India Demands UN Reforms at 81st UNGA Session in New York


संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारत ने संयुक्त राष्ट्र में व्यापक सुधारों की जरूरत पर जोर दिया। न्यूयॉर्क में महासभा की पूर्ण बैठक में भारत ने कहा – अब संयुक्त राष्ट्र को दुनिया की बदलती परिस्थितियों के हिसाब से ज्यादा प्रभावी, जवाबद

.

इस दौरान भारत के 15 सदस्यीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व चित्तौड़गढ़ के सांसद सीपी जोशी ने किया। प्रतिनिधिमंडल 3 अक्टूबर को न्यूयॉर्क पहुंचा और 11 अक्टूबर को भारत लौटेगा। महासभा की पूर्ण बैठक में भारत ने महासभा की कार्यप्रणाली को बेहतर बनाने को लेकर अपना पक्ष रखा।

महासभा संयुक्त राष्ट्र का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक मंच

अपने संबोधन में सांसद सीपी जोशी ने कहा कि भारत गुटनिरपेक्ष आंदोलन की ओर से दिए गए वक्तव्य के साथ खुद को जोड़ता है। उन्होंने एडहॉक वर्किंग ग्रुप के को-चेयर्स रोमानिया और सेंट किट्स एंड नेविस के स्थायी प्रतिनिधियों के काम की सराहना की और नए को-चेयर्स को शुभकामनाएं दीं।

उन्होंने कहा कि भारत संयुक्त राष्ट्र महासभा की केंद्रीय भूमिका को और मजबूत बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। महासभा संयुक्त राष्ट्र का सबसे ज्यादा प्रतिनिधित्व वाला, लोकतांत्रिक और सार्वभौमिक मंच है। जनप्रतिनिधित्व और सभी देशों की भागीदारी के मामले में इसकी बराबरी कोई दूसरा अंग नहीं कर सकता। इसलिए महासभा की भूमिका का सम्मान केवल शब्दों तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसके अनुरूप काम भी होना चाहिए।

कार्यप्रणाली में सुधार के लिए दिए 3 सुझाव

सीपी जोशी ने महासभा की कार्यप्रणाली में तीन बड़े सुधार सुझाए। उन्होंने कहा कि पहला, महासभा की कार्यसूची को ज्यादा व्यावहारिक बनाया जाना चाहिए। जिन विषयों पर बार-बार चर्चा होती है या जिनका विषय एक जैसा है, उन्हें एक साथ रखा जाए। जहां जरूरत हो, कुछ विषयों पर हर साल चर्चा करने के बजाय दो या तीन साल में चर्चा की जा सकती है। इससे बहस ज्यादा सार्थक और केंद्रित होगी।

दूसरा, महासभा की मुख्य समितियों और पूर्ण बैठकों के बीच बेहतर तालमेल बनाया जाना चाहिए, ताकि कामकाज ज्यादा प्रभावी हो सके। तीसरे सुझाव में उन्होंने कहा कि मानवाधिकार परिषद पहले से ही महासभा का एक महत्वपूर्ण निकाय है। ऐसे में उसके कामों की दोबारा समीक्षा या एक ही काम को दोहराने से बचना चाहिए। इससे पूरी व्यवस्था को ज्यादा सुव्यवस्थित बनाया जा सकेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि भारत महासभा के अध्यक्ष के कार्यालय को जरूरी मानता है। इसकी कार्यकुशलता, पारदर्शिता, जवाबदेही और संस्थागत व्यवस्था को मजबूत करने के प्रयास जारी रखे जाएंगे।

महासचिव की नियुक्ति में योग्यता और भौगोलिक संतुलन पर जोर

अपने संबोधन में सीपी जोशी ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र के अगले महासचिव का चयन ऐसे समय हो रहा है, जब दुनिया कई बड़ी चुनौतियों से गुजर रही है। ऐसे में सबसे योग्य व्यक्ति का चयन होना चाहिए। दूसरे वरिष्ठ पदों की तरह इस नियुक्ति में भी भौगोलिक संतुलन का ध्यान रखा जाना चाहिए।

भारत इस प्रक्रिया में महासभा की ज्यादा प्रभावी भूमिका का समर्थन करता है। सीपी जोशी ने संकल्प 79/327 के तहत हुई प्रगति और यूएन-80 पहल का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों से संयुक्त राष्ट्र को ज्यादा कुशल, प्रभावी, गतिशील और जवाबदेह बनाने में मदद मिलेगी। शांति एवं सुरक्षा, विकास और मानवाधिकार जैसे संयुक्त राष्ट्र के तीनों प्रमुख क्षेत्रों में बेहतर काम होना जरूरी है।

सुरक्षा परिषद में भी सुधार जरूरी

सीपी जोशी ने स्पष्ट कहा कि संयुक्त राष्ट्र में सुधार केवल महासभा तक सीमित नहीं रह सकते। सुरक्षा परिषद में स्थायी और निर्वाचित, दोनों श्रेणियों में सदस्य देशों की संख्या बढ़ाना अब जरूरी हो गया है। सुरक्षा परिषद को आज की वैश्विक परिस्थितियों के अनुरूप बनाया जाना चाहिए, ताकि वह मौजूदा चुनौतियों का बेहतर तरीके से सामना कर सके।

संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि भारत महासभा की कार्यप्रणाली को मजबूत बनाने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ रचनात्मक और सकारात्मक तरीके से काम करता रहेगा।

करीब पांच दशक बाद फिर बना ऐतिहासिक संयोग

इस प्रतिनिधिमंडल के नेतृत्व के साथ एक ऐतिहासिक संयोग भी जुड़ा है। 4 अक्टूबर 1977 को तत्कालीन विदेश मंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 32वें सत्र में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया था। उसी दौरान उन्होंने पहली बार संयुक्त राष्ट्र के मंच से हिंदी में भारत का संबोधन देकर इतिहास बनाया था।

इससे पहले भारत की ओर से सभी भाषण अंग्रेजी में दिए जाते थे। करीब पांच दशक बाद अक्टूबर महीने में ही भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए सीपी जोशी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत का पक्ष रखा।



Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *