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हॉस्पिटल में युवक को भर्ती रख फर्जी रिपोर्ट बनाई:स्वस्थ युवक की 14 हजार प्लेटलेट्स दिखाई; लाल लैब में 1.50 आई, दौरे की दवाईयां खिलाई




सोनीपत के सेक्टर-12 स्थित कलावती आनंद मित्तल अस्पताल में डिहाइड्रेशन की समस्या के चलते भर्ती हुए गांव सांदल कलां निवासी मोंटी की प्लेटलेट्स रिपोर्ट में कथित गड़बड़ी का मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि स्वस्थ होने के बावजूद युवक को तीन दिन अस्पताल में भर्ती रखा गया और उसकी प्लेटलेट्स 42 हजार से घटाकर 14 हजार तक दिखाई गईं। वहीं, अस्पताल की लैब में तीन दिन तक एक षडयंत्र के तहत ही स्वस्थ युवक को बीमार दिखाया गया और उसके प्लेटलेट्स हर दिन कम की गई। जब 14 हजार प्लेटलेट्स की रिपोर्ट आने के करीब दो घंटे बाद युवक ने दूसरी लैब में जांच कराने पर संख्या 1.50 लाख मिली। रिपोर्टों में इस बड़े अंतर के बाद परिजनों ने अस्पताल की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। इतना ही नहीं डिहाइड्रेशन की वजह से चक्कर आने के कारण उसे दौरे पड़ने की दवाई भी खिलाई गई। जबकि युवक को किसी भी प्रकार का कोई दौरा नहीं पड़ता। जब हॉस्पिटल से जाने की बात कही तो डर दिखाया। जहां दवाइयों, जांच और एडमिट करके हजारों के बिल तैयार किए गए। मामले को लेकर मोंटी के भाई अंकित ने रक्षक सेना प्रमुख मनजीत तिहाड़ा के माध्यम से सोनीपत की सीएमओ डॉ. अलंकृता को शिकायत देकर अस्पताल और संबंधित लैब के खिलाफ जांच व कार्रवाई की मांग की है।
सबसे पहले जानिए क्या था पूरा मामला… गांव सांदल कलां के रहने वाले अंकित ने बतााया कि उसका भाई मोंटी 16 सितम्बर को अपने कार्यालय के काम से सोनीपत आया हुआ था। इसी दौरान उसे अचानक डिहाइड्रेशन की समस्या हुई। तबीयत बिगड़ने पर उसके सहयोगी ने 16 सितंबर को उसे सेक्टर-12 स्थित कलावती आनंद मित्तल अस्पताल में भर्ती करवा दिया। परिजनों के अनुसार, भर्ती होते ही उसके टेस्ट करवाए गए। कुछ देर बाद मोंटी की तबीयत ठीक हो गई थी, लेकिन डॉक्टरों ने स्थिति गंभीर बताते हुए उसे अस्पताल में भर्ती रहने की सलाह दी। परिवार का आरोप है कि युवक को तीन दिन तक अस्पताल में भर्ती रखा गया, जबकि इस दौरान उसकी तबीयत सामान्य थी। पहले दिन से स्वस्थ युवक मोंटी को दौरे की दवाइयां खिलाई गई। जबकि आज तक मोंटी को किसी प्रकार की दौरे से या अन्य कोई भी बीमारी नहीं है।
हॉस्पिटल में टेस्ट से एडमिट कर बिल बनाने का खेल तीन दिन में घटाकर 14 हजार पर पहुंचाई प्लेटलेट्स: परिजनों के अनुसार, कलावती आनंद मित्तल अस्पताल के बेसमेंट में स्थित प्रिसिजन डायग्नोस्टिक्स लैब में मोंटी का ब्लड टेस्ट हुआ। 16 सितंबर को प्लेटलेट्स 42 हजार, 17 सितंबर को 31 हजार और 18 सितंबर सुबह 10:30 बजे 19 हजार बताई गईं। मोंटी की तबीयत ठीक थी, लेकिन लगातार घटती संख्या से परिजनों को शक हुआ। शाम 4:45 बजे आई रिपोर्ट में प्लेटलेट्स 14 हजार बताकर डॉक्टर ने प्लाज्मा चढ़ाने की तैयारी शुरू कर दी। 2 घंटे बाद लाल पैथ में 1.50 लाख, हरि लैब में मिलीं 2.50 लाख :18 सितंबर को मोंटी ने खुद बाहर स्थित लाल पैथ लैब में टेस्ट कराया, तो महज 2 घंटे बाद प्लेटलेट्स 1.50 लाख निकलीं। 19 सितंबर को डॉ. आनंद मित्तल ने लाल पैथ की रिपोर्ट को गलत बताकर अस्पताल में दोबारा टेस्ट कराया, तो प्लेटलेट्स 55 हजार आईं। इसके बाद अस्पताल की लैब कर्मचारी के कहने पर उसी सैंपल की जांच गीता भवन चौक स्थित ‘हरि लैब’ में कराई गई, जहां प्लेटलेट्स 2.50 लाख निकलीं। 2025 की दूसरी रिपोर्ट पर हाथ से लिखा मोंटी का नाम: परिजनों का गंभीर आरोप है कि अस्पताल ने दस्तावेजों में भारी हेरफेर की। जहां ईसीजी में भी गडबडी की गई। साल 2025 की किसी अन्य मरीज की पुरानी रिपोर्ट पर हाथ से मोंटी का नाम लिखकर उसका बिल बना दिया गया। जब परिवार ने छुट्टी मांगी, तो लामा (LAMA – मेडिकल सलाह के खिलाफ) की प्रक्रिया पूरी कराकर यह कहते हुए डराया गया कि बाहर जाकर कुछ हुआ तो अस्पताल की जिम्मेदारी नहीं होगी। गलत रिपोर्ट के चक्कर में छूट गई नौकरी: शिकायतकर्ता भाई अंकित ने बताया कि मोंटी पहले दिन से ठीक था। अस्पताल ने पैसों के लालच में फर्जी रिपोर्ट बनाई। डॉक्टर ने रिपोर्ट के आधार पर मोंटी को कहा कि वह अब कभी ड्राइविंग नहीं कर पाएगा। इस वजह से कंपनी ने मोंटी को नौकरी से निकाल दिया और वह बेरोजगार हो गया। पीड़ित परिवार ने स्वास्थ्य मंत्री से सख्त कार्रवाई की गुहार लगाई है।

मामले में किसने क्या कहा: 2 घंटे में इतना बड़ा बदलाव सामान्य नहीं: एक्सपर्ट सोनीपत सिविल अस्पताल के डॉ. शैलेंद्र राणा ने बताया कि सामान्य परिस्थितियों में 2 घंटे के भीतर प्लेटलेट्स में इतना बड़ा उतार-चढ़ाव संभव नहीं है। डेंगू या मलेरिया में प्लेटलेट्स 20 हजार से नीचे जाने पर मरीज की हालत गंभीर हो जाती है। रॉ-डाटा निकलवाकर हो निष्पक्ष जांच: रक्षक सेना रक्षक सेना प्रमुख मनजीत तिहाड़ा ने स्वास्थ्य विभाग से कलावती अस्पताल की लैब का रॉ-डाटा और लॉगबुक निकलवाकर जांच की मांग की है, ताकि पता चल सके कि अन्य मरीजों के साथ भी तो ऐसा फर्जीवाड़ा नहीं किया जा रहा। जांच के बाद होगी कड़ी कार्रवाई: सीएमओ सोनीपत की सीएमओ डॉ. अलंकृता ने बताया कि शिकायत के आधार पर मामले की जांच करवाई जाएगी। अस्पताल की लैब रिपोर्ट, मेडिकल रिकॉर्ड और अन्य लैब की रिपोर्ट्स की गहन पड़ताल के बाद ही सच्चाई सामने आएगी।



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