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Navratri Fasting Flours; Kuttu Singhara Rajgira Sama Atta Benefits


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17 मिनट पहलेलेखक: अदिति ओझा

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नवरात्रि की शुरूआत हो चुकी है। कई लोग पूरे नौ दिन का व्रत रख रहे हैं। इस दौरान घरों की रसोई में कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा, समा और मखाना जैसे फूड आइटम्स की वापसी हो जाती है।

भारत में उपवास की परंपरा हजारों साल पुरानी है। वैदिक और पुराणकालीन साहित्य व्रत को आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना का माध्यम मानता है। संस्कृत में ‘उपवास’ का मतलब सिर्फ खाना छोड़ना नहीं, बल्कि ईश्वर के करीब रहना भी है।

यही वजह है कि लोग व्रत में गेहूं और दूसरे अनाजों की जगह कुछ कुछ ऐसे फूड्स खाते हैं, जिनमें कोई बीज होता है, कोई मिलेट और कोई जलीय पौधे से मिलता है।

दिलचस्प बात यह है कि जिन चीजों को भारतीय परिवार पीढ़ियों से नवरात्रि और अन्य व्रतों में खाते आ रहे हैं, आज वही आधुनिक पोषण विज्ञान की भाषा में ‘ग्लूटेन-फ्री फूड्स’ कहलाते हैं। इन फूड्स में व्रत में इस्तेमाल होने वाले कई तरह के आटे भी शामिल हैं।

हालांकि सभी ग्लूटेन-फ्री आटे एक जैसे नहीं होते। किसी में प्रोटीन ज्यादा है, किसी में फाइबर तो कोई कैल्शियम और अन्य मिनरल्स का अच्छा सोर्स है।

इसलिए आज ‘जरूरत की खबर‘ में ग्लूटेन फ्री आटों की बात करेंगे। साथ ही जानेंगे कि-

  • इसके क्या हेल्थ बेनिफिट्स हैं?
  • क्या ग्लूटेन फ्री आटा वेट लॉस में मददगार है?

एक्सपर्ट- डॉ. अनु अग्रवाल, सीनियर क्लीनिकल डाइटीशियन, फाउंडर- ‘वनडाइटटुडे’

सवाल- क्या व्रत में खाए जाने वाले सभी आटे ग्लूटेन-फ्री होते हैं?

जवाब- हां, व्रत में इस्तेमाल होने वाले ज्यादातर पारंपरिक आटे ग्लूटेन-फ्री होते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • कुट्टू, सिंघाड़ा, राजगिरा, समा और मखाना जैसे आटे बीजों, कंदों या मिलेट्स से तैयार किए जाते हैं, इसलिए इनमें ग्लूटेन नहीं होता।
  • ग्लूटेन एक प्रकार का प्रोटीन है, जो गेहूं, जौ और राई जैसे अनाजों में पाया जाता है।
  • चूंकि व्रत वाले इन आटों में ग्लूटेन नहीं होता। इसलिए इन्हें गेहूं के विकल्प के रूप में खाया जाता है।

सवाल- व्रत में ग्लूटेन-फ्री आटा ही क्यों खाया जाता है?

जवाब- पॉइंटर्स से समझिए-

  • व्रत में गेहूं, जौ और अन्य सामान्य अनाजों से परहेज करने का आधार मुख्य रूप से धार्मिक परंपराएं हैं।
  • इसके पीछे कुछ व्यावहारिक और वैज्ञानिक पहलू भी हैं।
  • व्रत में लोग कम खाते हैं और कई घंटे तक भूखे रहते हैं। इसलिए वे ऐसे फूड्स चुनते हैं, जो शरीर को ऊर्जा दें और लंबे समय तक पेट भरा रखें।
  • कुट्टू, राजगिरा, सिंघाड़ा और समा जैसी चीजें इसी वजह से व्रत के भोजन का हिस्सा बन गईं।

सवाल- क्या ग्लूटेन-फ्री होने का मतलब ज्यादा हेल्दी होना है?

जवाब- नहीं। किसी फूड का ग्लूटेन-फ्री होना उसे अपने आप ज्यादा हेल्दी नहीं बनाता। किसी आटे की पौष्टिकता इस बात से तय होती है कि उसमें कितना प्रोटीन, फाइबर, विटामिन और मिनरल्स हैं। इसलिए अलग-अलग ग्लूटेन-फ्री आटों की न्यूट्रिशन प्रोफाइल को समझना जरूरी है।

एक-एक करके सभी ग्लूटेन-फ्री आटों की प्रोफाइल समझते हैं-

कुट्टू का आटा

  • यह व्रत में सबसे ज्यादा खाए जाने वाले आटों में से एक है।
  • इसे अंग्रेजी में बकव्हीट (Buckwheat) कहते हैं।
  • नाम में ‘व्हीट’ होने के बावजूद इसका गेहूं से कोई संबंध नहीं है।
  • यह अनाज नहीं, बल्कि एक बीज है। इसलिए इसमें प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन नहीं होता।
  • कुट्टू के आटे में कार्बोहाइड्रेट के साथ प्रोटीन और फाइबर भी होते हैं।
  • इसमें मैग्नीशियम, फॉस्फोरस और एंटीऑक्सिडेंट जैसे पोषक तत्व होते हैं।
  • इसकी रोटी या चीला खाने के बाद लंबे समय तक पेट भरा रहता है।
  • हालांकि कुट्टू की पूड़ी या पकौड़े तलने पर उनकी कैलोरी काफी बढ़ जाती है।

सिंघाड़े का आटा

  • यह पानी में उगने वाले फल ‘वाटर चेस्टनट’ से बनाया जाता है।
  • इसका स्वाद हल्का मीठा होता है, इसलिए व्रत के कई डिशेज में इसका इस्तेमाल होता है।
  • यह मुख्य रूप से कार्बोहाइड्रेट का सोर्स है, इसलिए जल्दी ऊर्जा देता है।
  • इसमें पोटेशियम होता है, जो मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में मदद करता है।
  • इसमें प्रोटीन और फाइबर की मात्रा कुट्टू या राजगिरा से कम होती है।
  • बेहतर संतुलन के लिए इसे दही, दूध या मूंगफली के साथ खाया जा सकता है।

राजगिरा का आटा

  • इसे व्रत के सबसे पौष्टिक फूड्स में गिना जाता है।
  • यह एक प्लांट बेस्ड फूड है। यह प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होता है।
  • राजगिरा प्रोटीन के साथ शरीर को कैल्शियम, आयरन और मैग्नीशियम जैसे जरूरी मिनरल्स भी देता है।
  • बच्चों, बुजुर्गों और शारीरिक रूप से सक्रिय लोगों के लिए यह अच्छा विकल्प है।

समा का आटा

  • समा मिलेट परिवार का सदस्य है।
  • मिलेट्स को लेकर बढ़ी जागरूकता के साथ इसकी लोकप्रियता भी बढ़ी है।
  • इसमें अच्छी मात्रा में फाइबर होता है, जो पेट को देर तक भरा रखता है।
  • व्रत के दौरान इसे संतुलित भोजन विकल्प माना जाता है।

मखाना आटा

  • मखाना कमल के बीजों से तैयार होता है।
  • ज्यादातर लोग इसे भूनकर खाते हैं। लेकिन इसका आटा भी बनता है और व्रत के कई व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है।
  • मखाना आटा हल्का होता है और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है।
  • इसमें कैल्शियम, मैग्नीशियम और फॉस्फोरस जैसे मिनरल्स होते हैं।
  • ये मिनरल्स बोन हेल्थ को सपोर्ट करते हैं।
  • मखाने में फैट अपेक्षाकृत कम होता है। इसलिए लोग इसे व्रत में खाते हैं।

सवाल- क्या ग्लूटेन फ्री आटे से बनी हर चीज हेल्दी होती है?

जवाब- नहीं। किसी भी खाने का पोषण मूल्य इस बात से तय होता है कि उसे कैसे बनाया गया है, उसमें कितनी चीनी, नमक या तेल इस्तेमाल हुआ है और आप उसे कितनी मात्रा में खाते हैं। इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी पूड़ी को डीप फ्राई करने पर उसमें कैलोरी और फैट बढ़ जाते हैं।
  • कई पैकेज्ड ग्लूटेन-फ्री स्नैक्स में अतिरिक्त चीनी, नमक और फैट मिलाया जाता है।
  • कम तेल में बनी रोटी, चीला या खिचड़ी अपेक्षाकृत बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
  • जरूरत से ज्यादा खाने पर हेल्दी भोजन भी वजन बढ़ा सकता है।

सवाल- ग्लूटेन फ्री अनाज के हेल्थ बेनिफट्स क्या हैं?

जवाब- इनमें फाइबर, प्रोटीन, विटामिन और मिनरल्स होते हैं, जो शरीर को ऊर्जा देने के साथ-साथ पाचन और ओवरलऑल हेल्थ को भी सपोर्ट करते हैं। पॉइंटर्स में इसके सभी हेल्थ बेनिफिट्स देखिए-

  • कुट्टू, राजगिरा और समा में मौजूद फाइबर डाइजेशन को सपोर्ट करते हैं।
  • राजगिरा और कुट्टू अपेक्षाकृत प्रोटीन के अच्छे सोर्स हैं।
  • राजगिरा और मखाना कैल्शियम प्रदान करते हैं।
  • कुट्टू और राजगिरा से आयरन व मैग्नीशियम जैसे मिनरल्स मिलते हैं।
  • फाइबर और प्रोटीन पेट को देर तक भरा रखने में मदद करते हैं।
  • सीलिएक डिजीज या ग्लूटेन सेंसिटिविटी वाले लोगों के लिए ये अच्छे विकल्प हैं।

सवाल- अगर कोई वेट कम करना चाहता है तो क्या उसे ग्लूटेन फ्री आटा खाना चाहिए?

जवाब- इसे पॉइंटर्स से समझिए-

  • कुट्टू, राजगिरा और समा जैसे कुछ ग्लूटेन-फ्री आटों में फाइबर और प्रोटीन होते हैं, जो पेट को देर तक भरा रखते हैं।
  • इससे भूख और ओवरईटिंग कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है, जो वेट लॉस को सपोर्ट करता है।
  • हालांकि, सिर्फ ग्लूटेन-फ्री आटा खाने से वजन कम नहीं होता।
  • इसके लिए कैलोरी डेफिसिट, रेगुलर फिजिकल एक्टिविटी, पर्याप्त नींद और संतुलित डाइट भी जरूरी है।

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ग्राफिक- महेंद्र वर्मा

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