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एक गलत क्लिक से खाली हो सकता है बैंक खाता:छात्रावास की 200 छात्राओं को पुलिस ने बताया साइबर ठगी से बचने का तरीका, ओटीपी शेयर न करने की सलाह




छात्रावास में रहने वाली छात्राओं को साइबर ठग किस तरह अपना शिकार बनाते हैं और ठगी होने के बाद शुरुआती कुछ मिनट कितने अहम होते हैं, इसकी जानकारी देने के लिए स्मृतिनगर पुलिस ने विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया। पोस्ट मैट्रिक स्नातकोत्तर अनुसूचित जनजाति कन्या छात्रावास और पोस्ट मैट्रिक अन्य पिछड़ा वर्ग कन्या छात्रावास में हुए कार्यक्रम में करीब 150 से 200 छात्राओं और स्टाफ को साइबर अपराध से बचाव के तरीके बताए गए। कार्यक्रम में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी वीरेंद्र सिंह और न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी रवि कुमार महोबिया भी शामिल हुए। उन्होंने छात्राओं को कानून की जानकारी रखने और किसी भी तरह की ऑनलाइन ठगी होने पर तुरंत शिकायत करने की सलाह दी। प्रशिक्षु उप निरीक्षक बसंत पटेल ने छात्राओं को अलग-अलग तरह की ठगी के तरीके उदाहरण के साथ समझाए। डराकर या लालच देकर खाते से पैसे निकाल रहे ठग
एसआई बसंत पटेल ने बताया कि साइबर ठग अब सिर्फ बैंक अधिकारी बनकर फोन नहीं करते, बल्कि नौकरी, कर्ज, इनाम, पहचान पत्र और बैंक खाता बंद होने जैसे कई बहाने बनाकर लोगों को फंसाते हैं। कई मामलों में ठग खुद को पुलिस अधिकारी बताकर गिरफ्तारी का डर दिखाते हैं। वीडियो कॉल पर पूछताछ और घर से बाहर नहीं निकलने की धमकी देकर पैसे मांगने के मामले भी सामने आ रहे हैं। छात्राओं को बताया गया कि बैंक या कोई सरकारी विभाग फोन पर गोपनीय जानकारी, पिन या पासवर्ड मांगकर खाते की जांच नहीं करता। किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर मोबाइल में कोई अनजान ऐप डाउनलोड करना या भेजे गए लिंक पर जाना भी नुकसान का कारण बन सकता है। एक गलती और सीधे खाते से निकल सकती है रकम
पुलिस ने छात्राओं को समझाया कि ठगों के लिए सबसे बड़ी ताकत लोगों की जल्दबाजी और डर है। ठग अक्सर ऐसा माहौल बनाते हैं कि सामने वाला सोचने का समय ही न पाए। इसलिए कोई भी फोन आने पर पहले बात की सच्चाई जांचना जरूरी है। छात्राओं को साफ कहा गया कि अपना एक बार इस्तेमाल होने वाला बैंक कोड, बैंक खाते की जानकारी, कार्ड का गुप्त नंबर, मोबाइल बैंकिंग का गुप्त नंबर और पासवर्ड किसी के साथ साझा न करें। अनजान व्यक्ति की मित्रता का अनुरोध, संदेश या वीडियो कॉल स्वीकार करने में भी सावधानी बरतें। ठगी होते ही 1930 पर फोन करना सबसे जरूरी
पुलिस ने बताया कि साइबर ठगी का पता चलते ही शिकायत करने में देरी नहीं करनी चाहिए। इसके लिए 1930 पर तुरंत फोन किया जा सकता है। साथ ही संबंधित बैंक या वित्तीय संस्था को भी तत्काल जानकारी देनी चाहिए। जल्दी शिकायत मिलने पर ठगी की रकम को आगे जाने से रोकने की कोशिश की जा सकती है। देशभर में साइबर अपराध की शिकायत दर्ज करने के लिए राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल की सुविधा भी उपलब्ध है। पुलिस ने छात्राओं से कहा कि वे खुद जागरूक रहने के साथ अपने घर के लोगों को भी इन तरीकों की जानकारी दें। इससे परिवार के बुजुर्ग और दूसरे सदस्य भी ठगों के झांसे में आने से बच सकते हैं। छात्राओं ने पूछे ठगी से जुड़े सवाल
कार्यक्रम में छात्राओं और छात्रावास स्टाफ ने साइबर ठगी से जुड़े कई सवाल पूछे। पुलिस अधिकारियों ने उनके जवाब देकर बताया कि संदिग्ध फोन, संदेश या लिंक मिलने पर किस तरह उसकी जांच की जा सकती है। पुलिस ने कहा कि स्कूल, कॉलेज और छात्रावासों में ऐसे कार्यक्रमों का मकसद सिर्फ जानकारी देना नहीं, बल्कि युवाओं को अपने परिवार और आसपास के लोगों के लिए साइबर सुरक्षा की पहली कड़ी बनाना भी है। हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ में भी विद्यार्थियों को फर्जी लिंक, पहचान संबंधी ठगी और सामाजिक माध्यमों से होने वाले अपराधों के प्रति जागरूक करने के लिए ऐसे कार्यक्रम किए जा रहे हैं।



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