चंडीगढ़| साइबर ठगी के बाद पीड़ित को पैसे लौटाकर या समझौता करके आपराधिक मुकदमा (एफआईआर) खत्म कराने की उम्मीद रखने वालों के लिए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठगी की रकम वापस करना और समझौता कर लेना मात्र से एफआईआर रद्द नहीं की जा सकती। कोट ने इसे केवल निजी विवाद मानने से इनकार करते हुए कहा कि साइबर अपराध का असर पूरे समाज पर पड़ता है और यह वित्तीय व्यवस्था में आम जनता के भरोसे को चोट पहुंचाता है। यह फैसला गुरुग्राम के एक मामले में आया, जहां झांसे में लेकर पीड़ित से 99,461 रुपए ठग लिए गए थे। हालांकि बाद में आरोपी ने रकम वापस कर पीड़ित के साथ सेटलमेंट कर लिया और एफआईआर रद्द करने की याचिका लगाई। लेकिन हाई कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया।
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पीड़ित को अदायगी के बाद केस रद्द की मांग खारिज
