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औरंगाबाद में अंबा-नवीनगर मुख्य पथ पर अंबा बाजार के समीप बतरे नदी के ऊपर बना ब्रिटिशकालीन पुल अब खतरे के संकेत देने लगा है। पुल के निचले हिस्से में कई जगहों पर ढलाई टूटकर अलग हो गयी है और लोहे के सरिये बाहर निकल आए हैं। पुल के किनारे के हिस्सों में भी टूट-फूट दिखाई देने लगी है। इसके बावजूद इस मार्ग से भारी वाहनों का लगातार परिचालन जारी है। क्षमता से कई गुना अधिक भार वाले वाहनों के गुजरने से पुल पर दबाव बढ़ने की बात स्थानीय लोग कह रहे हैं। स्थानीय लोगों के अनुसार इस पुल से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की जानकारी सभी चालकों को नहीं होने के कारण भारी वाहन भी सामान्य गति से पुल को पार कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि तेज गति से गुजरने वाले भारी वाहनों के कारण पुल पर कंपन और दबाव लगातार बढ़ता है। यदि समय रहते पुल की तकनीकी जांच नहीं करायी गयी और भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित नहीं किया गया तो किसी दिन बड़ी दुर्घटना हो सकती है। पुल के नीचे की ढलाई टूटने से सरिये बाहर निकलने की स्थिति को लेकर भी लोगों में चिंता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल काफी पुराना है और वर्तमान समय में जिस तरह के भारी वाहनों का परिचालन इस मार्ग पर बढ़ा है, वह पुल की क्षमता के लिए गंभीर विषय है। लोगों ने प्रशासन से तत्काल पुल की स्थिति का आकलन कराने की मांग की है। मेह पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद बढ़ा भारी वाहनों का परिचालन स्थानीय लोगों के अनुसार बारुण प्रखंड के मेह के समीप पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद अंबा-नवीनगर मार्ग पर भारी वाहनों की संख्या अचानक बढ़ गयी है। एनटीपीसी के दोनों पावर प्लांट से जुड़े वाहनों के अलावा भारतमाला परियोजना के तहत कोलकाता-वाराणसी एक्सप्रेसवे निर्माण में लगी पीएनसी कंपनी के भारी वाहन भी इस मार्ग से गुजर रहे हैं। एनटीपीसी से निकलने वाले अपशिष्ट मटेरियल की ढुलाई के लिए बड़े बल्कर, टैंकरनुमा वाहन और ट्रेलर का इस्तेमाल किया जा रहा है। स्थानीय व्यवसायियों के अनुसार इनमें कुछ वाहनों का भार करीब 90 से 120 टन तक बताया जा रहा है। हालांकि वाहनों के वास्तविक भार का आधिकारिक आंकड़ा संबंधित विभाग की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। भारी वाहनों के बढ़े दबाव का असर अंबा बाजार की सड़क पर भी दिखाई देने लगा है। बाजार क्षेत्र में जगह-जगह सड़क टूट गयी है और बड़े-बड़े गड्ढे उभर आए हैं। भारी वाहनों के गुजरने के दौरान धूल उड़ने से दुकानदारों और राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मेह पुल के क्षतिग्रस्त होने के बाद वैकल्पिक मार्ग के रूप में इस सड़क का इस्तेमाल बढ़ा है, लेकिन पुराने पुल और सड़क की क्षमता के अनुरूप यातायात प्रबंधन नहीं किया गया है। 100 साल से अधिक पुराने पुल को लेकर लोगों में चिंता बतरे नदी पर बने इस पुल के निर्माण की सटीक तिथि से संबंधित स्पष्ट दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आयी है। स्थानीय लोगों के अनुसार पुल का निर्माण ब्रिटिश शासनकाल में कराया गया था और यह सौ वर्ष से अधिक पुराना है। लोगों का कहना है कि जिस दौर में पुल का निर्माण हुआ, उस समय इस मार्ग पर वर्तमान समय की तुलना में काफी कम वजन वाले वाहन चलते थे। 20 सूत्री अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने कहा कि पुल के नीचे की ढलाई टूटने से सरिये बाहर निकल आए हैं। ऐसी स्थिति में पुल की तत्काल जांच जरूरी है। उन्होंने भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित करने की मांग की।वरिष्ठ व्यवसायी बली सोनी ने कहा कि मेह के पास पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद एनटीपीसी से जुड़ी सामग्री की ढुलाई इसी मार्ग से बढ़ी है। इससे सड़क और पुल दोनों पर यातायात का दबाव बढ़ा है। स्थानीय अजीत पांडेय ने कहा कि बड़े बल्कर, टैंकर और ट्रेलर के परिचालन से पुराने पुल पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। व्यवसायी हरेंद्र कुमार ने बताया कि भारी वाहनों के कारण अंबा बाजार की सड़क की स्थिति खराब हो रही है और धूल के कारण दुकानदारों व राहगीरों को परेशानी हो रही है।युवा सत्यम कुमार ने कहा कि पुराने पुल पर भारी वाहनों का लगातार बढ़ता दबाव चिंता का विषय है। यदि पुल क्षतिग्रस्त होकर आवागमन बाधित हुआ तो इसका सीधा असर स्थानीय कारोबार और आम लोगों के आवागमन पर पड़ेगा। पुल की जांच के बाद निर्धारित होगी भार क्षमता 20 सूत्री सह मंडल अध्यक्ष प्रवीण गुप्ता ने जिला प्रशासन से बतरे नदी पर बने पुल की तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि जांच के बाद पुल की वास्तविक भार क्षमता निर्धारित की जानी चाहिए और उसी के अनुरूप वाहनों के परिचालन की अनुमति दी जानी चाहिए। उन्होंने पुल की मरम्मत, दोनों छोर पर रेलिंग की व्यवस्था और जरूरत पड़ने पर वैकल्पिक आवागमन की व्यवस्था करने की मांग की। साथ ही अंबा बाजार में धूल से राहत के लिए नियमित जल छिड़काव कराने की भी मांग की है। पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता गोपाल सिंह ने बताया कि अंबा में बतरे नदी पर बना पुल काफी पुराना है। इसके निर्माण काल और निर्धारित भार क्षमता से संबंधित दस्तावेज विभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं। पुल की गुणवत्ता की जांच करायी जायेगी। जांच के आधार पर भारी वाहनों के परिचालन को नियंत्रित किया जायेगा। इसके लिए पुल के दोनों छोर पर हाइट बैरियर लगाने की भी कार्रवाई की जायेगी। ऐसे में अब स्थानीय लोगों की नजर विभागीय जांच पर है। पुल की वास्तविक स्थिति और भार क्षमता की रिपोर्ट सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वर्तमान यातायात व्यवस्था में किस स्तर तक भारी वाहनों का परिचालन सुरक्षित है। फिलहाल जर्जर हिस्से में बाहर निकले सरिये और लगातार बढ़ता भारी वाहनों का दबाव पुराने पुल की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े कर रहा है।
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अंबा में बतरे नदी पर बना ब्रिटिशकालीन पुल क्षतिग्रस्त:कई जगहों पर पुल की ढलाई टूटी, क्षमता से कई गुना अधिक भार वाले वाहनों का परिचालन
