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करौली में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) का दो दिवसीय जिला स्तरीय सम्मेलन खत्म हो गया। इस सम्मेलन में शिक्षकों ने राष्ट्र निर्माण, अच्छी शिक्षा, शिक्षक हितों और संस्कारवान पीढ़ी बनाने पर बात की। इसमें संगठन को हर स्कूल तक मजबूत करने और छात्रों में राष्ट्रभक्ति, अनुशासन व सामाजिक जिम्मेदारी की भावना बढ़ाने पर जोर दिया गया। समापन समारोह की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष अशोक कुमार मीना ने की। प्रदेश सह संगठन मंत्री जयराम जाट मुख्य अतिथि थे, जबकि प्रारंभिक शिक्षा के अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी राधारमण शर्मा विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। सम्मेलन के दूसरे दिन जिला और खंड कार्यकारिणी, संकुल संयोजकों और सह-संयोजकों की समीक्षा बैठक हुई। इसमें संगठन को आगे बढ़ाने, शिक्षकों के हितों और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की गई। जयराम जाट ने कहा कि संगठन को हर स्कूल और हर शिक्षक तक पहुंचाना जरूरी है। राधारमण शर्मा ने शिक्षकों से अपील की कि वे ‘विद्यालय मेरा तीर्थ’ की भावना से काम करें। उन्होंने छात्रों में संस्कार, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति की भावना विकसित करने को कहा। पहले दिन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सवाई माधोपुर विभाग प्रचारक दीपक कुमार मुख्य वक्ता थे। उन्होंने युवाओं और शिक्षकों की सामाजिक जिम्मेदारी और भारतीय जीवन मूल्यों पर अपने विचार रखे। मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी सर्वेश कुमार गुप्ता ने शिक्षकों से विकसित भारत के लक्ष्य को पाने के लिए जिम्मेदारी से काम करने की अपील की। प्रांतीय महिला संगठन मंत्री गीता जेलिया ने प्रार्थना सभा, साफ-सफाई, पेड़ लगाने और नैतिक शिक्षा को छात्रों के चरित्र निर्माण से जोड़ने पर जोर दिया। जिला मंत्री मानवेंद्र सिंह ने बताया कि संत रविदास के 650वें जन्मदिन पर सामाजिक समरसता और बराबर समाज विषय पर एक खास भाषण भी हुआ। इस सम्मेलन में शिक्षा विभाग और समग्र शिक्षा अभियान के अधिकारी, महासंघ के पदाधिकारी और जिलेभर से बड़ी संख्या में शिक्षक-शिक्षिकाएं शामिल हुए।
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शैक्षिक महासंघ के सम्मेलन में शिक्षकों के हितों पर चर्चा:राष्ट्र निर्माण, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और भारतीय मूल्यों पर जोर दिया
