सचित्र इतिहास के माध्यम से सिख पंथ की महान शख्सियतों की यादों को सहेजने वाले अमृतसर के श्री हरिमंदर साहिब समूह में स्थित केंद्रीय सिख संग्रहालय में तीन प्रमुख सिख हस्तियों की तस्वीरें स्थापित की गईं। शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) द्वारा सुप
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इस विशेष समागम में श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज, SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी और दल खालसा के वरिष्ठ नेता कंवरपाल सिंह बिट्टू सहित कई पंथक शख्सियतें मौजूद रहीं।समागम के दौरान उपस्थित पंथक नेताओं ने तीनों हस्तियों के जीवन और कुर्बानियों पर प्रकाश डाला।

मानवाधिकारों और पंथक संघर्ष के प्रतीकों को दिया गया सम्मान
जस्टिस कुलदीप सिंह: श्री अकाल तख्त साहिब के जत्थेदार ज्ञानी कुलदीप सिंह गड़गज्ज और SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने जस्टिस कुलदीप सिंह की न्यायिक सेवाओं को याद किया। उन्होंने कहा कि जस्टिस सिंह ने मानवाधिकार कार्यकर्ता जसवंत सिंह खालड़ा मामले, बंदी सिंहों की रिहाई और पुलिस ज्यादतियों के खिलाफ अदालत में दृढ़ता से न्याय की आवाज उठाई।
भाई गजिंदर सिंह: नेताओं ने भाई गजिंदर सिंह द्वारा देश-निकाले (निर्वासन) के दौरान भी कौमी अधिकारों और स्वतंत्रता के लिए किए गए संघर्ष को याद किया। दल खालसा नेता कंवरपाल सिंह बिट्टू ने इसे सिख आजादी के संघर्ष को ऐतिहासिक मान्यता करार देते हुए अकाल तख्त साहिब और SGPC का आभार व्यक्त किया। भाई गजिंदर सिंह की बेटी बिक्रमजीत कौर ने इंग्लैंड से संदेश भेजकर धन्यवाद जताया।
शहीद भाई गुरदेव सिंह देबू: पंथक सिद्धांतों पर पहरा देते हुए शहीद हुए भाई देबू की दृढ़ता और शहादत को कौम के लिए प्रेरणास्रोत बताया गया।
जनवरी से शुरू होगा केंद्रीय सिख संग्रहालय का विस्तार व आधुनिकीकरण
पत्रकारों से बातचीत करते हुए SGPC अध्यक्ष एडवोकेट हरजिंदर सिंह धामी ने बताया कि केंद्रीय सिख संग्रहालय के विस्तार और आधुनिकीकरण की व्यापक योजना पर कार्य चल रहा है। उन्होंने जानकारी दी कि संग्रहालय के आसपास की खाली जगह और नए प्रशासनिक आवासों का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद, आगामी जनवरी महीने से केंद्रीय सिख संग्रहालय के विस्तार का काम नए सिरे से और तेजी से शुरू किया जाएगा। इस योजना का मुख्य उद्देश्य देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को सिख इतिहास के बारे में अधिक व्यवस्थित, आधुनिक और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराना है।
