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चंडीगढ़ नगर निगम में JCB-टिप्पर का काम करने वाले ठेकेदार से सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति द्वारा 14 लाख रुपए की रिश्वत मांगने के मामले में CBI द्वारा गिरफ्तारी के बाद दर्ज FIR में अब नगर निगम के कई बड़े अधिकारी भी CBI की रडार पर हैं। सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति जुलाई 2025 से ठेकेदार को हर महीने 1 लाख रुपए रिश्वत देने के लिए परेशान कर रहा था। ठेकेदार के मुताबिक, कुछ बिलों का भुगतान होने के बावजूद उससे पुराने भुगतान के लिए भी रिश्वत मांगी गई। इसके अलावा आने वाले बिलों को पास कराने के लिए भी रकम मांगी गई। शिकायतकर्ता ने जब रिश्वत की मांग को लेकर MC के ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह और SAS/अकाउंट सेक्शन के संदीप सेठी से बात की, तो शिकायत के मुताबिक वहां से भी उसे राहत नहीं मिली। CBI को दी शिकायत में ठेकेदार ने आरोप लगाया कि दोनों अधिकारियों ने भी उसे शक्ति की मांग के मुताबिक रिश्वत देने के लिए कहा, नहीं तो फर्म के आने वाले भुगतान रोकने और टेंडर रद्द कराने की बात कही गई। यही वजह है कि अब सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति के साथ शिकायत में नाम आए अन्य MC अधिकारी भी CBI के रडार पर हैं। CBI ने FIR में साफ किया है कि अन्य MC अधिकारियों की भूमिका जांच के दौरान देखी जाएगी। यानी जांच आगे बढ़ने पर यह पता लगाया जाएगा कि 14 लाख रुपए की कथित रिश्वत की मांग और रकम के बंटवारे में किन-किन अधिकारियों की भूमिका थी। 14 लाख में पुराने और आने वाले बिल शामिल सीबीआई की FIR के साथ लगी शिकायत के मुताबिक, प्रशांत भदौरिया, सेक्टर-50 निवासी और M/s People Connect Services के प्रोपराइटर हैं। उनकी फर्म नगर निगम को मैनपावर, अर्थमूवर और JCB-टिप्पर जैसी सेवाएं उपलब्ध कराती है। फर्म करीब 3 साल से MC के साथ काम कर रही है। मार्च 2026 में फर्म को MC से चंडीगढ़ की अलग-अलग लैंडफिलिंग साइटों पर JCB, टिप्पर और अन्य अर्थमूवर सेवाएं उपलब्ध कराने का 3 साल का टेंडर मिला था। कॉन्ट्रैक्ट के मुताबिक हर महीने काम पूरा होने के बाद बिल जमा किए जाते हैं। शिकायतकर्ता के अनुसार, फर्म के मासिक बिल करीब 10 लाख रुपए के होते हैं। जुलाई 2025 से हर महीने 1 लाख मांगने का आरोप शिकायतकर्ता ने CBI को बताया कि सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति जुलाई 2025 से लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था। सितंबर 2026 में वह MOH कार्यालय, हेल्थ एंड सैनिटेशन डिपार्टमेंट, सेक्टर-17 में शक्ति से मिला था। वहां उसने सितंबर महीने में JCB-टिप्पर की अटेंडेंस और लंबित भुगतान से जुड़ी जानकारी मांगी। शिकायत के अनुसार, शक्ति ने जुलाई 2025 से जुलाई 2026 तक के लिए हर महीने 1 लाख रुपए के हिसाब से रिश्वत मांगी। इसमें उन बिलों को भी शामिल किया गया, जिनका भुगतान पहले ही हो चुका था। इसके अलावा अगस्त 2026 के लंबित बिल और सितंबर की अटेंडेंस शीट के आधार पर बनने वाले बिल के लिए भी रिश्वत मांगी गई। इस तरह कुल मांग 14 लाख रुपए बताई गई। रिश्वत नहीं दी तो बिल रोकने-टेंडर रद्द की धमकी शिकायत के मुताबिक, शक्ति ने कहा कि अगर 14 लाख रुपए नहीं दिए गए तो वह फर्म के लंबित और आने वाले बिलों को क्लियर या आगे नहीं भेजेगा। शिकायतकर्ता का आरोप है कि उसे फर्म का टेंडर रद्द कराने की धमकी भी दी गई। शिकायत के अनुसार, शक्ति ने यह भी बताया कि रिश्वत की रकम अकेले उसके लिए नहीं है, बल्कि MC के अन्य अधिकारियों के बीच बांटी जानी है। शिकायत में कुलबीर, चीफ सैनिटरी इंस्पेक्टर, बलबीर राज सिंह, ज्वाइंट कमिश्नर, संदीप सेठी, SAS/अकाउंट्स और नितिन, सैनिटरी इंस्पेक्टर के नाम भी इस संदर्भ में लिए गए हैं। अफसरों को बताया- शक्ति रिश्वत मांग रहा प्रशांत भदौरिया के मुताबिक, उसने ज्वाइंट कमिश्नर बलबीर राज सिंह और SAS/अकाउंट सेक्शन के संदीप सेठी से मुलाकात कर शक्ति की रिश्वत मांगने की जानकारी दी थी। शिकायतकर्ता ने CBI को बताया कि दोनों से उसने यह भी कहा कि शक्ति उनके नाम लेकर रिश्वत मांग रहा है। शिकायत के मुताबिक, उसे कथित तौर पर कहा गया कि शक्ति की मांग के अनुसार रकम देनी होगी, वरना फर्म के आने वाले भुगतान जारी नहीं किए जाएंगे और टेंडर रद्द हो सकता है। इन आरोपों की पुष्टि अभी अदालत या स्वतंत्र जांच में नहीं हुई है। CBI ने FIR में इन अधिकारियों की भूमिका को जांच के दायरे में रखने की बात कही है। CBI ने रिकॉर्ड कर शिकायत को वेरिफाई किया अक्टूबर 2026 में शिकायतकर्ता दोबारा शक्ति से सितंबर महीने की JCB-टिप्पर की अटेंडेंस और लॉगबुक की जानकारी लेने पहुंचा। यह जानकारी सितंबर का बिल तैयार करने के लिए जरूरी थी। शिकायत के मुताबिक, शक्ति ने अटेंडेंस और लॉगबुक की जानकारी देने से इनकार कर दिया और फिर से 14 लाख रुपए देने की मांग दोहराई। शिकायत मिलने के बाद CBI ACB चंडीगढ़ के सब-इंस्पेक्टर मुनीष कुमार ने इसका सत्यापन किया। FIR के मुताबिक, सत्यापन के दौरान शक्ति की ओर से 14 लाख रुपए की रिश्वत मांगने और इसे स्वीकार करने पर सहमति से जुड़े आरोपों की पुष्टि हुई। CBI के मुताबिक, बातचीत रिकॉर्ड की गई थी। इसमें रिश्वत की रकम को अन्य MC अधिकारियों के बीच बांटने या पहुंचाने से संबंधित बातचीत भी सामने आई। धारा 7 में FIR, अब आगे की जांच CBI ने शिकायत और 7 अक्टूबर 2026 की सत्यापन रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 के तहत FIR दर्ज की है। FIR में आरोपी के तौर पर शक्ति, सैनिटरी इंस्पेक्टर, नगर निगम चंडीगढ़ का नाम दर्ज है। एफआईआर में CBI ने स्पष्ट किया है कि अन्य MC अधिकारियों की भूमिका जांच के दौरान देखी जाएगी। यानी अब जांच सिर्फ सैनिटरी इंस्पेक्टर शक्ति तक सीमित नहीं रहेगी। शिकायत में जिन अधिकारियों के नाम रिश्वत की रकम के कथित बंटवारे या मांग के संदर्भ में आए हैं, उनकी भूमिका भी CBI की जांच में सामने आ सकती है।
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चंडीगढ़ CBI की FIR के बाद MC अफसरों पर नजर:14 लाख रिश्वत लेते इंस्पेक्टर पकड़ा, ज्वाइंट कमिश्नर-अकाउंट अफसर से भी शिकायत
