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मोतिहारी में सरकारी टीचर की पीट-पीटकर हत्या:पत्नी बोली-जान के बदले जान चाहिए, एक साल से मिट्टी कटाई को लेकर पूर्व प्रमुख से चल रहा था विवाद




मोतिहारी में गुरुवार की देर रात 9.30 बजे एक सरकारी टीचर का शव बरामद किया गया है। शिक्षक 5 घंटे से लापता थे, जिसके बाद उसकी बॉडी बंजरिया थाना क्षेत्र में जंगल से बरामद की गई है। मृतक की पहचान सिसवा सहवाद टोला निवासी समसाद आलम (45) के रूप में हुई है। वे सिसवा उर्दू स्कूल उर्दू स्कूल में शिक्षक थे। मृतक का पैर टूटा, साथ ही शरीर पर कई जगहों पर जख्म के निशान भी मिले हैं। उनके कान से खून भी निकल रहा था। घटना के बाद गुस्साए ग्रामीणों ने रात करीब 11 बजे तक सदर अस्पताल के गेट के सामने शव रखकर सड़क जाम कर दिया। घटना की जानकारी मिलने पर SDO अरुण कुमार, डीएसपी दिलीप पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। एसडीओ ने खुद से शव को सड़क से उठाकर स्ट्रेचर से ले जाकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा। साथ ही परिजन को समझा-बुझाकर जाम खुलवाया है। मृतक के पिता मो. रफीस ने बंजरिया प्रखंड के पूर्व प्रमुख चमन और उसके समर्थकों पर बेटे को रास्ते से उठाकर मारपीट करने और हत्या करने का आरोप लगाया है। मामला बंजरिया थाना क्षेत्र के सिसवा पूर्वी का है। वहीं, पत्नी रिजवाना का कहना है मुझे पति के मौत के बदले मौत चाहिए। अगर पुलिस कुछ नहीं करेगी, तो मैं खुद आरोपियों की हत्या कर जेल चली जाऊंगी। उसे (आरोपियों) जमीन से मतलब है तो वो लोग जमीन ले ले… घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए… अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी घटना… मिट्टी कटाई को लेकर चल रहा था विवाद मृतक के पिता मो. रफीस के मुताबिक, समसाद आलम का पूर्व प्रमुख चमन से मिट्टी कटाई को लेकर एक साल से विवाद चल रहा था। जब चमन प्रमुख था, तब उसने हमारे खेत से मिट्टी कटाई की थी। इसे लेकर समसाद ने यहां के अधिकारियों और पुलिस को इसकी शिकायत की थी। इसके बाद से चमन और उनके समर्थकों का समसाद से नाराजगी था। मेरे बेटे से लगातार धमकी दे रहा था। वो लोग बेटे के स्कूल में घुसकर धमकी दे रहे थे कि अगर तुम कहीं भी दिखे तो तुम्हें गोली मार देंगे। आज उनलोगों ने मेरे बेटे की हत्या कर दी। गुरुवार की सुबह 9 बजे समसाद घर से स्कूल के लिए निकला था। वो पिछले 3 दिनों से स्कूल में परीक्षा ड्यूटी पर था। दोपहर 3 बजे वो ड्यूटी से लौट रहा था, रास्ते में चमन और उसके समर्थकों ने उसे घेर लिया। उसको जबरन अपने साथ उठाकर सिसवा पूर्वी पंचायत भवन ले गया। वहां उसकी खूब पिटाई की। इसके बाद उसे अधमरा हालत में जंगल में छोड़कर सब भाग गया। इस घटना की जानकारी आस-पास के लोगों ने पुलिस को दी। जिसके बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल समसाद को इलाज के लिए पहले बंजरिया सीएचसी लेकर पहुंची, वहां उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टर ने सदर अस्पताल रेफर कर दिया। जिसके बाद पुलिस जब घायल को सदर अस्पताल लेकर पहुंची तो वहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। ‘बेटा घर नहीं पहुंचा तो शाम 4:30 बजे थाने पहुंचे’ मृतक के पिता मो.रफीस ने आगे बताया, जब समसाद शाम 4.30 बजे तक घर नहीं लौटा तो हमलोगों ने उसके नंबर पर फोन किया था। पहले तो फोन लगा लेकिन किसी ने उठाया नहीं, आधे घंटे बाद फोन लगना भी बंद हो गया। 5 बजे तक वो घर नहीं पहुंचा तो हमलोगों ने बंजरिया थाने में पहुंचकर घटना की जानकारी दी। मैंने पुलिस को बताया कि मेरा बेटा नहीं मिल रहा है। वो सुबह स्कूल गया था, घर लौटते समय लापता हो गया है। आपलोग उसकी तलाश कीजिए। हालांकि, पुलिस ने मेरी बात को गंभीरता से नहीं लिया। उनलोगों ने मेरे बेटे की तलाश नहीं की। उल्टा थानाध्यक्ष ने मुझसे कहा- अगर आपके बेटे के लापता होने की बात झूठी निकली तो मैं आपके खिलाफ कार्रवाई करूंगा। मैं बार-बार थानाध्यक्ष को बेटे की तलाश के लिए गुहार लगा रहा था, लेकिन उनलोगों ने कोई कार्रवाई नहीं की। अगर पुलिस समय पर कार्रवाई करती तो शायद मेरा बेटा आज जिंदा होता। ‘कुछ घंटे बाद थाना से फोन आया, सदर अस्पताल में है समसाद’ मो.रफीस के मुताबिक, थाने में शिकायत करने के करीब 3-4 घंटे बाद बंजरिया थाना से मुझे फोन आया। उन्होंने कहा, समसाद सदर अस्पताल में है। उन्होंने हमें मौत की सूचना नहीं दी। जब तक हमलोग आनन-फानन में सदर अस्पताल पहुंचे, वहां देखा समसाद का शव पड़ा है। इस दौरान वहां पर कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं थी। अगर पुलिस ने जहां से भी समसाद को उठाकर अस्पताल लाया, हमें तुरंत क्यों नहीं जानकार दी? मौके पर पुलिस क्यों नहीं मौजूद थी? मिट्टी कटाई के विवाद को लेकर भी हमने पहले भी अधिकारियों के यहां शिकायत की थी। इसके बावजूद विवाद का समाधान नहीं हुआ और धमकियां मिलती रहीं। पुराने विवाद के कारण ही समसाद को निशाना बनाया गया है। मेरा इकलौता बेटा था, हमारी उम्र 85 वर्ष हो गया है, हम बीमार रहते है, उसी के कमाए पैसे से ही घर चलता था, अब हमारा कौन घर चलाएगा? मैं मांग करता हूं कि पूर्व प्रमुख चमन और उसके समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। 50 लोगों ने मेरे मामा को हत्या की दी थी धमकी वहीं, मृतक की पत्नी रिजवाना के मुताबिक, इस घटना में चमन, निजामुद्दीन, साबिर, जेड अहमद समेत कई लोग शामिल थे। नूरुद्दीन के हिस्से के लोगों और हामिद हुसैन के बेटे वासी आमिर समेत अन्य लोगों ने भी मिलकर मेरे पति के साथ मारपीट की है। उन्होंने बताया, विवाद की शुरुआत साल 2025 में हुई थी। 3 जून 2025 को आरोपियों ने हमारे खेत में JCB के जरिए मिट्टी की कटाई कराई गई थी। इसको लेकर हमने शिकायत की थी और न्यूज के माध्यम से भी मामला सामने आया था। इसके बाद जब हमारे मामा खेत देखने गए थे तो वहां आरोपियों ने उन्हें धमकाया था। करीब 50 लोगों को बुलाकर मेरे मामा को घेर लिया गया और कहा गया कि यहां से जल्दी चले जाइए, नहीं तो लाश भेज देंगे। इसके बाद मेरे मामा वहां से भागकर अपनी जान बचाकर आए थे। रिजवाना का आरोप है कि घटना के बाद जेसीबी से मिट्टी कटाई के निशान और अन्य सबूत मिटाने की कोशिश की गई। इस मामले को लेकर हमने एसपी कार्यालय में फोन करने के साथ आवेदन भी दिया था, लेकिन कई बार शिकायत करने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। आरोपियों के खिलाफ स्पीडी ट्रायल कर सजा दी जाए वहीं, पूर्व कानून मंत्री डॉ.समीम अहमद भी इस घटना के बाद सदर अस्पताल पहुंचे। उन्होंने भास्कर से बातचीत में कहा, शिक्षक की हत्या की घटना की जितनी निंदा की जाए, कम है। जिस तरह से इस घटना को अंजाम दिया गया है, वह बेहद गंभीर और दुस्साहसपूर्ण है। जो भी इस घटना में दोषी है, उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाना चाहिए। प्रशासन जल्द से जल्द आरोपियों को गिरफ्तार करे और मामले का स्पीडी ट्रायल कराकर दोषियों को सजा दिलाई जाए। जैसे ही मुझे जानकारी मिली कि शिक्षक का अपहरण हुआ है, मैंने एसपी और एसडीपीओ से बात की। कुछ देर बाद जानकारी मिली कि शिक्षक को बरामद कर लिया गया है। हालांकि, उनकी बरामदगी किस जगह और किन परिस्थितियों में हुई, इसकी पूरी जानकारी मुझे नहीं है। सदर अस्पताल के गेट पर शव रखकर सड़क जाम शिक्षक का शव मिलने के बाद परिजन और स्थानीय लोग सदर अस्पताल के गेट के सामने जुट गए। आक्रोशित लोगों ने शव को सड़क पर रखकर जाम कर दिया। परिजन आरोपियों की गिरफ्तारी, मामले की निष्पक्ष जांच और पुलिस की भूमिका की जांच की मांग कर रहे हैं। सड़क जाम की सूचना मिलने पर सदर एसडीओ अरुण कुमार, एसडीपीओ दिलीप कुमार समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने परिजनों से बातचीत कर उन्हें समझाने का प्रयास किया। पुलिस अधिकारियों ने मामले की जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया, जिसके बाद जाम समाप्त कराने की कोशिश की गई। अब पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज शिक्षक की मौत को लेकर परिजन हत्या का आरोप लगा रहे हैं। वहीं, मौत की वास्तविक वजह और घटना की पूरी कड़ी पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि समसाद स्कूल से निकलने के बाद कहां गए, उनके साथ कौन-कौन लोग थे, उन्हें अस्पताल कौन लेकर पहुंचा और उनकी मौत किन परिस्थितियों में हुई।



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