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लुधियाना में बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा वर्धमान-ग्लाडा मैदान में श्री हनुमान जी की कथा सुनाई जा रही है। आज कथा का चौथा दिन है। कथा में हजारों लोग रोजाना नतमस्तक होकर बाला जी का आशीर्वाद ले रहे है और अपनी परेशानियों को लेकर अर्जियां लगा रहे है। कल धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने बाला जी का दिव्य दरबार सजाया था। आज वह प्रेस वार्ता भी कर सकते है। फिलहाल अभी आयोजकों ने प्रेस वार्ता का शैडयूल जारी नहीं किया। धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि दरबार लगाने का उद्देश्य यही है कि लोग मेरे साथ जुड़े बल्कि लोगों को बाला जी के साथ जोड़ा जाए और लोगों बाला जी के बनें और बाला जी लोगों के बनें। लोगों को इधर-उधर भटकना न पड़े। उन्होंने कहा कि पंजाब प्रांत में वैसे ही गांव-गांव, गली-गली में कुछ लोग झूठे चमत्कार करके दिखाकर लोगों का धर्मांतरण करवा रहे हैं। हम उनकी ठठरी और गठरी बांधने ही आए हैं। हम किसी मजहब के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन दिखावा करके, प्रायोजित तरीके से या भय दिखाकर मतांतरण या धर्मांतरण करवाना न तो संविधान के हिसाब से ठीक है और न हमारे हिसाब से। उन्होंने कहा, “भारत के सनातनियों, तुम्हें इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं है। तुम्हारे हनुमान जी किसी से कम नहीं हैं। ऐसी कोई गली नहीं, जहां बजरंग बली की चली नहीं। जब इन्होंने लंका में डंका बजा दिया तो ये तो भारत है। तुम्हें हली-उल्लाह वालों के पास जाने की जरूरत ही क्या है। सनातनियों, एक बात पक्की मानना-जो अपने बाप को बाप नहीं कहता और पड़ोसी को बाप कहता है, वह किसी काम का नहीं होता।” उन्होंने कहा, “हमारा दरबार लगाने का कारण यही है कि लोग हमारे खिलाफ सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग करते हैं, बड़े-बड़े जुलूस निकालते हैं और बड़े-बड़े आंदोलन करते हैं, क्योंकि हमने उनकी दुकानों पर ताले लगवा दिए। हमने बात पूरे लॉजिक से कही है। गीता में भगवान श्रीकृष्ण कहते हैं कि अपने धर्म में मरना सही है।” धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “हमारे गुरु ने जो हमें शिक्षा दी, हम उसी पर चलेंगे। हम अभिमान में नहीं बोल रहे, हम स्वाभिमान में बोल रहे हैं। हम जब तक जिएंगे, तब तक इस देश में धर्मांतरण जैसा काला बाजार नहीं चलने देंगे।” उन्होंने कहा, “हम एक बार पंजाब के इस मंच से उन हली-उल्लाह वालों को कहना चाहते हैं कि सनातन धर्म के संतों को छोड़कर, गुरु परंपराओं को छोड़कर, सिख परंपराओं को छोड़कर दुनिया में किसी में ताकत नहीं है जो हमारे दरबार का सामना कर सके। जब तुम हमारे पास आओगे तो तुम्हारे बारे में इतना बताएंगे कि तुम अपनी लुगाई (पत्नी) को मुंह नहीं दिखा पाओगे। पैंट गीली करके ही वापस भेजेंगे।” उन्होंने कहा, “पहले जब मैं भारत में दरबार लगाता था तो लोग मेरा मजाक बनाते थे कि भारत के लोगों को उल्लू बनाते हो। आजकल मैं भारत में दरबार कम लगाता हूं, अंग्रेजों को ज्यादा उल्लू बनाता हूं। अब तो तुम्हें कोई टेंशन या खुजली तो नहीं हो रही। अगर हो रही हो तो अपनी ठठरी भर।” हनुमान जी ने जिस काम के लिए भेजा है वह करके जाऊंगा धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “तुम्हारी टेंशन में हम टेंशन नहीं लेते। तुम लाख पहरे लगाओ हमें मिटाने के लिए, लेकिन हनुमान जी ने हमें जिस काम के लिए भेजा है, वह काम करके ही जाएंगे। हमारे जैसे आदमी का विवाद होना लाजमी है, क्योंकि हम बातें ठीक बोलते हैं। हम कुत्ते को कुत्ता जी नहीं कह सकते। नंगे को नंगा ही कहेंगे, नंगा जी नहीं कह सकते।” उन्होंने कहा, “मैं कोई चमत्कार दिखाने नहीं आया हूं। मैं सीधा कहता हूं कि बाबाओं से लोगों का भला नहीं होगा। भला होना है तो बजरंग बाबा से होना है।” उन्होंने कहा, “मेरे भी चक्कर में लोग न पड़ें। मैं इसलिए यहां नहीं आया कि मेरे से जुड़ो। मैं इसलिए आया हूं कि तुम लोग हनुमान दादा की महिमा को समझ सको। मैं बिना अंग्रेजी के 16 देश निपटा आया। तीन देशों के प्रधानमंत्रियों से मिल आया। जब मुझ जैसे अनपढ़ पर भगवान जी की कृपा हो सकती है तो तुम भी उनके बन जाओ। जिस गांव में हम भीख मांगते थे, आज उसी गांव में बाला जी के चमत्कार के लिए अन्नपूर्णा रसोई चल रही है।” अस्पताल में मंदिर नहीं, मंदिर में अस्पताल होना चाहिए धीरेंद्र शास्त्री ने कहा, “मैंने संकल्प लिया है कि मंदिर नहीं बनाना। अगर बन गया तो कोई बुराई भी नहीं, लेकिन अब सनातनियों को एक क्रांति लानी चाहिए कि अस्पताल में मंदिर नहीं, बल्कि मंदिर में अस्पताल होना चाहिए। जहां दवा भी मिले और कृपा भी मिले।” उन्होंने कहा, “हमें सिख भाइयों से सीखना चाहिए कि कैसे लंगर सेवा होती है और कैसे बैठने की व्यवस्था होती है। गुरुद्वारा जहां होगा, वहां सेवा होगी। सनातनियों को भी यह बात समझनी चाहिए। जहां मंदिर हो, वहां सेवा होनी चाहिए। मैं किसी को चमत्कार में फंसाने नहीं आया, उन्हें जगाने आया हूं।”
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लुधियाना में आज हनुमान कथा का चौथा दिन:धीरेंद्र शास्त्री करेंगे बजरंग बली का गुणगान; रोजाना पहुंच रहे हजारों भक्त
