नई दिल्ली8 मिनट पहले
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PM मोदी ने UPSC के 100 साल पूरे होने पर लगाई गई प्रदर्शनी देखी।
यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की स्थापना के 100 साल पूरे होने पर गुरुवार को दिल्ली के भारत मंडपम में शताब्दी समारोह आयोजित किया जा रहा है।
पीएम नरेंद्र मोदी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि हैं। मोदी लोक सेवा आयोगों से जुड़े 100 ऐतिहासिक फैसलों पर आधारित किताब का लोकार्पण करेंगे।
साथ ही वह शताब्दी स्मारक सिक्का और विशेष डाक टिकट भी जारी करेंगे। इस दौरान मोदी कार्यक्रम को संबोधित भी करेंगे।
2025 में UPSC के कराए एग्जाम्स में 10 से 12 लाख छात्रों ने हिस्सा लिया था। इनमें 9 लाख से ज्यादा ने सिविल सर्विस परीक्षा का फॉर्म भरा था।

30 सितंबर से शुरू हुआ दो दिवसीय आयोजन
UPSC का यह दो दिवसीय आयोजन 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को हो रहा है। कार्यक्रम के पहले दिन भारत मंडपम में ‘शताब्दी समारोह- मंथन’ का आयोजन किया गया। इसमें अलग-अलग विषयों पर पैनल चर्चाएं हुईं थीं। प्रमुख वक्ताओं ने भी अपने विचार रखे।
कार्यक्रम में देशभर के राज्य लोक सेवा आयोगों के अध्यक्ष और सदस्य शामिल हो रहे हैं। केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद और यूपीएससी के अधिकारी भी इसमें हिस्सा ले रहे हैं।
UPSC को भारत के सबसे अच्छी एग्जाम एजेंसी मन जाता है
UPSC को सबसे सुरक्षित एग्जाम एजेंस माना जाता है क्योंकि यह संवैधानिक संस्था (अनुच्छेद 315) है, जिस पर सीधा राजनीतिक दखल नहीं होता।
इसके पेपर कई अलग-अलग प्रोफेसर्स से तैयार कराए जाते हैं और आखिरी समय तक किसी एक व्यक्ति को पूरे सवाल नहीं पता होते।
कॉपियों की कोडिंग ऐसी होती है कि जांचने वाले को छात्र का नाम या रोल नंबर नहीं दिखता, और इंटरव्यू बोर्ड के सामने भी जाति या धर्म की जानकारी नहीं रखी जाती।
इसके बावजूद UPSC पर तीन बड़े सवाल उठे हैं…
फर्जी सर्टिफिकेट विवाद: पूजा खेडकर मामले के बाद खुलासा हुआ कि उम्मीदवारों ने फर्जी दिव्यांगता (PwBD) और नॉन-क्रीमी लेयर ओबीसी सर्टिफिकेट लगाकर आरक्षण लिया। आयोग पर समय रहते दस्तावेजों की जमीनी जांच न करने के आरोप लगे।
सीसैट और भाषा भेदभाव: 2011 में लागू सीसैट पेपर में अंग्रेजी और मैथ्स के ऊंचे स्तर के चलते हिंदी व क्षेत्रीय भाषाओं के छात्रों ने भेदभाव का आरोप लगाया। साथ ही, सवालों के खराब हिंदी अनुवाद पर भी लगातार विवाद रहा।
पारदर्शिता और लेटरल एंट्री: प्रीलिम्स की आंसर-की और कट-ऑफ पूरी प्रक्रिया खत्म होने के बाद जारी करने पर छात्रों ने आपत्ति जताई। वहीं, बिना यूपीएससी परीक्षा के बड़े पदों पर सीधे निजी क्षेत्र से अफसरों की भर्ती (लेटरल एंट्री) से मेरिट और आरक्षण प्रणाली कमजोर होने के सवाल उठे।

