दुर्ग45 मिनट पहलेलेखक: विनोद तिवारी
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बीएसपी से 250 टन लोहा स्क्रैप चोरी के मामले में पुलिस के हाथ लगा कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) अब पूरे रैकेट की सबसे अहम कड़ी बन गया है। जांच में सामने आया है कि 1 जनवरी से 26 मई 2026 के बीच आरोपियों के बीच 3959 बार बातचीत हुई।
इनमें सबसे ज्यादा 840 कॉल संजय सिंह और अमित शर्मा के बीच हुईं। इसके बाद अमित शर्मा और मिथेन के बीच 823, संजय सिंह और मिथेन के बीच 668 और घनश्याम और चितानंद के बीच 657 बार बातचीत दर्ज है।
ये सभी नाम उस नेटवर्क से जुड़े हैं, जिसमें ट्रक की एंट्री, नंबर प्लेट बदलना, लोडिंग, वजन और स्क्रैप को प्लांट से बाहर निकालने की भूमिका सामने आई है। अलग-अलग लोगों के बीच इतनी बड़ी संख्या में बातचीत ने नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने में मदद की।
संजय सिंह के कथित कबूलनामे के मुताबिक मार्च से जून 2026 के बीच 30 से 40 ट्रिप में ट्रकों से बीएसपी प्लांट से लोहा स्क्रैप निकालकर अकलोरडीह, हथखोज के पास जमा किया और बाद में बेचा।
पुलिस ने इसी कथित कबूलनामे को सीडीआर और घटनास्थल के नजरी नक्शे से जोड़कर जांच आगे बढ़ाई। इसी जांच के बाद पूर्व भाजपा नेता, उद्योगपति, बीएसपी कर्मचारी समेत 21 लोगों को गिरफ्तार किया गया।
दिन में प्लांट… रात में अकलोरडीह, कॉल का समय भी अहम
सीडीआर में सिर्फ कॉल की संख्या ही नहीं, बल्कि किस समय बातचीत हुई, यह भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बना है। पुलिस के मुताबिक सुबह से दोपहर के बीच आरोपियों के बीच संपर्क ज्यादा रहा। जांच में इसे प्लांट के भीतर ट्रक की एंट्री, वजन और लोडिंग जैसी गतिविधियों से जोड़कर देखा जा रहा है। वहीं शाम और रात के समय बातचीत बढ़ने का पैटर्न सामने आया।
पुलिस के अनुसार इसी दौरान स्क्रैप को प्लांट से बाहर निकालकर अकलोरडीह की ओर ले जाने और माल की डिलीवरी से जुड़ी गतिविधियां होती थीं। यानी जांच के मुताबिक दिन की कॉल ऑपरेशन की तैयारी और प्लांट के अंदर की गतिविधियों से जुड़ी हो सकती है।
जबकि शाम-रात की कॉल ट्रक की लोकेशन, माल पहुंचने और लेन-देन से जुड़ी हो सकती हैं।
नेटवर्क में किसकी क्या भूमिका: मुख्य सरगना संजय सिंह और अमित शर्मा दोनों के बीच 840 कॉल मिले हैं। पुलिस जांच में इन्हें नेटवर्क की मुख्य कड़ी माना जा रहा है। जांच के मुताबिक ट्रकों की आवाजाही और पूरी गतिविधि के समन्वय में इनकी भूमिका की पड़ताल की जा रही है।
ऑपरेशन टीम में: मिथेन और घनश्याम इनके संपर्क लोडिंग और रूट से जोड़कर देखे जा रहे हैं। ट्रक कहां पहुंचेगा, माल कैसे लोड होगा और किस रास्ते से बाहर जाएगा, इसकी भूमिका की जांच की जा रही है।
माल खपाने वाले: मुदलियार, रुपेंद्र और रावेंद्र पुलिस इन नामों को स्क्रैप की खपत और बिक्री से जोड़कर जांच रही है। प्लांट से बाहर निकलने के बाद माल किन लोगों तक पहुंचा और उसका भुगतान किस तरीके से हुआ, इसकी पड़ताल की जा रही है। इसी कड़ी में पुलिस ने रसमड़ा की फैक्टरी से विनोद गर्ग समेत दो लोगों को गिरफ्तार किया है।
नजरी नक्शे के 6 पॉइंट से मिलाया: सीडीआर पुलिस ने 21 जून को तहरीर और 22 जून को घटनास्थल का नजरी नक्शा तैयार किया था। इसमें रोलिंग मिल गेट, खुर्सीपार से लेकर बीएसपी प्लांट के अंदर रेलवे ट्रैक जैसे पॉइंट चिन्हित किए। अब इन स्थानों को आरोपियों के मोबाइल के कॉल पैटर्न और टावर लोकेशन से मिला रहे हैं।
22 जून से पहले अचानक घट गई कॉल: जांच में एक और पैटर्न पुलिस के लिए महत्वपूर्ण बना है। पुलिस के मुताबिक 22 जून को नजरी नक्शा तैयार होने से ठीक पहले आरोपियों के बीच कॉल की फ्रीक्वेंसी में कमी आई। अब जांच इस बात की भी हो रही है कि कहीं आरोपियों को पुलिस की कार्रवाई की भनक तो नहीं लग गई थी।

