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70 साल के छिंदर सिंह कहते हैं- भतीजे ने नशे के लिए स्कूटी गिरवी रख दी। घरवालों ने पूछा तो स्कूटी लेने गया और फिर उसकी लाश घर आई। 70 साल की रणजीत कौर ने कहा- बेटा नशे में पड़ा, शादी नहीं हुई। अब खाना खाकर भूल जाता है। फिर ये कहकर झगड़ा करता है कि मुझे खाना नहीं देते। यह कहानी सिर्फ छिंदर सिंह और रणजीत कौर की नहीं, बल्कि पंजाब के उन परिवारों की है, जिनके बच्चे नशे के दलदल में फंस गए। किसी ने जान गंवा ली, कोई जिंदा होते हुए भी बदतर हालत में हैं। ये परिवार कल (17 सितंबर) चंडीगढ़ में BJP की नशा विरोधी यात्रा को लेकर रखी प्रेस कॉन्फ्रेंस में पहुंचे हुए थे। जहां दैनिक भास्कर ने इनसे एक्सक्लूसिव बातचीत की, पढ़िए प्रमुख अंश…. अबोहर के रहने वाले छिंदर पाल सिंह ने बताया कि उनका भतीजा 2 साल से नशा कर रहा था। नशे की हालत इस तरह लग गई थी कि हर चीज गिरवी रखनी शुरू कर दी थी। उसने अपनी स्कूटी को गिरवी रख दिया था। घरवालों ने पूछा तो बताया कि वह स्कूटी को वहां से ले आएगा। फिर कभी घर नहीं आया। हम पूरी रात उसे तलाशते रहे। लेकिन उसका कोई सुराग नहीं लगा। बाद में ड्रग से उसकी मौत हुई। वह 22 साल का था। पढ़ने से हट गया था। दोस्तों की वजह से उसे नशे की लत लगी थी। चार साल पहले पिता की मौत हुई थी। अब माता और एक बहन रह गई। एक बहन की शादी हो चुकी है। हम इंसाफ चाहते हैं, लेकिन पुलिस कुछ इंसाफ नहीं दे रही है। रणजीत कौर, जो कि खुद 70 साल की हैं। उन्हें आंखों से दिखता नहीं है। बेंत के सहारे बड़ी मुश्किल से चलती हैं। उन्होंने बताया कि उनके दो बेटे हैं। पहले वह मिठाई के डिब्बे बनाने वाली कंपनी में काम करता था। लेकिन जब वह 20 साल का हुआ तो उसे नशे की लत लग गई। छोटे की शादी हो गई। लेकिन इसका विवाह नहीं हो पाया। अब कोई काम-काम नहीं करता था। अब सारा परिवार का बोझ एक बेटे पर आ गया है। यह नशे की गोलियां खाता है। अस्पताल से सुबह ही सरकारी दवाई ले आता है। पूरा दिन पड़ा रहता है, सोया रहता है। जब नशा उतर जाता है तो परिवार को गालियां देता है। उसे भूलना शुरू हो गया है। खाना खाकर भूल जाता है। फिर कहता है कि मुझे खाना नहीं देते हैं। यह इसकी हालत है। हम तो चाहते हैं नशा बिकना बंद हो जाए। लोग नशा खाकर पागल हो गए। 55 साल की महिंदर कौर बताती हैं कि वह नवांशहर की रहने वाली हैं। उनका बेटा नशा करता है। उसकी उम्र 25 साल है। वह बताती हैं बेटे की नशे की लत लगने की कहानी भी दिलचस्प है। बेटे को एक बार बुखार हुआ था। टायफाइड बुखार था। उसका दोस्त उसे घर से ले गया, कहता है कि एक जगह दवाई दी जाती है। बस एक टायफाइड की दवाई से नशे की लत में आ गया था। वह उस समय 5वीं में पढ़ता था। 12 साल उसकी उम्र थी। अब वह लकड़ी के आरे पर काम करता था। लेकिन 15-15 दिन घर नहीं आता है। लेकिन जितना भी वह आरे पर कमाता है, वह सारा नशे में उड़ा देता है। परिवार को कुछ नहीं देता है। हमें चिंता होती है और फोन करते हैं तो कह देता है कि आज नहीं आऊंगा। वह गलत काम कोई नहीं करता। 60 साल के पमिल कुमार पम्मी मोरिंडा के रहने वाले हैं। उन्होंने बताया, मेरे दो शादियां हुईं। मेरी पहली पत्नी के देहांत को चार साल हो गए। उन्होंने बताया कि वह शुगर मिल में काम करते थे। इस दौरान तीन महीने पेमेंट अच्छी मिलती थी। पैसा आने से पत्नी का चाल-चलन ठीक नहीं रहा। उसका किसी से रिश्ते बन गए। बेटा पत्नी के पास ही रहता था। इस दौरान बेटा नशे की चपेट में आ गया है। समझ ही नहीं आया कि आखिर बेटा नशे की चपेट में कैसे आया। उसके बाद पत्नी और बेटा दूसरे व्यक्ति को छोड़कर उसके पास आ गए। कहते हैं कि तू मेरा पिता है। अब बुरी हालत है। बेटा सेक्टर-32 GMCH में नशे की जंग लड़ रहा है। नशे पर विपक्ष हमलावर, सरकार का पलटवार
नशे को लेकर लगातार BJP, शिरोमणि अकाली दल और कांग्रेस नेता सरकार को घेर रहे हैं। उनका कहना है कि पंजाब सरकार नशे पर नकेल कसने में पूरी तरह से फेल साबित हुई है। नशे से लोगों की जान जा रही है। दूसरी तरफ मुख्यमंत्री भगवंत मान और आप नेता हरपाल सिंह चीमा का कहना है कि विपक्ष इस संवेदनशील मुद्दे पर सिर्फ राजनीतिक रोटियां सेक रहा है। सरकार ने भाजपा से सवाल किया है कि बीजेपी शासित राज्यों (जैसे गुजरात और राजस्थान) से आने वाली नशों की खेप क्यों नहीं रोकी जा रही है। जबकि उन पर आरोप लगाए जा रहे है।
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चाचा बोला- गिरवी रखी स्कूटी लेने गया, लाश घर आई:मां बोली- बेटा खाना खाकर भूल जाता है; पंजाब के नशा पीड़ित परिवारों की कहानी
