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चंडीगढ़ | पंजाब यूनिवर्सिटी के स्कूल ऑफ पंजाबी स्टडीज और नाद परगासु, श्री अमृतसर की ओर से दिवंगत कवि प्रकाश प्रभाकर की कविताओं पर साहित्यिक संगोष्ठी आयोजित की गई। आईसीएसएसआर हॉल में हुए कार्यक्रम में उनकी कविताओं के संपादित संग्रह ‘वन उपवन’ का विमोचन भी किया गया। डॉ. परमजीत कौर सिद्धू ने कहा- प्रकाश प्रभाकर की कविताएं सरलता, विशिष्टता और संवेदनशीलता के कारण पाठकों से जुड़ती हैं। उनकी प|ी ने कवि के जीवन और रचनात्मक सफर से जुड़ी यादें साझा कीं। पुस्तक के संपादक संदीप शर्मा ने संग्रह तैयार करने की प्रक्रिया के बारे में बताया। प्रो. गुरपाल सिंह संधू ने उनकी कविताओं में सिद्धांतों और परंपराओं से जुड़े सवालों की पड़ताल की। प्रो. योगराज अंगरिश ने कविता में मासूमियत और आध्यात्मिकता, प्रो. सरबजीत सिंह ने आधुनिक संवेदना, जबकि डॉ. प्रवीण कुमार ने मानवीय संवेदना और प्रेम को प्रमुखता से रेखांकित किया। पंजाबी यूनिवर्सिटी, पटियाला के प्रो. राजिंदरपाल बराड़ ने प्रकाश प्रभाकर को परिपक्व कवि बताया। डॉ. इमरतपाल सिंह, डॉ. अमरजीत सिंह, अलमित्रा प्रभाकर, इसिज प्रभाकर, डॉ. दविंदर सिंह और हीरा सिंह ने भी विचार रखे।
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स्व. प्रकाश प्रभाकर की कविताओं में प्रेम और संवेदना
