है। यह सीधे तौर पर फंक्शनल स्टेटस को दर्शाती है। यानी व्यक्ति अपनी रोजमर्रा की एक्टिविटीज कितनी आसानी से कर पा रहा है, जैसेकि-

  • बिना किसी सहारे के चल पाना।
  • सीढ़ियां चढ़ना, नहाना, कपड़े पहनना जैसे काम खुद कर पाना।
  • थकान, दर्द या सांस फूलने से एक्टिविटी पर कितना असर पड़ रहा है।

अगर शरीर में अंदरूनी गड़बड़ी होती है तो उसका असर सबसे पहले चलने के तरीके पर दिखता है, जैसेकि-

  • चलने की गति स्लो होना।
  • शरीर का संतुलन बिगड़ना।
  • जल्दी थक जाना।

इसलिए वॉकिंग स्पीड को शुरुआती चेतावनी संकेत माना जाता है।

सवाल- एक स्वस्थ व्यक्ति की वॉकिंग स्पीड औसतन कितनी होनी चाहिए?

जवाब- साल 2020 में ‘रिसर्च गेट’ में पब्लिश एक स्टडी के मुताबिक, चलने की गति का संबंध उम्र और जेंडर से होता है। पुरुष आमतौर पर महिलाओं की तुलना में थोड़ा तेज चलते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • 30 साल से कम उम्र: औसतन 3 मील प्रति घंटा (1 मील यानी लगभग 1.6 किलोमीटर)।
  • 30-49 साल: औसतन 2.8 मील प्रति घंटा।
  • 50-59 साल: औसतन 2.75 मील प्रति घंटा।
  • 60 साल से ऊपर: लगभग 2.7 मील प्रति घंटा।
  • 65 साल के बाद: करीब 2.1 mph मील प्रति घंटा।

उम्र बढ़ने के साथ वॉकिंग स्पीड धीरे-धीरे कम होती है।

सवाल- अलग-अलग वॉकिंग स्पीड से हेल्थ के बारे में क्या पता चलता है?

जवाब- इससे ओवरऑल फिटनेस के बारे में काफी कुछ समझा जा सकता है।

1. तेज चाल

  • यह अच्छी हार्ट हेल्थ, मजबूत मसल्स और बेहतर स्टैमिना का संकेत है।
  • ऐसे लोगों में फिटनेस लेवल आमतौर पर अच्छा होता है।

2. मीडियम चाल

  • यह सामान्य और बैंलेस्ड हेल्थ को दर्शाती है।
  • बेसिक फिटनेस ठीक है, लेकिन सुधार की गुंजाइश है।

3. धीमी चाल

  • यह कमजोर मसल्स, कम स्टैमिना या थकान का संकेत है।
  • कई बार यह खराब डाइजेशन या लो एनर्जी से भी जुड़ी होती है।

4. उम्र के हिसाब से कम स्पीड

अगर व्यक्ति उम्र के औसत से धीमा चलता है तो यह हार्ट, लंग्स या नर्वस सिस्टम की कमजोरी का इशारा है।

5. बहुत स्लो स्पीड

बहुत धीमी वॉकिंग स्पीड ज्यादा कमजोरी या फ्यूचर में बीमारियों का संकेत है।

सवाल- वॉकिंग स्पीड का हमारी हियरिंग कैपेसिटी से क्या कनेक्शन है?

जवाब- कान सिर्फ सुनने का काम नहीं करते। ये शरीर के बैलेंसिंग सिस्टम को भी कंट्रोल करने में मदद करते हैं।

  • सुनने की क्षमता कम होने पर बैलेंस और बॉडी कोऑर्डिनेशन प्रभावित होता है। इससे व्यक्ति की चाल धीमी पड़ने लगती है।
  • हाल ही में ‘एपल हियरिंग स्टडी’ में सामने आया कि जिन लोगों में हियरिंग लॉस ज्यादा था, उनकी वॉकिंग स्पीड अपेक्षाकृत धीमी थी।
  • इस स्टडी में 57 हजार से ज्यादा आईफोन यूजर्स के डेटा काे एनालाइज किया गया।
  • रिसर्च के मुताबिक, हियरिंग लॉस होने पर दिमाग को आवाजें समझने में ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। इससे चलने के दौरान फोकस और स्पीड दोनों प्रभावित होते हैं।

सवाल- चलने की गति धीमी होना किन शुरुआती बीमारियों का संकेत हो सकता है?

जवाब- अगर बिना किसी स्पष्ट कारण के चलने की गति धीमी होने लगे, तो यह शरीर में छिपी कई बीमारियों का शुरुआती संकेत हो सकता है। ग्राफिक में देखिए-

सवाल- रोज कितनी देर और कितनी स्पीड से चलना फायदेमंद है?

जवाब- डॉ. अक्षय चुघ के मुताबिक, रोज कम-से-कम 30 मिनट वॉक करना फायदेमंद माना जाता है। अगर एक साथ संभव न हो तो इसे 10-10 मिनट के 3 हिस्सों में भी कर सकते हैं।

  • हेल्दी रहने के लिए मॉडरेट स्पीड (लगभग 4-5 किमी/घंटा) रखें। यानी इतनी तेज चाल हो कि बात तो कर सकें, लेकिन गाना न गा पाएं।
  • फिटनेस के लिए हफ्ते में 5 दिन ब्रिस्क वॉक (तेज चाल) करें। इससे हार्ट और लंग्स मजबूत होते हैं।
  • पहले धीरे चलें, फिर धीरे-धीरे समय और स्पीड बढ़ाएं, ताकि शरीर पर ज्यादा दबाव न पड़े।
  • बुजुर्ग या किसी बीमारी से पीड़ित लोग अपनी क्षमता के अनुसार कम समय और धीमी स्पीड से शुरुआत कर सकते हैं।

सवाल- वॉकिंग स्पीड कैसे बढ़ाएं?

जवाब- वॉकिंग स्पीड बढ़ाने के लिए सिर्फ ज्यादा चलना काफी नहीं, बल्कि शरीर के स्ट्रेंथ, बैलेंस और स्टैमिना पर एक साथ काम करना जरूरी है। ग्राफिक में वॉकिंग स्पीड बढ़ाने के टिप्स देखिए-

इन पॉइंट्स को थोड़ा विस्तार से समझिए-

स्ट्रेंथ ट्रेनिंग

  • पैरों (थाई, कैल्फ) और कोर मसल्स को मजबूती मिलती है।
  • इससे स्टेप्स ज्यादा पावरफुल होते हैं और स्पीड बढ़ती है।

बैलेंस एक्सरसाइज

  • बेहतर बैलेंस से गिरने का डर कम होता है।
  • चाल ज्यादा स्थिर व तेज हो जाती है।

कार्डियो वर्कआउट

ब्रिस्क वॉक, साइकिलिंग और जॉगिंग जैसे कार्डियो वर्कआउट हार्ट और लंग्स की क्षमता बढ़ाते हैं। इससे चलने की स्पीड सुधरती है।

इंटरवल वॉकिंग

  • कुछ मिनट तेज और कुछ मिनट सामान्य गति से चलें।
  • इससे स्टैमिना और स्पीड दोनों बढ़ते हैं।

स्ट्रेचिंग

  • स्ट्रेचिंग से मसल्स लचीली होती हैं।
  • इससे कदमों की रेंज बढ़ती है और चाल स्मूद होती है।

सवाल- वॉकिंग स्पीड स्लो होने के साथ और कौन से लक्षण दिखें तो डॉक्टर के पास जाना चाहिए?

जवाब- अगर वॉकिंग स्पीड अचानक स्लो हो जाए या इसके साथ कुछ खास लक्षण दिखें तो यह किसी गंभीर हेल्थ प्रॉब्लम का संकेत हो सकता है। ग्राफिक में ऐसे लक्षण देखिए-

सवाल- हेल्दी रहने के लिए वॉक करना क्यों जरूरी है?

जवाब- वॉकिंग एक सिंपल, लेकिन असरदार एक्सरसाइज है। इसमें किसी मशीन या उपकरण की जरूरत नहीं। बस पैदल चलना है और शरीर एकदम फिट रहेगा। ग्राफिक में वॉकिंग के फायदे देखिए-

सवाल- क्या फिटनेस के लिए सिर्फ वॉक करना काफी है?

जवाब- वॉकिंग बेसिक फिटनेस देती है, लेकिन ओवरऑल फिटनेस के लिए कुछ और बातों का ध्यान रखें-

  • मसल्स और हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए हफ्ते में 2-3 दिन स्ट्रेंथ एक्सरसाइज करें।
  • यह शरीर को लचीला बनाए रखने और चोट से बचाने के लिए जरूरी है।
  • खासकर बढ़ती उम्र में गिरने का जोखिम कम करने के लिए यह जरूरी है।
  • कभी-कभी जॉगिंग, साइकिलिंग या स्विमिंग भी शामिल करें, ताकि फिटनेस लेवल बेहतर हो।

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ग्राफिक- अंकुर बंसल

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