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चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव में टिकट पाने के लिए नेताओं की दौड़ के बीच अब 9 मनोनीत पार्षदों के पद के लिए भी लॉबिंग शुरू हो गई है। पूर्व अधिकारी, शिक्षक, डॉक्टर, समाजसेवी और विभिन्न संगठनों से जुड़े लोग प्रशासन तक अपने बायोडाटा पहुंचा रहे हैं। कई दावेदार अधिकारियों से संपर्क भी कर चुके हैं। खास बात यह है कि प्रशासन ने इन पदों के लिए कोई आवेदन नहीं मांगा है। मौजूदा मनोनीत पार्षदों का कार्यकाल 31 दिसंबर को खत्म हो रहा है। नए मनोनीत पार्षदों की नियुक्ति दिसंबर में होने वाले निगम चुनाव के दौरान होगी। इन 9 पार्षदों को यूटी प्रशासक नियुक्त करेंगे। सामाजिक संगठनों ने भी ठोकी दावेदारी इस बार मनोनीत पार्षद बनने के लिए राजनीतिक लोगों के साथ शहर के सामाजिक और व्यापारी संगठनों में भी सक्रियता बढ़ी है। फासवेक, क्राफ्ड, आरडब्ल्यूए और व्यापार मंडल से जुड़े लोग अपने प्रतिनिधियों को मनोनीत कराने की मांग कर रहे हैं। संगठनों की कोशिश है कि उनके क्षेत्र से जुड़े लोगों को निगम में प्रतिनिधित्व मिले। मनोनीत पार्षदों के पास अब मेयर चुनाव में वोट डालने का अधिकार नहीं है, लेकिन मेयर चुनाव में उनकी भूमिका पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। हर साल होने वाले मेयर चुनाव में डीसी की ओर से किसी मनोनीत पार्षद को पीठासीन अधिकारी बनाया जाता है। दो साल पहले मेयर चुनाव में मनोनीत पार्षद अनिल मसीह पीठासीन अधिकारी थे। विपक्ष के वोट रद्द करने के बाद उनका नाम पूरे देश में चर्चा में आया था। कांग्रेस और भाजपा दोनों भेजेंगी नाम इस बार चंडीगढ़ के सांसद कांग्रेस के मनीष तिवारी हैं। ऐसे में कांग्रेस की ओर से भी कुछ नाम प्रशासन को भेजे जाने की तैयारी है। भाजपा भी पार्टी हाईकमान की मंजूरी के बाद अपने पसंदीदा नामों की सिफारिश कर सकती है। साल 2021 में ज्यादातर मनोनीत पार्षद भाजपा नेताओं की सिफारिश पर बनाए गए थे। वहीं, वर्तमान में कुछ मनोनीत पार्षद खुद निगम चुनाव में भाजपा से टिकट मांग रहे हैं। पहले मनोनीत पार्षदों के तौर पर डॉक्टर, शिक्षक, पूर्व अधिकारी और दूसरे क्षेत्रों के विशेषज्ञों को जगह दी जाती थी। इससे निगम में अलग-अलग क्षेत्रों के अनुभव का फायदा मिलता था। बाद में इस पद पर राजनीतिक लोगों की नियुक्ति बढ़ गई। 1996 से 2017 तक मनोनीत पार्षदों को मेयर चुनाव में वोट डालने का अधिकार भी था। उस समय इन 9 पार्षदों की भूमिका काफी अहम होती थी। कांग्रेस कई बार इन्हीं के समर्थन से मेयर बनाने में सफल रही। हाईकोर्ट के आदेश के बाद वोट का अधिकार खत्म कांग्रेस अध्यक्ष एचएस लक्की ने कहा कि मनोनीत पार्षद गैर-राजनीतिक लोगों और अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञों में से बनाए जाने चाहिए। पिछले दो कार्यकाल से भाजपा ने अपने पदाधिकारियों को मनोनीत पार्षद बनाया है। उम्मीद है कि इस बार प्रशासन ऐसा नहीं करेगा। हाईकोर्ट के आदेश के बाद मनोनीत पार्षदों से मेयर चुनाव में वोट डालने का अधिकार वापस ले लिया गया। यूटी प्रशासन ने इस फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी हुई है। इसलिए इस बार नियुक्त होने वाले मनोनीत पार्षदों की भूमिका को लेकर भी नजरें रहेंगी।
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चंडीगढ़ निगम चुनाव के बीच मनोनीत पार्षदों की लॉबिंग तेज:9 पदों के लिए पूर्व अफसर, डॉक्टर, शिक्षक और समाजसेवी सक्रिय; दिसंबर में नई नियुक्ति
