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केंद्रीय मंत्री यादव ने गोडावण सॉफ्ट-रिलीज सेंटर का किया उद्घाटन:बोले- पूरे थार क्षेत्र का गोडवण से है भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव, ईको-टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा




केंद्रीय पर्यावरण,वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव शनिवार को जोधपुर दौरे पर पहुंचे। यहां उन्होंने राजस्थान के राज्य पक्षी गोडावण (ग्रेट इंडियन बस्टर्ड-जीआईबी) के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यक्रम में शामिल हुए। केंद्रीय मंत्री ने रामदेवरा स्थित जीआईबी एवियरी एंड सॉफ्ट रिलीज सेंटर का वर्चुअल उद्घाटन किया। इस विशेष व्यवस्था में कैप्टिव-ब्रीड गोडावण को प्राकृतिक वातावरण के अनुरूप ढलने, उड़ान भरने, भोजन तलाशने और खुले वातावरण में जीवन के लिए तैयार किया जाता है। केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए कहा कि विलुप्ति की ओर बढ़ रही गोडावण प्रजाति के संरक्षण के लिए लगभग 3,600 किलोमीटर लंबे क्षेत्र को संरक्षण क्षेत्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। आमतौर पर वैश्विक स्तर पर किसी प्रजाति के पुनर्स्थापन में 25 वर्ष तक का समय लगता है, लेकिन भारत में भारतीय वन्यजीव संस्थान और अंतरराष्ट्रीय सहयोग से मात्र 7 वर्षों में यह महत्वपूर्ण सफलता हासिल की गई है। उन्होंने बताया कि कृत्रिम ऊष्मायन (आर्टिफिशियल इन्क्यूबेशन) से तैयार चूजों को मानव हस्तक्षेप से दूर रखकर प्राकृतिक माहौल में ढाला गया है, ताकि वे जंगल में स्वयं भोजन तलाश सकें। वर्ष 2022 से 2026 के बीच ‘जम्प स्टार्ट’ कार्यक्रम के जरिए इस अभियान को गति दी जा रही है। राजस्थान के अलावा गुजरात के नडिया में भी संरक्षण केंद्र शुरू किया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य कच्छ और थार के रेगिस्तानी क्षेत्रों में पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना है। थार का जीआईबी से भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव
भूपेंद्र यादव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि थार रेगिस्तान के पूरे क्षेत्र का जीआईबी से भावनात्मक और सांस्कृतिक जुड़ाव है। केंद्रीय मंत्री ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदृष्टि की सराहना की, जिसके कारण जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम सफल हुआ और पिछले एक दशक में यह वैश्विक स्तर पर एक मिसाल बन गया है। उन्होंने केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय,राज्य वन विभाग, पश्चिमी क्षेत्र के वैज्ञानिकों और स्थानीय समुदायों के प्रयासों की प्रशंसा की, जिनके प्रयासों से जीआईबी संरक्षण कार्यक्रम में तेजी से प्रगति हुई है और आज यह पक्षी अपने प्राकृतिक आवास में पुनः स्थापित होने के चरण तक पहुंच गया है। यादव ने कहा कि इस कार्यक्रम की सफलता से थार पारिस्थितिकी तंत्र की अम्ब्रेला प्रजाति के रूप में जीआईबी के संरक्षण से होने वाले पारिस्थितिक लाभों के साथ-साथ स्थानीय समुदायों को इको-टूरिज्म के रूप में आर्थिक लाभ भी प्राप्त होंगे। मुख्यमंत्री ने बताया गौरव का दिन
मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा भी वीसी के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। उन्होंने अपने संबोधन में इस दिन को पूरे राज्य के लिए गौरव का दिन बताया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयासों से थार की सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग माने जाने वाले जीआईबी को विलुप्ति के कगार से वापस लाया गया है। बस्टर्ड रिकवरी प्रोग्राम यह पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, राजस्थान वन विभाग और भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई) की एक संयुक्त पहल है, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय हौबारा संरक्षण कोष से तकनीकी सहयोग और राष्ट्रीय सीएएमपीए से वित्तीय सहायता प्राप्त है। संरक्षण-प्रजनन कार्यक्रम ने महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की है। सैम और रामदेवरा स्थित जीआईबी सुविधाओं में वर्तमान में 97 पक्षी हैं, जिनमें से 40 जंगली अंडों से उत्पन्न हुए हैं और 57 को बंदी अवस्थ (ब्रिड इन केप्टिविटी) में पाला गया है। इनमें से 86 पक्षियों को बंदी प्रजनन (कैप्टिव रिप्रोडेक्शन) के लिए रखा जा रहा है, जबकि 11 को जंगल में छोड़ने के लिए चिन्हित किया गया है। कैप्टिव रिप्रोडेक्शन के परिणामस्वरूप 2025 में 24 और 2026 में 29 जीवित चूजे पैदा हुए।



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