छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने कहा पत्नी व उसकी बहनों को गालियां देना, मानसिक क्रूरता




हाई कोर्ट ने दंपती के बीच चल रहे विवाद से जुड़े एक फैसले में स्पष्ट किया है कि पति का पत्नी और उसकी बहनों को फोन पर अभद्र गालियां देना और लगातार परेशान करना गंभीर मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है। जस्टिस प्रार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की डिवीजन बेंच ने कहा कि एक कामकाजी महिला या किसी भी पत्नी को इस तरह की मानसिक और शारीरिक यातना देना सहन नहीं किया जा सकता। हाई कोर्ट ने फैमिली कोर्ट के आदेश को पलटते हुए पत्नी को राहत देते हुए दिसंबर 2021 में हुई शादी को समाप्त कर दिया है। उत्तर प्रदेश के बलिया जिले निवासी महिला की शादी 5 दिसंबर 2021 को बिहार के भोजपुर निवासी आनंद कुमार गुप्ता के साथ हुई थी। शादी के कुछ दिनों बाद ही पति द्वारा पत्नी के साथ मारपीट करने, अभद्र व्यवहार करने और दहेज में एयर-कंडीशनर की मांग करने का सिलसिला शुरू हो गया था। इससे पत्नी अंबिकापुर अपने मायके आ गई थी। इसके बाद पत्नी ने अंबिकापुर के फैमिली कोर्ट में क्रूरता के आधार पर तलाक के लिए सिविल सूट दायर किया था। नौनिहालों की बुनियादी शिक्षा में किसी तरह का भेदभाव मंजूर नहीं
हाई कोर्ट ने शिक्षा के अधिकार और समान अवसरों को लेकर एक अहम फैसला सुनाया है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच ने कहा कि एक कल्याणकारी राज्य में बच्चों की बुनियादी शिक्षा के मामले में किसी भी तरह का क्षेत्रीय भेदभाव बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हाई कोर्ट ने बेमेतरा जिले के छात्रों को बड़ी राहत देते हुए राज्य शासन और शिक्षा विभाग को निर्देश दिया है कि स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में तत्काल एलकेजी कक्षाएं शुरू की जाएं और चार हफ्ते के भीतर प्रवेश प्रक्रिया पूरी कर ली जाए। राज्य के अधिकांश जिलों में स्वामी आत्मानंद अंग्रेजी माध्यम स्कूलों में एलकेजी स्तर से ही बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा था, लेकिन बेमेतरा जिले के साजा ब्लॉक के अंतर्गत आने वाले राजमोहगांव और अन्य जगहों में बजट, बुनियादी ढांचे और स्टाफ की कमी का हवाला देकर एलकेजी कक्षाएं शुरू नहीं की जा रही थीं। इससे गरीब परिवारों के बच्चे योजना से वंचित हो रहे थे। लोको पायलटों के तबादले पर अंतरिम रोक से इनकार, याचिका खारिज: बिलासपुर| हाई कोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के लोको पायलटों को बड़ा झटका दिया है। अदालत ने रेलवे प्रशासन के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसके तहत प्रमोशन के बाद कर्मचारियों का अन्य दूरस्थ स्टेशनों पर तबादला किया गया था। चीफ जस्टिस कृष्णा राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की डिवीजन बेंच ने कहा कि केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जबलपुर के आदेश में किसी प्रकार की त्रुटि नहीं है।



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