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Menopause Weight Training; Estrogen Hormone Problems


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10 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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50 की उम्र तक आते–आते महिलाओं को लगता है कि शरीर पहले की तरह उनका साथ नहीं दे रहा। सीढ़ियां चढ़ते समय जल्दी थकान होना, वजन बढ़ना, ताकत कम होना और जोड़ों में दर्द जैसी समस्याएं कॉमन हो जाती हैं।

दरअसल, मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल घटने लगता है। इससे मांसपेशियां और हड्डियां कमजोर हो जाती हैं। साथ ही वजन बढ़ने, नींद खराब होने और मूड स्विंग्स जैसी परेशानियों का रिस्क भी बढ़ जाता है।

साल 2024, में ‘नेशनल लाइब्रेरी ऑफ मेडिसिन’ में पब्लिश एक स्टडी में पाया गया कि मेनोपॉज के बाद सिर्फ प्रोटीन लेना पर्याप्त नहीं है। मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने के लिए वेट ट्रेनिंग जरूरी है।

वहीं ‘साइंस डायरेक्ट’ में पब्लिश एक अन्य स्टडी के मुताबिक, रेजिस्टेंस ट्रेनिंग से हॉट फ्लैशेज की गंभीरता और उसकी फ्रीक्वेंसी कम होती है। साथ ही नींद और मूड भी बेहतर होते हैं।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर’ में मेनोपॉज के बाद महिलाओं की सेहत में वेट ट्रेनिंग की भूमिका पर बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • वेट ट्रेनिंग मसल लॉस को रोकने में कैसे मदद करती है?
  • महिलाओं के लिए कौन-सी वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज फायदेमंद है?

एक्सपर्ट- डॉ. मितुल गुप्ता, सीनियर कंसल्टेंट, आब्सटेट्रिक्स एंड गायनेकोलॉजी, कोकून हॉस्पिटल, जयपुर

सवाल- मेनोपॉज क्या है?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का एक नेचुरल प्रोसेस है। यह तब होता है, जब पीरियड्स हमेशा के लिए बंद हो जाते हैं।
  • आमतौर पर यह 45 से 55 साल की उम्र के बीच होता है।
  • अगर किसी महिला को लगातार 12 महीनों तक पीरियड्स नहीं आते हैं, तो उसे मेनोपॉज माना जाता है।
  • इस दौरान महिला का शरीर कई गंभीर बदलावों और उतार-चढ़ावों से गुजरता है।

सवाल- मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में क्या बदलाव आते हैं?

जवाब- मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है। इससे कई तरह के शारीरिक बदलाव और कुछ समस्याएं हो सकती हैं, जैसेकि-

  • हड्डियां कमजोर होना।
  • मसल्स स्ट्रेंथ कम होना।
  • पेट और कमर के आसपास चर्बी बढ़ना।
  • स्किन पतली और ड्राई होना।
  • जोड़ों में दर्द।
  • रात में ज्यादा पसीना।
  • नींद से जुड़ी परेशानी।
  • थकान और मूड स्विंग।
  • हॉट फ्लैशेज।

ये बदलाव हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं में लक्षण हल्के होते हैं, जबकि कुछ में ज्यादा नजर आते हैं।

सवाल- वेट ट्रेनिंग क्या होती है?

जवाब- यह एक तरह की एक्सरसाइज है, जिसमें मसल्स को मजबूत बनाने के लिए वजन या किसी तरह के रेजिस्टेंस का इस्तेमाल किया जाता है। इसमें डंबल, बारबेल, केटलबेल या रेजिस्टेंस बैंड जैसे उपकरणों का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सवाल- मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए वेट ट्रेनिंग की जरूरत क्यों बढ़ जाती है?

जवाब- मेनोपॉज के बाद शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है। इसकी वजह से-

  • मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं।
  • हड्डियों की डेंसिटी घटने लगती है।
  • वजन बढ़ने का रिस्क बढ़ जाता है।
  • ऐसे में वेट ट्रेनिंग महिलाओं को इन समस्याओं से निपटने में मदद करती है।

सवाल- वेट ट्रेनिंग करने से क्या होता है?

जवाब- इसमें डंबल, मशीन, रेजिस्टेंस बैंड या शरीर के वजन का इस्तेमाल करके मसल्स को ट्रेन किया जाता है। इससे शरीर धीरे-धीरे मजबूत और ज्यादा एफिशिएंट बनता है। इससे-

  • मांसपेशियों की ताकत बढ़ती है।
  • हड्डियां मजबूत होती हैं।
  • बोन डेंसिटी बेहतर होती है।
  • शरीर का संतुलन और फ्लैक्सिबिलिटी बेहतर होती है।
  • रोजमर्रा के कामों में आसानी होती है।
  • एनर्जी लेवल बेहतर होता है।
  • कैलोरी बर्न होती है।
  • स्ट्रेस कम करने और मूड बेहतर रखने में भी मदद मिलती है।

सवाल- मेनोपॉज के बाद मसल्स लॉस को रोकने में वेट ट्रेनिंग कैसे मदद करती है?

जवाब- जब मसल्स पर वजन का प्रेशर पड़ता है, तो शरीर उन्हें मजबूत बनाने के लिए नए मसल टिश्यू तैयार करता है। इससे उम्र के साथ होने वाल मसल्स लॉस का रिस्क घटता है।

  • वेट ट्रेनिंग से मसल्स की इंसुलिन सेंसिटिविटी बेहतर होती है। इससे मसल्स ग्लूकोज का ज्यादा इस्तेमाल कर पाती हैं और शरीर एनर्जेटिक रहता है।
  • वेट ट्रेनिंग से मसल्स रिपेयर और ग्रोथ से जुड़े हार्मोन एक्टिव होते हैं। इससे मसल्स की मजबूती और ग्रोथ में मदद मिलती है।

सवाल- वेट ट्रेनिंग का वेट मैनेजमेंट से क्या कनेक्शन है?

जवाब- मेनोपॉज के बाद मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता है। इससे बॉडी फैट खासकर पेट के आसपास जमा होने लगता है। वेट ट्रेनिंग इस बदलाव को मैनेज करने में मदद करती है। इससे वेट कंट्रोल करने में भी मदद मिलती है।

सवाल- क्या वेट ट्रेनिंग डायबिटीज और हार्ट डिजीज के रिस्क को कम करती है?

जवाब- हां, रेगुलर वेट ट्रेनिंग डायबिटीज और हार्ट डिजीज का रिस्क कम करती है।

  • यह ब्लड शुगर को कंट्रोल करने में मदद करती है।
  • इससे इंसुलिन सेंसिटिविटी बढ़ती है और टाइप-2 डायबिटीज का रिस्क कम होता है।
  • वेट ट्रेनिंग LDL (बैड कोलेस्ट्रॉल) और ट्राइग्लिसराइड्स को कंट्रोल करने और HDL (गुड कोलेस्ट्रॉल) को बढ़ाने में भी मदद करती है।
  • नियमित वेट ट्रेनिंग ब्लड वेसल्स की फंक्शनिंग भी इम्प्रूव करती है। इससे ब्लड फ्लो बेहतर होता है।
  • साथ ही क्रॉनिक इंफ्लेमेशन को कम करने में भी मदद मिलती है। जिससे डायबिटीज और हार्ट डिजीज का रिस्क घटता है।

सवाल- क्या वेट ट्रेनिंग का असर मेंटल हेल्थ पर भी पड़ता है?

जवाब- हां, साल 2018 में ‘जामा साइकिएट्री’ में 33 क्लिनिकल ट्रायल्स का एक मेटा-एनालिसिस पब्लिश हुआ। इसमें पाया गया कि रेगुरल वेट ट्रेनिंग डिप्रेशन के लक्षणों को कम करने में मदद करती है।

  • मेनोपॉज के दौरान हार्मोनल बदलावों की वजह से कई महिलाओं को स्ट्रेस, एंग्जाइटी, मूड स्विंग्स और नींद की समस्या का सामना करना पड़ता है। वेट ट्रेनिंग इन प्रॉब्लम्स को मैनेज करने में मदद करती है।
  • एक्सरसाइज के दौरान ब्रेन एंडोर्फिन जैसे ‘फील-गुड’ केमिकल्स रिलीज करता है, जिससे मूड बेहतर होता है।

सवाल- वेट ट्रेनिंग की शुरुआत कैसे करें?

जवाब- इसके लिए कुछ बातों का खास ख्याल रखें-

  • हल्के वजन या बॉडी-वेट एक्सरसाइज से शुरूआत करें।
  • पहले सही पोस्चर और तकनीक सीखें, फिर धीरे-धीरे वजन बढ़ाएं।
  • सप्ताह में 2-3 दिन वेट ट्रेनिंग करना बेहतर है।
  • वर्कआउट के बीच शरीर को रिकवरी का समय दें।
  • पर्याप्त प्रोटीन, बैलेंस्ड डाइट और अच्छी नींद जरूरी है।
  • अगर कोई हेल्थ कंडीशन है तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।

सवाल- मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए कौन-सी वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज ज्यादा फायदेमंद होती है?

जवाब- मसल्स और हड्डियों के लिए जरूरी सभी वेट ट्रेनिंग एक्सरसाइज की लिस्ट ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या घर पर भी वेट ट्रेनिंग की जा सकती है?

जवाब- हां, इसके लिए जिम जाना जरूरी नहीं है। आप अपनी क्षमता के अनुसार घर पर इन चीजों का इस्तेमाल कर सकती हैं-

  • डंबल
  • रेजिस्टेंस बैंड
  • बॉडी-वेट एक्सरसाइज, जैसे स्क्वैट्स और लंजेज

सवाल- महिलाओं को हफ्ते में कितनी बार और कितनी देर वेट ट्रेनिंग करनी चाहिए?

जवाब- डॉ. मितुल गुप्ता के मुताबिक, मेनोपॉज के बाद महिलाओं के लिए हफ्ते में 2-3 बार वेट ट्रेनिंग करना पर्याप्त है। हर सेशन 30-60 मिनट का रखा जा सकता है।

सवाल- वेट ट्रेनिंग के साथ डाइट में क्या बदलाव जरूरी हैं?

जवाब- मसल्स रिपेयर और मजबूती के लिए वेट ट्रेनिंग के साथ सही पोषण भी जरूरी है। इसलिए मेनोपॉज के बाद महिलाओं को संतुलित डाइट लेनी चाहिए। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- किन महिलाओं को वेट ट्रेनिंग करते समय विशेष सावधानी बरतनी चाहिए?

जवाब- वेट ट्रेनिंग ज्यादातर महिलाओं के लिए सेफ है, लेकिन कुछ स्थितियों में ज्यादा सावधानी की जरूरत होती है। ग्राफिक में सभी कंडीशंस देखिए-

ऐसे मामलों में एक्सरसाइज शुरू करने से पहले डॉक्टर या प्रशिक्षित फिटनेस एक्सपर्ट की सलाह लेना बेहतर होता है।

सवाल- कौन-से संकेत दिखने पर वेट ट्रेनिंग तुरंत रोक देनी चाहिए और डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

जवाब- वेट ट्रेनिंग के दौरान हल्की थकान या मसल्स में खिंचाव सामान्य है। लेकिन कुछ लक्षण गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। इसे ग्राफिक में देखिए-

सवाल- क्या 50 या 60 साल की उम्र में भी पहली बार वेट ट्रेनिंग शुरू की जा सकती है?

जवाब- हां, मांसपेशियां और हड्डियां किसी भी उम्र में एक्सरसाइज के प्रति पॉजिटिव रिस्पॉन्स देती हैं। शुरुआत हमेशा हल्के वजन, रेजिस्टेंस बैंड या बॉडी-वेट एक्सरसाइज से करनी चाहिए।

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ग्राफिक- महेंद्र वर्मा

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